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विवाह संस्कार (Vivaha Sanskar Part I)
विवाह संस्कार के लिए उत्तर भारत में अष्टकूट मिलान तथा दक्षिण भारत में बीसकूट मिलान किया जाता है( Ashtkoota system is popular in north india while beeskoota in south india for marriage matching kundli)। वर कन्या की कुण्डली में अधिक से अधिक गुणों का मिलान होने पर वर और कन्या दोनों को विवाह की आज्ञा दी जाती है। विवाह के सम्बन्ध में दस दोषों (लत्ता दोष(latta Dosha), पात दोष(Pat Dosha) का भी विचार किया जाता है। यद्यपि कोई भी विवाह मुहुर्त ऐसा नहीं होता जिसमें दस दोषों में कोई भी दोष न हो। इसलिए ऐसा मुहुर्त निकाला जाता है जिसमें कम से कम दोष हो। कुण्डली मिल जाने के बाद देखा जाता है कि शादी कब हो सकती है। शादी की तिथि निकालते समय किन किन विषयों पर विचार किया जाता है आइये इसे देखें।
मास(Month):
विवाह संस्कार के लिए सबसे पहले मास का विचार किया जाता है। जब वृश्चिक, मकर, कुम्भ, मेष, वृष तथा मिथुन राशियों में सूर्य मौजूद होता है तब विवाह के लिए उत्तम मास होता (When sun is situated in Scorpio,Capricon,Aquarious,Aries,Taurus or Jemini sign, it is auspicious month for marriage)। इन सूर्य मास में यह संस्कार किया जा सकता है।
निषेध मास(inauspicious month):
आषाढ़ शुक्ल पक्ष(Ashad Shukal paksh) की एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष(Karit Shukal Paksh) की एकादशी तक, खर मासों (khar mass) (सूर्य के धनु एवं मीन राशि में होने पर) विवाह संस्कार नहीं होता है। पंजाब में खर मासों को छोड़कर कर्क, सिंह एवं कन्या सौर मासों में भी विवाह किया जाता है (Except khar mass ,Cancer,Lio,and Virgo solar month is consider good for marriage in Punjab)। पहाड़ी क्षेत्रों में तो सूर्य के तुला राशि में होने पर भी विवाह होता है(Usually, If Sun is situated in libra rashi it is not good muhurta for marriage but mountain area's people consider it good for marriage muhurta)। जब सूर्य वृष राशि में हो अर्थात ज्येष्ठ मास में हो तो घर के प्रथम (ज्येष्ठ) पुत्र या पुत्री का विवाह नहीं करना चाहिए। कुछ विद्वानों का मत है कि केवल खर मासों (धनुस्थ एवं मीनस्थ सूर्य) को ही विवाह में वर्जित करना चाहिए। खर मासों को छोड़कर सभी मासों में विवाह किया जा सकता है।
तिथि(Tithi):
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार विवाह के लिए द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियां शुभ मानी जाती है(According to the Aistrology Second, Third, Fifth, Seventh, Tenth, Eleventh and Thirteen tithi are very Auspicious for Marriage)। इन तिथियों में विवाह उपयुक्त और शुभ होता है।
वार(Day):
विवाह संस्कार के लिए वार की बात करें तो ज्योतिषशास्त्र में सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को उत्तम माना गया है(As per Aistrology Monday, Wednesday, Thrusday and Friday is very Auspicious for Vivaha Muhurat)। रविवार, मंगलवार एवं शनिवार इसके लिए बहुत ही उत्तम होता है।
योग(Yog):
ज्योतिषशास्त्र में अशुभ योगों को छोड़कर सभी शुभ योग विवाह के लिए अच्छे माने जाते हैं(According to the Aistrology all Auspicious yoga are good for marriage inspite of Inauspicious Yog) । विवाह के दिन कोई भी योग हो अगर वह अशुभ नहीं है तो विवाह किया जा सकता है।
लग्न(Ascendent):
विवाह के लिए लग्न शुद्धि को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है(Accuracy of Ascendent is very important for Marriage muhurta) । लग्न चाहे कोई भी हो परंतु वह पाप दोष से मुक्त एवं शुभ योग से युक्त हो तो विवाह के लिए अच्छा माना जाता है(Every lagna is good for marriage if they are free from pap Dosha)। ज्योतिष के अनुसार (प्रतिपदा, चतुर्थ, सप्तम, दशम) एवं त्रिकोण (5,9) में शुभ ग्रह हों तो तथा (3, 6, 11) में यदि पाप ग्रह हो तो लग्न बलवान माना जाता है। सप्तम व अष्टम भाव विवाह मुहुर्त के समय ग्रह रहित होना चाहिए।
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