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प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा की महत्ता (Relevance of moon In Prashna Kundli)

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रात के वक्त आकाश में चमकने वाले चांद को खगोलशास्त्र (Astronomy) एवं ज्योतिष शास्त्र में काफी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. चन्द्रमा न केवल पृथ्वी का एक उपग्रह है बल्कि हम इंसानों के मन को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारक है.

आदि काल से हर सभ्यता ने चन्द्रमा को अपने ज्योतिष विज्ञान के अन्तर्गत उच्च स्थान दिया (Moon occupies high position in astrology) है. चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं(Sixteen Kalas) से परिपूर्ण होकर हम धरतीवासियों के मन को दिशा निर्देशित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.

भारत की प्राचीन ज्योतिष पद्धति वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा को मन का कारक माना जाता (Moon significator of mind) है. चन्द्रमा स्वभाव से चंचल (Moon is fickle by nature) है तथा सभी ग्रहों में चन्द्रमा सबसे अधिक तेज गति से भ्रमण करने वाला है. चन्द्रमा एक दिन में एक नक्षत्र तथा सवा दो दिन में एक राशि की परिक्रमा पूरा कर लेता है. अपनी गति से चन्द्रमा 27 दिनों के पश्चात पुन: फिर से उसी नक्षत्र एवं राशि में विचरण करने लगता है.

वैदिक ज्योतिष में लग्न कुण्डली (Lagna kundali) के साथ-साथ चन्द्र कुण्डली (Chandra Kundali) बनाने का भी विधान है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार बच्चा जब जन्म लेता है उस समय चन्द्रमा जिस राशि में होता है वही बच्चे की राशि मानी जाती है. चन्द्रमा जन्म के समय जिस नक्षत्र (Placement of Moon in Nakshatra at the time of birth) में होता है, उस नक्षत्र के स्वामी (Lord of Nakshatra) से ही विंशोत्तरी दशा (Vinshotori Dasha) प्रारम्भ होती है. शानि की ढ़ैया या साढ़े साती (Sadesati of Saturn) के लिए भी चन्द्र राशि (Chandra rashi) ही उत्तरदायी मानी जाती है. चन्द्रमा से भी कुण्डली में कई योगों का निर्माण होता है. इन अध्ययनों से ज्ञात होता है कि ज्योतिष में चन्द्रमा की महत्ता कितनी है.

वैदिक ज्योतिष के समान ही प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा को महत्व (Relevance of Moon in prashna kundli) दिया जाता है. प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा कार्य की सफलता पूर्वक समाप्ति या इच्छित वस्तु के लाभ की प्राप्ति का द्योतक है. चूंकि चन्द्रमा शीघ्रगामी होता है अत: कार्य भाव या कार्येश पर शुभ चन्द्रमा की दृष्टि शीघ्र एवं निश्चित फल (Sure result by Moon) देने वाली होती है. यहां पर चन्द्रमा एक निश्चित कारक के रूप में कार्य करता है जिससे ज्ञात होता है कि व्यक्ति की इच्छा पूरी (Fulfillment of human desire) हो पाएगी अथवा नहीं.

प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा की कार्य भाव (Karya bhava) या कार्येश (Karyesh) पर दृष्टि कार्य को सफल बनाने या इच्छा की पूर्ति में सहायक होता है.

प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा की महत्ता को आप एक उदाहरण से भी समझ सकते हैं, मान लीजिए आप यह जानना चाहते हैं कि, आप जो व्यवसाय करने जा रहे हैं उसमें सफलता मिलेगी अथवा नहीं. आपके प्रश्न करने के पश्चात प्रश्न कुण्डली से आपका लग्न तैयार किया जाएगा फिर ज्ञात किया जाएगा कि लग्न/लग्नेश (Ascendant/Ascendant Lord), लाभ/लाभेश (Lava/lavesh) की कुण्डली में कैसी स्थिति है.

उपरोक्त भाव एवं ग्रह शुभ स्थिति में हैं तथा चन्द्रमा पंचम भाव में स्थित होकर लाभ स्थान पर दृष्टि डाल रहा है या कुण्डली में कहीं भी बैठकर लाभेश को अपनी सप्तम दृष्टि से देख रहा है तो आपको व्यवसाय में सफलता मिलने की संभावना प्रबल रहेगी. इस दृष्टिकोण से देखें तो प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा की दृष्टि अति महत्वपूर्ण है.

प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा की महत्ता के संदर्भ में देखें तो लग्न/लग्नेश (Ascendant/Ascendant Lord), कार्य भावKarya bhava)/कार्येश (Karyesh)कुण्डली में शुभ स्थिति में भी हों तो चन्द्रमा के कमजोर होने से कार्य में सफलता मिलने में बाधा आती है.

इस दृष्टि से गौर करें तो प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा का मजबूत होना आवश्यक माना गया है. चन्द्रमा की महत्ता इससे भी साबित होती है कि चन्द्रमा किसी अन्य ग्रह के साथ शुभ योग का निर्माण भी करे तो यह बहुत ही उत्तम स्थिति होती है और आपको इससे लाभ मिलता है.

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