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प्रश्न कुण्डली बताती है, आप कितने पराक्रमी हैं! (Prashna kundli on courageous quality)

इस घटना के विपरीत आपने देखा होगा कि शक्तिशाली दिखने वाला व्यक्ति अपने से कमजोर व्यक्ति को पीठ दिखाकर भाग रहा है, यह उस शक्तिशाली दिखने वाले व्यक्ति की कायरता को इंगित करता है। इन घटनाओं से हमारे जेहन में सवाल उठता है कि आखिर यह कैसे होता है, कोई व्यक्ति पराक्रमी, साहसी और परिस्थितयों से मुकाबला करने वाला क्यों होता है और कोई डरपोक, कायर होता है तो क्यों। इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए हम ज्योतिष का सहारा ले सकते हैं।

ज्योतिषशास्त्री बताते हैं कि प्रश्न कुण्डली से अगर आप इस प्रश्न का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं तो, तृतीय भाव(Third house) पर दृष्टि रखनी होगी। भारतीय ज्योतिष परम्परा में मंगल को तृतीय भाव का कारक (Mars is the significator of Courageous quality in the third house) ग्रह कहा गया है।

आप पराक्रमी हैं अथवा नहीं इस संदर्भ में देखेंगे कि आपकी प्रश्न कुण्डली में तृतीय भाव/ तृतीयेश एवं मंगल शुभ और बलवान (Third house/Lord of third house and auspiciousness of Mars determines courageous nature) स्थिति में है अथवा नहीं।

आपकी कुण्डली में तृतीय भाव/ तृतीयेश एवं मंगल शुभ बलवान स्थिति में होने से आप पराक्रमी होते हैं। सिक्के के जैसे दो पहलू होते हैं उसी प्रकार पराक्रम के भी दो पहलू बताये गये हैं सकारात्मक और नकारात्मक। ज्योतिर्विद कहते हैं कि आप अपने पराक्रम को किस दिशा में लगाते हैं यह आपकी कुण्डली में स्थित लग्न/लग्नेश की स्थिति पर निर्भर करता है।

कुण्डली में लग्न/लग्नेश (Ascendant and ascendant Lord) की स्थिति के आधार पर ही आप अपने पराक्रम का इस्तेमाल सकारात्मक दिशा (Positive direction) में करते हैं अथवा नकारात्मक दिशा (Negative direction) में। इस तथ्य को समझने के लिए हम एक उदाहरण पर नज़र डालते हैं,

मान लीजिए आपकी कुण्डली में तृतीय भाव/तृतीयेश तथा लग्न/लग्नेश शुभ स्थिति मे होने के साथ ही बलवान भी हैं तो आप अपना पराक्रम राष्ट्र एवं समाज सेवा में अर्पित करते हैं। इस स्थिति के होने से आप सेना में अथवा पुलिस में रहकर देश की सेवा करते हैं।

पराक्रम का ग़लत दिशा में प्रयोग उन स्थितियों में होता है जबकि आपकी कुण्डली में तृतीय भाव/तृतीयेश के साथ मंगल बलवान हों परंतु लग्न/लग्नेश पाप पीड़ित (Malefic ascendant/Lord of ascendant) अथवा कमजोर स्थिति में हों।

लग्नेश पाप पीड़ित अथवा कमजोर तब होता हैं जबकि लग्नेश नीचस्थ, अस्त, त्रिक भावस्थ या शत्रु राशि (Enemy sign) में हों। लग्न/लग्नेश के इस अवस्था में जाने से आप अपने पराक्रम का दुरूपयोग करने लगते हैं। इस तरह की स्थिति होने से समाज में आप कुख्यात व्यक्ति के रूप मे चर्चित होते हें।

पराक्रम के विषय में चर्चा करने के बाद हम एक नज़र इस पर भी डालते हैं कि क्यों किसी व्यक्ति में साहस की कमी होती है, व्यक्ति क्यों कायरता दिखलाता है। ज्योर्तिविद बताते हैं कि जब आपकी कुण्डली में तृतीय भाव/तृतीयेश तथा मंगल (Third house/Lord of third house and malefic Mars) पाप पीड़ित या कमजोर स्थिति में होते हैं तब आपके स्वभाव में कायरता झलकने लगती है।

इन स्थितियों के साथ अगर आपकी कुण्डली में लग्न/लग्नेश भी कमजोर हों तो आपमें साहस की भी कमी होती है जिसके कारण विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की बजाय आप उससे भागना या किनारे से निकल जाना चाहते हैं।

निष्कर्ष स्वरूप कह सकते हैं कि प्रश्न कुण्डली के माध्यम से आप व्यक्ति के स्वभाव एवं व्यक्तित्व (Individual nature and personality through prashna kundli) की विशेषताओं को जान सकते हैं।

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