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वेध दोष (Vedh Dosha)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार वेध दोष के लिए पंचशलाका (Panchshalaka)और सप्तशलाका (Shaptshalaka) दो प्रकार से वेध का विचार किया जाता है। पंचशलाका से वेध का विचार करने के लिए पंच रेखाएं सीधी और पांच रेखाएं आड़ी खींची जाती हैं व दो रेखाएं एक कोने से दूसरे कोने की ओर खींची जाती है। इस चक्र में विवाह नक्षत्र यानी चन्द्रमा जिस नक्षत्र में स्थित है उस नक्षत्र के सामने जो भी नक्षत्र है उसमें अगर कोई ग्रह है तो चन्द्रनक्षत्र का वेध होगा (Wedh of Chandra Nakshatra) और यह वेध दोष के नाम से जाना जाएगा। इसी प्रकार की प्रक्रिया सप्तशलाका के लिए भी होती है परंतु इसमें दो रेखाएं एक कोने से दूसरे कोने तक नहीं खींची जाती है यानी सप्तशलाका के लिए सिर्फ सीधी और आड़ी सात रेखाएं खींची जाती है।
इस दोष के सम्बन्ध में निष्कर्ष के रूप में यही कहा जा सकता है कि विवाह नक्षत्र का जिस नक्षत्र के साथ वेध हो उस नक्षत्र में अगर कोई ग्रह स्थित हो तो वेध माना जाएगा इसे आप उदारण से इस तरह समझ सकते हैं जैसे चन्द्रमा कृतिका नक्षत्र में हो और उसके सामने विशाखा नक्षत्र (Vishakha Nakshatra) हो जिसमें मंगल या कोई अन्य ग्रह उपस्थित हो तो दोष लगेगा अन्यथा नहीं। इस दोष को समझने के लिए आप दिए गये चार्ट को देख सकते हैं इससे इस दोष को समझना आसान होगा।
वेध दोष के विषय में आंकलन करने के लिए कुछ ज्योतिषाचार्य पाद भेद (Paad Vedh) का भी विचार करते हैं इसके अन्तर्गत यह माना जाता है कि एक ग्रह किसी नक्षत्र के चौथे चरण में हों व दूसरा ग्रह वेध नक्षत्र यानी जिस नक्षत्र में चन्द्र हो उसके सामने पड़ने वाले नक्षत्र के प्रथम चरण में हो तो वेध होगा। उपरोक्त प्रकार से अगर एक ग्रह तृतीय चरण में हो और दूसरा ग्रह वेध नक्षत्र के द्वितीय चरण में हो तो वेध होगा। अन्य प्रकार से चरण होने से "पाद वेध" में वेध का अभाव समझा जाएगा।
मुहुर्त में वेध दोष होने पर किस प्रकार का परिणाम प्राप्त होता है आइये इसकी जानकारी प्राप्त करें। अगर वेध कारक ग्रह सूर्य हो तो विधवा होना पड़ सकता है (If the Vedh Factor is Sun then you should extend the date of marriage, either you would be widow), यदि वेध कारक ग्रह मंगल हो तो पुत्रशोक सहना पड़ता है, बेध कारक बुध हो तो विभिन्न प्रकार का शोक होता है, गुरू हो तो संतान प्राप्ति में बाधा आती है, वेध कारक शुक्र के होने पर पत्नी अपने पति के प्रति वफादार नहीं होती है, वेध कारक शनि के होने से मृतसंतान जन्म लेती है और वेध कारक राहु हो तो पत्नी अन्य पुरूषों से सम्बन्ध रखती है व केतु वेध कारक होने से नाश होता है।
वेध दोष इन स्थितियों में प्रभावहीन हो जाता है (Vedh Dosha is not affected in these Condition):
1.विवाह लग्न में शुभ ग्रह मौजूद हो।
2.विवाह लग्नेश एकादश भाव में स्थित हो तथा शुभ ग्रह से युत या दृष्ट हो।
3.चन्द्रमा बलवान स्थिति में हो।
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