विद्यारम्भ संस्कार(Vidyarambh Sanskar)
मानव को मानव इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके पास बुद्धि और ज्ञान होता है। ज्ञान और बुद्धि में निखार लाने के लिए हम मानव शिक्षा ग्रहण करते हैं। शिक्षा से हमारे संस्कार, विचार और सोचने का तरीका बदलता है और हम सुसंस्कृत बनते हैं जिससे समाज और राष्ट्र के विकास में हम सक्रिय रूप से योगदान दे पाते हैं।
हमारे शास्त्र बताते है कि बच्चे जब शिक्षा ग्रहण करने योग्य हो जाएं तब विद्यारम्भ संस्कार आयोजित किया जाना चाहिए (The vidya-arambh, or commencement of education rite is done when the children are of a suitable age), इस संस्कार में गुरू बच्चे को पहली बार अक्षर से परिचय कराते हैं। आइये इस संस्कार के विषय में कुछ और भी जानें और यह मालूम करें कि यह किस मुहुर्त में किया जाना चाहिए।
विद्यारम्भ संस्कार में सबसे पहले गणेश जी, गुरू, देवी सरस्वती और पारिवारिक इष्ट की पूजा की जाती है(In Vidyarambh sanskar firstly we are worship of Lord Ganesha and Devi Saraswati ) । इन देवी देवताओं का आशीर्वाद लेने के बाद गुरू बच्चे को अक्षर का ज्ञान देते हैं। इस संस्कार में गुरू पूरब की ओर और शिष्य पश्चिम की ओर मुख करके बैठते हैं। संस्कार के अंत में गुरू को वस्त्र, मिठाई एवं दक्षिणा दी जाती है और गुरू बालक को आशीर्वाद देते हैं। विद्यारम्भ संस्कार जन्म के पांचवे वर्ष उत्तरायण में किया जाता है(When child completed fifth year then Vidyarambh Sanskar is Conducted)
क्षत्र (Nakshatra):
विद्यारम्भ संस्कार के लिए मुहुर्त ज्ञात करते समय सबसे पहले नक्षत्र का विचार किया जाता है (Consideration of Nakshatra at the time of Muhurta for vidyarambh Sanskar)। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार हस्त, अश्विनी, पुष्य और अभिजीत, पुनर्वसु, स्वाती, श्रवण, रेवती, चित्रा, अनुराधा और ज्येष्ठा नक्षत्र को विद्यारम्भ संस्कार के लिए बहुत ही अच्छा माना गया है(As per Astrology Hast,Ashvini,Pushaya and Abhijit, Punarvsu,Swati,Shravan,Raivti,Chitra,Anuradha and Jaysht Nakshatras are Auspicious for Vidyarambh Sanskar)।
तिथि(Date):
इस संस्कार के लिए ज्योतिषशास्त्र कहता है कि द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्टी, दशमी, एकादशी, द्वादशी तिथि अनुकूल होती है। आप इनमें से किसी भी तिथि को यह संस्कार कर सकते हैं।
वार(Day):
बात करें वार कि तो इस संस्कार के लिए सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को बहुत ही शुभ माना जाता है। माता पिता अपनी संतान का विद्यारम्भ इन वारों में से किसी वार को कर सकते हैं।
लग्न(Ascendent):
विद्यारम्भ संस्कार के लिए मुहुर्त ज्ञात करते समय लग्न की स्थिति कैसी होनी चाहिए आइये इसे देखें। वृष, मिथुन, सप्तम में हों एवं दशम भाव में शुभ ग्रह हों व अष्टम भाव खाली हों तो यह उत्तम होता है
निषेध(Nishadeh):
ज्योतिषशास्त्री बताते हैं कि चन्द्र व तारा दोष होने पर विद्यारम्भ नहीं करना चाहिए(You should not Perform Vidyarambh Sanskar at the time of Chandrama and Tara Dosha)। तारा और चन्द्र दोष से मुक्त होने पर ही इस संस्कार की शुरूआत करनी चाहिए।
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