जानिए प्रश्न कुण्डली के रहस्य (Know the secrets of Prashna Kundali)
भविष्य के कोख में छिपे प्रश्नों के जवाब को जानने की जिज्ञासा हर काल में मनुष्य के मन में रही है। जिस तरह सोनोग्राफी मॉ की कोख में पल रहे बच्चे के विषय में जानकारी प्रदान करती है ठीक उसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र है जो भविष्य में होने वाली घटनाओं की जानकारी प्रदान करता है।
ज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) को भविष्य जानने के संदर्भ में पुरातन काल से ही प्रमाणिक माना गया है। ज्योतिष गणित और सिद्धान्त पर आधारित विज्ञान है। ज्योतिष की कई शाखाएं हैं, इन्हीं में एक है "प्रश्न कुण्डली" (Horary system or Prashna system)।
प्रश्न कुण्डली उनके लिए भी वरदान की तरह है जिन्हें अपना जन्म समय और जन्म तिथि ज्ञात नहीं होता है क्योंकि, इसमें तात्कालिक समय (immediate time) के आधार पर कुण्डली का निर्माण किया जाता है। जन्म कुण्डली से भविष्य जानने के लिए व्यक्ति को जन्म समय, जन्म तिथि एवं जन्म स्थान की जानकारी होना आवश्यक है, इस मायने में प्रश्न कुण्डली जन्म कुण्डली से अधिक सरल है। प्रश्न कुण्डली की महत्ता (importance of prashna kundali) और सत्यता की बात करें तो इसे भी ज्योतिष जगत में जन्म कुण्डली के समान आदर और महत्व दिया गया है।
इन दिनों प्रश्न कुण्डली से फलादेश ज्ञात करने के लिए दो पद्धतियां प्रचलन में हैं, प्रथम पुरातन वैदिक ज्योतिष पद्धति तथा दूसरी है नवीन कृष्णमूर्ति पद्धति (krishnamurthy prashna system)। कृष्णमूर्ति पद्धति में 1 से 249 अंकों (krishnamurthy number system) के आधार पर लग्न का निर्माण किया जाता है तथा प्रश्न पूछते वक्त जो समय था उसके अनुसार ग्रहों को स्थापित किया जाता है। इन दोनों पद्धतियों में मुख्य अंतर यह है कि जहां वैदिक ज्योतिष में लग्न उन्हीं स्थानों पर होते हैं जो प्रश्न पूछते वक्त आकाश में मौजूद होते हैं।
कृष्णमूर्ति पद्धति (krishnamurthy paddhati) में लग्न 1 से 249 अंकों पर निर्भर करता है। इस पद्धति में प्रश्नकर्ता से अंक पूछे जाते हैं और फिर उस अंक के आधार पर लग्न को स्थापित किया जाता है। कृष्णमूर्ति पद्धति में यह आवश्यक नहीं है कि जो लग्न बना है वह आकाशा में विद्यमान हो।
जन्म कुण्डली की अपेक्षा प्रश्न कुण्डली के माध्यम से फल कथन अधिक सरल है क्योंकि, जन्म कुण्डली में ग्रहों का बल, वर्गांश (house strength of planets) में स्थिति तथा विंशोत्तरी दशा इत्यादि का विचार किया जाता है जिसमें काफी समय लगता है। प्रश्न कुण्डली में इन सबकी जगह सारा महत्व केवल ग्रहों को दिया जाता है जिससे फलादेश बहुत ही जल्दी निकल आता है।
प्रश्न कुण्डली की एक और मुख्य विशेषता है कि इसका निर्माण एकदम सही होता है क्योंकि, प्रश्न के समय का समुचित ज्ञान ज्योतिर्विद को होता है जबकि, जन्म कुण्डली का निर्माण एकदम सही समय के आधार पर हुआ है यह कह पाना कदाचित् संभव नहीं है। प्रमाणिक समय नहीं होने से कुण्डली का फलादेशा भी प्रभावित होता है अर्थात् फलादेश ग़लत हो सकता है, प्रश्न कुण्डली में इस तरह की चूक की संभावना नहीं रहती है।
कई सम्प्रदायों में जन्म कुण्डली का निर्माण नहीं कराया जाता है। इन लोगों में भी भविष्य जानने की उत्सुकता और उत्कंठा रहती है, ऐसे लोग भी प्रश्न कुण्डली के माध्यम से अपनी जिज्ञासा को शांत कर सकते हैं और भविष्य से जुड़े प्रश्नों का हल जान सकते हैं।
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