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क्या बोलती है प्रश्न कुण्डली विवाह के प्रसंग में! Prashna Kundali on Marriage

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सृष्टि चक्र को अनवरत चलाने के उद्देश्य से विवाह संस्कार को जन्म दिया गया. विवाह संस्कार का उद्देश्य यह भी था कि स्त्री और पुरूष के मध्य नैतिक सम्बन्ध स्थापित हो ताकि समाज में स्वस्थ वातावरण का निर्माण हो.

आज भी हर माता पिता अपने युवा पुत्र पुत्री की विवाह को अपनी नैतिक सामाजिक जिम्मेवारी मानते हुए समय पर उनकी शादी करना चाहते हैं. हालांकि आज परिस्थितियां काफी बदल गयी हैं.

लड़के लड़कियां अपने लिए जीवनसाथी की तलाश खुद ही करने लगे हैं जिससे प्रेम विवाह का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. बदलते सामाजिक परिवेश में आज भी ऐसे किस्से काफी सुनने में आते हैं कि अमुक व्यक्ति ने शादी नहीं की, अथवा उनकी शादी में काफी विलम्ब से हुई.

ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक इस प्रकार की सभी घटनाएं कुण्डली में स्थित ग्रहों की स्थित पर निर्भर करती है. इस संदर्भ में प्रश्न कुण्डली क्या बोलती है आइये सुनते हैं.

प्रश्न कुण्डली के विशेषज्ञ बताते हैं कि विवाह के संदर्भ में सप्तम भाव (7th house detemines marriage) से विचार किया जाता है. सिद्धान्त: देखा जाय तो यह एक सामान्य नियम है. मान लीजिए ज्योतिषी महोदय के पास आप विवाह से सम्बन्धित प्रश्न लेकर आते हैं तो वे आपकी कुण्डली मे सप्तम भाव (sevent house) के साथ ही साथ पत्नी के कारक ग्रह शुक्र (Venus is the significator of wife) की स्थिति पर भी विचार करेंगे.

इसी प्रकार जब लड़की की शादी के सम्बन्ध में आंकलन करेंगे तब वे सप्तम भाव के साथ ही साथ पति के कारक ग्रह बृहस्पति (Jupiter is the significator of husband) की स्थिति पर दृष्टि डालेंगे.

ज्योतिष शास्त्री मानते हैं कि जब लग्नेश (Lord of ascendant), सप्तमेश (Lord of seventh house) एवं शुक्र बलवान होकर लग्न या सप्तम भाव से सम्बन्ध स्थापित करते हैं तो पुरूष को उसकी जीवनसंगिनी मिल जाती है अर्थात उनकी शादी हो जाती है.

इसी प्रकार लड़की की कुण्डली में जब लग्नेश, सप्तमेश एवं बृहस्पति (Jupiter in exalted position) बलवान स्थिति में होकर लग्न या सप्तम भाव को प्रभावित करते हैं तब लड़की को उनका जीवनसाथी अर्थात पति प्राप्त होता है.

आज कल प्रेम विवाह (Love Marriage) का प्रचलन बढ़ता जा रहा है और इस विषय में यह जानने की आपकी इच्छा होगी कि किन स्थितियों में प्रेम विवाह हो पाता है. ज्योतिर्विद कहते हैं कि प्रेम विवाह के संदर्भ में सप्तम भाव के साथ ही साथ पंचम भाव का भी आंकलन (Sevent house and fifth house both determine love marriage) किया जाता है.

प्रश्न कुण्डली में पंचम भाव या पंचमेश (Fifth house or lord of fifth house) का किसी भी प्रकार युति या दृष्टि (combinaton and aspect) से लग्न/लग्नेश या सप्तम भाव/सप्तमेश से सम्बन्ध स्थापित होने पर प्रेम विवाह (Love marriage) होने की संभावना रहती है.

कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति को दूसरी शादी करनी पड़ती है. दूसरी शादी (Second marriage) के सम्बन्ध में जब विचार किया जाता है उस समय कुण्डली में सप्तम भाव के साथ ही द्वादश भाव (12th house) की स्थिति पर भी गौर किया जाता है.

विवाह के लिए केवल भाव/भावेश ही नहीं बल्कि अन्य ग्रहों का भी योगदान देखा जाता है. यदि अन्य ग्रह भावेश (Bhavesh) या लग्नेश (Ascedant lord) का मित्र है तो विवाह में सहायक होता है. उपरोक्त भाव स्वामी ग्रहों का शत्रु है तो विवाह में बाधा आती है.

ज्योतिर्विदों के अनुसार निम्न स्थितियों में विवाह में बाधा (Obstacles for marriage) आती है:

1-
सूर्य: (Placement of Sun) यदि पंचम, सप्तम या द्वादश भाव में स्वराशि को छोड़कर अन्य राशियों में सूर्य स्थित हों तो विवाह में बाधा आती है.

2-
मंगल: (Placement ot Mars) प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम एवं द्वादश भाव में मंगल होने से मंगलिक नामक दोष लगता है जिसके कारण से भी विवाह में विलम्ब होता है.

3-
शनि: (Placement of Saturn) शनि चूंकि त्याग का कारक ग्रह होता है इसलिए उपरोक्त भावों से सम्बन्ध बनाने के कारण विवाह के सम्बन्ध में अलगाव की स्थिति उत्पन्न होती है.

4-राहु: (Placement of Rahu) राहु भी शनि की तरह पृथकतावादी ग्रह है परन्तु इसमें राजनीति का मिश्रण होने से विवाह के लिए यह ग्रह अशुभ माना जाता है.

विवाह के सम्बन्ध में निष्कर्षत: यही कह सकते हैं कि लग्न/लग्नेश, सप्तम भाव/सप्तमेश तथा बृहस्पति शुक्र (Jupiter or Venus) के बलवान एवं योगकारक (Yogkarak) होने पर विवाह की प्रबल संभावना बनती है और उपरोक्त भाव एवं ग्रहों के कमजोर स्थिति में होने पर विवाह में परेशानी आती है.

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