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प्रश्न कुण्डली से कार्य का विचार (Using prashna Kundli to assess a task's success)
हम मनुष्य जीवन में कई ऐसे आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को लेकर आगे बढ़ते हैं, हमारी आकांक्षाएं पूरी होंगी अथवा नहीं इस संदर्भ में मन आशंकित रहता है.अपनी आशंकाओं के समाधान हेतु हम ज्योतिर्विदों की शरण लेते हैं, ज्योतिषशास्त्री हमारी कुण्डली के आधार पर समस्या के विषय में फलादेश (Prediction) बताते हैं.
हमारी समस्या अथवा मन में उठे प्रश्न का उत्तर ज्योतिषाचार्य कुण्डली के आधार पर ज्ञात करते हैं, इस क्रम में जन्म कुण्डली अथवा प्रश्न कुण्डली को आधार बनाया जाता है.गणित एवं सिद्धान्त (Prashna kundli on the basis of Mathematics and principles) की दृष्टि से जन्म कुण्डली एवं प्रश्न कुण्डली दोनों में एकरूपता है,फिर भी दोनों में कुछ अंतर पाया जाता है.प्रश्न कुण्डली में केवल ग्रहों के गोचरवश (Transit) भ्रमण को देखा जाता है.जन्म कुण्डली की तरह इसमें विंशोत्तरी दशा (Vinshotari Dasha), ढ़ैय्या-साढ़े साती (Sadesati of Saturn) तथा ग्रहों के बल आदि का विचार नहीं किया जाता है.
जब आप किसी कार्य की सफलता के विषय में विचार करते हैं तो सफलता हेतु चन्द्रमा की कार्य भाव पर दृष्टि को देखा जाता है.कार्य में आप कितने सफल होंगे इसमें कार्येश (दशमेश) के साथ ही दशम भाव पर चन्द्रमा की दृष्टि महत्वपूर्ण प्रभाव रखती (Aspect of Moon in the tenth house) है.लग्न (Ascendant) एवं लग्नेश (Ascendant Lord) को इस संदर्भ में आवश्यक अंग माना गया है.यदि हम सूक्ष्मता के साथ प्रश्न कुण्डली की विवेचना करें तो पाएंगे कि किसी भी प्रश्न का विश्लेषण करने के लिए हमें पाँच तथ्यों की आवश्यकता होती है:
1- लग्न (Ascendant)
2- लग्नेश (Ascendant Lord) 3- कार्य भाव (Karya Bhava)(4- कार्येश (Karyesh)
5- चन्द्रमा (Moon)
प्रश्न कुण्डली प्रश्नकर्ता द्वारा किये जाने वाले प्रश्न के समय के आधार पर बनती है और इसके निमार्ण में उस समय के लग्न को ही महत्व (Importance on lagna) दिया जाता है जिस समय प्रश्न किया जाता है मूल रूप से यह सिद्धान्त वैदिक प्रश्न कुण्डली (Vedic prashna kundali) का आधार है]
जबकि प्रश्न कुण्डली का एक और स्वरूप है कृष्णमूर्ति पद्धति जिसमें लग्न साधन (Lagna sadhan) की विधि पृथक है.कृष्णमूर्ति पद्धति से लग्न साधन हेतु 1 से 249 तक अंकों को आधार बनाया गया है.जब प्रश्नकर्ता ज्योतिषी के पास प्रश्न लेकर आता है तब प्रश्नकर्ता (Prashnakarta) द्वारा बताये गये एक अंक के आधार पर प्रश्न कुण्डली में लग्न का निर्माण किया जाता है, बाकि ग्रहों की स्थिति उसी प्रकार से रहती है जैसे वैदिक ज्योतिष में रहती है यानी ग्रहों का फलादेश(Phaladesh) दोनों में ही समान होता है.
प्रश्न के संदर्भ में बात करें तो प्रश्न कुण्डली में दशम भाव से किन किन विषयों की जानकारी मिल सकती है यानी आपके कौन से कार्य दशम भाव (Tenth House) से सिद्ध हो सकते हैं आइये इस पर दृष्टि डालते हैं.ज्योतिष के नियम के अनुसार दशम भाव से सरकारी पक्ष, नौकरी, मान-सम्मान, पिता एवं किसी भी कार्य के लिए विचार किया जाता है.
जब आप किसी ज्योतिषी के पास यह प्रश्न् लेकर जाते हैं कि क्या मुझे सरकारी नौकरी मिल सकती है तो ज्योतिषी आपकी प्रश्न कुण्डली (Prashna Kundli) में दशम भाव एवं दशमेष (Tenth House/Lord of tenth house) का आकलन करते हैं.प्रश्न के संदर्भ में यदि लग्न/लग्नेश, दशम भाव/दशमेश एवं चन्द्रमा शुभ स्थिति में होकर स्थित हों तो आपको सरकारी नौकरी मिलती है और जब चन्द्रमा की दृष्टि दशम भाव पर पड़ रही होती है तो आपकी मुराद जल्दी पूरी होती है.यदि लग्न/लग्नेश, दशम भाव/ दशमेश कमजोर स्थिति में या पाप पीड़ित हों तो व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं मिलती है।
कार्य में सफलता को लेकर कुछ ज्योतिषाचार्य चर लग्न को भी महत्व देते हैं.इन ज्योतिषविदों की दृष्टि में यदि प्रश्न कुण्डली का लग्न चर (Lagna chara) (मेष, कर्क, तुला, मकर) हो तथा लग्नेश भी चर राशि में स्थित हो तो व्यक्ति को कार्य में पूर्ण सफलता मिलती है.अगर व्यक्ति की कुण्डली में स्थिर लग्न मौजूद हों तो कार्य में सफलता मिलने की संभावना बहुत कम या नहीं रहती है.इस तरह की स्थिति होने पर सफलता प्राप्त करने हेतु व्यक्ति को काफी कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है.
कार्य सिद्धि हेतु प्रश्न कुण्डली के कार्य भाव और चन्द्रमा की स्थिति पर नज़र रखें और जानें अपने प्रश्नों का उत्तर आसानी से.
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Comments (3 posted):
mai apne bare me jana chahta huen akhir kya karu jise mai apne jivan ko sukhad bana saku aap mer madad kareye meri date of birth hair 2 sep 1979
delhi 11.55 am ki meri pareshani paise aur sarir se hai
mera ghar banane ka sapna kab tak pura hoga? please give me ur valuable opinion and suggestions
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