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Yatra Muhurat -2 : Var Shoola, Yoga, Chandranivas, Sammukh Sukra, Parigh Dand

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6.वारशूल (Varshula):
ज्योतिषशास्त्रियों का मानना है कि यात्रा पर निकलने से पहले मुहुर्त का विचार करते हुए वार शूल का भी ध्यान रखना चाहिए। वारशूल से बचने के लिए सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा में नहीं जाना चाहिए। सोमवार और बृहस्पतिवार को आग्नेय दिशा में यात्रा नहीं करना चाहिए। दक्षिण दिशा में बृहस्पतिवार को यात्रा नहीं करनी चाहिए। रविवार और शुक्रवार को नैऋत्य एवं पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। मंगलवार के दिन वायव्य दिशा में यात्रा करना वारशूल का कारण बनता है अत: इस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए। मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा में यात्रा करना अशुभ होता है क्योंकि इस दिन इस दिशा में वार शूल लगता है। बुधवार और शनिवार को इशान यानी उत्तर पूर्व दिशा में यह शूल लगता है अत: इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए।

7.योग (Yoga):
यात्रा के संदर्भ में योगों का आंकलन भी आवश्यक होता है। अगर यात्रा के दिन निम्न अशुभ योग हो तो यात्रा नहीं करनी चाहिए। जैसे व्यातिपात (Vyatipat),

  • वैधृति (Vaidhiriti),
  • मृत्यु (Mritu),
  • दग्ध (Dagdha),
  • काक्रच (Kakrach),
  • सम्वर्तक (Samvartak),
  • हुताशन (Hutasan),
  • विष (Vish) और
  • यमघण्ट(Yamghant)

8.चन्द्रनिवास (Chandra Nivas):
चन्द्रनिवास में देखा जाता है कि चन्द्रमा किस दिशा में हैं (In which directon Moon is situated in Chandra Nivas) । जिस दिशा में चन्द्रमा होता है उस दिशा में यानी सम्मुख दिशा में और दाहिने दिशा में यात्रा करना शुभ होता है एवं पीछे और बायीं ओर यात्रा करना ठीक नहीं माना जाता है। इसे आप एक उदाहरण से समझ सकते हैं माना कि आज चन्द्रमा पूर्व दिशा में है और आपको पूर्व में जाना है तो यात्रा के लिए यह शुभ स्थिति है, अगर आप दक्षिण में जाना चाहें तो इसके लिए भी चन्द्र शुभ है क्योकि पूर्व दिशा से दायीं ओर दक्षिण दिशा है।

चन्द्र निवास को आप आसानी से समझ सकें इसके लिए चन्द्र निवास चक्र दिया गया है, आप इसे देख सकते हैं।

चन्द्र निवास के अन्तर्गत चन्द्रमा अगर मेष, सिंह अथवा धनु राशि में है तो यह माना जाता है कि चन्द्रमा आज पूर्व दिशा में हैं। अगर चन्द्रमा वृष, कन्या अथवा मकर राशि में हैं तो यह माना जाता है कि चन्द्रमा दक्षिण दिशा में विराजमान है। मिथुन, तुला या कुम्भ में से किस भी राशि में चन्द्र है तो इसका अर्थ यह हुआ कि चन्द्रमा पश्चिम दिशा में है। कर्क, वृश्चिक और मीन राशि में से किसी में चन्द्र है तो यह माना जाता है कि चन्द्रमा उत्तर दिशा में विराजमान है।

9.सम्मुख शुक्र (Sammukh Shukra):
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यात्रा के लिए सम्मुख शुक्र का त्याग किया जाना चाहिए  अर्थात जिस दिशा में आपको यात्रा करनी है उस दिशा में अगर शुक्र स्थित है तो सम्मुख शुक्र लगता है  । सम्मुख शुक्र यात्रा के लिए अशुभ होता है। सम्मुख शुक्र कैसे होता है अब इसे देखिए जब शुक्र गोचरवश कृतिका से आश्लेषा नक्षत्र में हो तो पूर्व दिशा में, मघा से विशाखा नक्षत्र तक दक्षिण में, अनुराधा से श्रवण तक पश्चिम में तथा घनिष्ठा से भरणी नक्षत्र में होने पर उत्तर दिशा में होता है। उपरोक्त बातों से निष्कर्ष निकलता है कि गोचरवश शुक्र जिस नक्षत्र में पहुंचता है उस नक्षत्र की दिशा में यात्रा करने से सम्मुख शुक्र लगता है।

10.परिघ दण्ड (Parigh Dand):
ज्योतिषशास्त्र कहता है कि यात्रा सफल और अनुकूल फलदायी हो इसके लिए मुहुर्त का विचार करते हुए परिघ दण्ड का भी आंकलन करना चाहिए। परिघ दण्ड का आंकलन किस प्रकार किया जाता है और यह किस प्रकार से यात्रा में शुभाशुभ प्रभाव डालता है आइये इसे समझें, गोचरवश चन्द्रमा घनिष्ठा से आश्लेषा नक्षत्र में भ्रमण करता है तो पूर्व और उत्तर दिशा में यात्रा करना शुभ होता है जबकि दक्षिण व पश्चिम दिशा में अशुभ फल देता है। जब चन्द्रमा मघा से श्रवण नक्षत्र तक गोचरवश जब भ्रमण करता है तब पश्चिम और दक्षिण दिशा में शुभ तथा पूर्व और उत्तर दिशा में अशुभ फल देता है, इसे परिघ दण्ड कहते हैं।

चार भाग में लिखी यह श्रंखला निम्नानुसार है

 

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