प्रेम की गिनती प्रश्न कुण्डली से! (Prashnakundli on Love)
प्रेम के विषय में कहा गया है कि प्रेम न तो राजा देखता है और ना रंक यह किसी को भी किसी भी उम्र में अपनी आगोश में ले सकता है.
प्रेम में ऐसी शक्ति होती है जो इंसान को फरिश्ता बना देती है राधा कृष्ण, लैला मजनू, हीर रांझा, रोमियो जूलियट का नाम इन्हीं श्रेणियों में आता है.हर व्यक्ति चाहता है कि प्रेम उसे चुन ले और उसकी मुहब्बत यादगार बन जाए लेकिन यह नैमत हर किसी को नसीब नहीं होती है.
ज्योतिर्विदों की मानें तो प्रेम के लिए कुण्डली में अनुकूल ग्रह (Auspicious Planet) स्थिति का होना बहुत ही आवश्यक है.अगर आप अपने जीवन में प्रेम की स्थिति का आंकलन करना चाहते हैं तो प्रश्न कुण्डली की सहायता (Help of prashna kundli for love) ले सकते हैं.प्रश्न कुण्डली किस प्रकार से प्रेम की स्थिति (Status of love through prashna kundli) का ज्ञान देती है इसकी विवेचना प्रस्तुत है. ज्योतिष शास्त्री के अनुसार प्रश्न कुण्डली में स्त्री और पुरूष के लिए पंचम भाव (Fift house) से विचार किया जाता है परंतु, दोनों के प्रेम सम्बन्धी कारक ग्रह अलग अलग होते हैं (There are different kinds of planets regarding love). इन तथ्यों को समझने के लिए आप इस उदाहरण पर गौर कर सकते हैं.आप पुरूष हैं और अपने जीवन में प्रेम की स्थिति को जानना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले पंचम भाव एवं पंचमेश (Lord of fifth house) की स्थिति का आंकलन किया जाता है, फिर लड़के के प्रेम सम्बन्ध के कारक ग्रह चन्द्रमा एवं शु्क्र (Moon and Venus are the significator of love) से विचार किया जाता है. इसी प्रकार आप लड़की हैं तो आपके जीवन में प्रेम की स्थिति का आंकलन करने के लिए पंचम भाव एवं पंचमेश का लग्न व लग्नेश (Ascendant and Lord of ascendant) के साथ सम्बन्ध को देखा जाता है साथ ही लड़की के लिए प्रेम सम्बन्धों के कारक ग्रह चन्द्र एवं बृहस्पति (Jupiter and Moon) से विचार किया जाता है. प्रेम सम्बन्ध में प्रगाढ़ता और सुख की स्थिति तब बनती है जबकि कुण्डली में उपरोक्त भाव एवं ग्रह बलवान अथवा शुभ स्थिति में हों व इनका लग्न/लग्नेश के साथ युति या दृष्टि द्वारा सम्बन्ध स्थापित होता हो.यदि स्थिति इसके विपरीत हो अर्थात उपरोक्त भाव एवं ग्रह कमजोर (Debilitated planets) स्थिति में हों तथा उनका लग्न/लग्नेश से किसी भी प्रकार सम्बन्ध स्थापित ना हो तो प्रेम असफल होता है या आपको प्रेम की प्राप्ति नहीं होती है. आप जानना चाहते हैं कि क्या आपका प्यार सफल हो पाएगा और आप दोनों जीवन भर के लिए एक दूजे के हो जाएंगे अर्थात आपका प्रेम विवाह हो पाएगा तब चन्द्रमा, बृहस्पति एवं शुक्र के साथ ही मंगल ग्रह की शक्ति (Strength of Mars with Moon, Jupiter and Venus) का भी आंकलन किया जाता है. इस तथ्य के अनुसार अगर कुण्डली में ये ग्रह शुभ स्थिति में हों या बलवान हों तो आप अपने प्रेमी के साथ परिणय सूत्र मे बंध पाते हैं और ग्रह स्थिति इसके प्रतिकूल हो तो प्रेम की डोर परिणय सूत्र में परिणत होने से पूर्व ही टूट जाती है. ज्योतिष शास्त्रियों के मतानुसार प्रेम सम्बन्ध में असफलता के लिए सूर्य, शनि एवं राहु इन तीन ग्रहों की स्थिति (Placement of Sun, Saturn and Rahu) पर विशेष रूप से ध्यान देना होता है.प्रश्न कुण्डली में पंचम/पंचमेश तथा चन्द्र, बृहस्पति या शुक्र किसी भी प्रकार युति (Combination of Moon, Jupiter and Venus) या दृष्टि द्वारा सूर्य, शनि एवं राहु से पीड़ित हो तो परिणाम नकारात्मक होता है.प्रेम सम्बन्ध के विषय में शनि ग्रह(Saturn is very dangerous in respect of love) को काफी खतरनाक माना गया है, शनि प्रेम की सफलता में बाधा डालने का कार्य करता है.ज्योतिर्विद कहते हैं कि जब प्रेम के विषय में फलादेश (Prediction of love) किया जाता है तब ग्रहों की स्थिति का आंकलन बहुत ही सावधानी से किया जाता है क्योंकि प्रेम है ही बहु नाजुक विषय, जरा सी चूक भी दिलों को आहत कर सकती है.
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