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यात्रा मुहुर्त- 4 (Yatra Nishedha)
a.यात्रा निषेध प्रथम
1.यात्रा के मुहुर्त के संदर्भ में बताया गया है कि कुम्भ लग्न और कुम्भ लग्न का नवमांश यात्रा के लिए त्याज्य है, अर्थात इस स्थिति यात्रा नहीं करनी चाहिए
2.जन्म लग्न से आठवां लग्न या जन्म राशि से आठवीं राशि का लग्न त्यागने योग्य होता है
3.ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यात्रा के समय प्रथम, षष्टम, अष्टम और द्वादश भाव में चन्द्रमा हो तो यात्रा स्थगित कर देनी चाहिए।
4.लग्नेश अगर षष्टम, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में है तो यात्रा नहीं करनी चाहिए।
5.सप्तम भाव में शुक्र एवं दशम भाव में शनि हो तो यह स्थिति भी यात्रा के लिए शुभ नहीं मानी जाती है फलत: यात्रा से बचना चाहिए
यात्रा के सम्बन्ध में अगर आप इन पांच निषेधों का पालन करें तो यात्रा में आने वाली समस्याओं से आप बच सकते हैं।
b.यात्रा निषेध द्वितीय
1.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यात्रा के मुहुर्त के संदर्भ में बताया गया है कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष में यात्रा नहीं करनी चाहिए (Falgun Shukla Paksha is not god for travel)।
2.जिस महीने में एक भी संक्रान्ति नहीं हो उसे क्षय मास कहते हैं और जिसमें दो संक्रांति हो उसे अधिक मास कहते हैं। ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार यात्रा की दृष्टि से ये दोनों ही मास अशुभ होते हैं अत: इस मास में यात्रा नहीं करनी चाहिए।
3.आषाढ शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक यात्रा स्थगित रखनी चाहिए
4.यात्रा मुहुर्त के संदर्भ में आषाढ़, श्रावण और भाद्रपद मासों का त्याग करना चाहिए यानी इन मासों मे यात्रा से बचना चाहिए।
5.सूर्य जब मिथुन,कन्या, धनु, मीन राशि में हो तब आपको लम्बी दूरी की यात्रा से यात्रा बचना चाहिए।
6.सूर्य जब वृष, सिंह या वृश्चिक राशि में हो तब आपको जलमार्ग से यात्रा नहीं करनी चाहिए।
यात्रा के संदर्भ में बताये गये निषेधों और पूर्व भागों में बताये गये नियमों का पालन करें तो संभव है कि आपकी यात्रा पूर्णत: सफल रहेगी और यात्रा से आपको अनुकल लाभ मिलेगा।
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