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आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया क्यों, जानिए प्रश्न कुण्डली से (Why extravagance through prashna kundali)

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image आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया क्यों, जानिए प्रश्न कुण्डली से (Why extravagance through prashna kundali)

आती हुई लक्ष्मी सभी को अच्छी लगती हैं लेकिन जब लक्ष्मी जाती है तो मन को अच्छा नहीं लगता, तात्पर्य है यह है कि जब हमारे पास धन आता है तो मन में प्रसन्नता होती है लेकिन, जब धन खर्च करना पड़ता है तब तकलीफ सी महसूस होती है।

लक्ष्मी के संदर्भ में सच्चाई यह भी है कि यह चलायमन हैं अर्थात यह एक जगह टिक कर नहीं रहती। हम अपनी भौतिक एवं अन्य आवश्यकता की पूर्ति के लिए धन खर्च करते हैं लेकिन कभी कभी ऐसा महसूस होने लगता है कि हमारा धन आवश्यकता से अधिक खर्च हो रहा है।

आवश्यकता से अधिक धन खर्च होना ज्योतिर्विदों की दृष्टि में ग्रहों का अशुभ प्रभाव (Aspects of malefic planets) है। किन स्थितियों में आपका धन व्यर्थ खर्च होता है, ज्योतिष की दृष्टि से आइये इस पर विचार करें।

प्रश्न कुण्डली से जब खर्च का विश्लेषण करते हैं तो सबसे पहले व्यक्ति के स्वभाव का विचार करते हैं। लग्न/लग्नेश (Ascendant/Lord of ascendant), द्वितीय भाव/द्वितीयेश (Second housse/Lord of second house) या एकादश भाव/एकादशेश (11th house/Lord of 11th house) से किसी भी प्रकार द्वादश भाव/द्वादशेश (12th house/Lord of 12th house) का सम्बन्ध जुड़ने से आपके जीवन में खर्च की अधिकता रहती है।

खर्च के विषय में कहा जाता है कि द्वादश भाव में शुभ ग्रहों की उपस्थिति से शुभ कार्यों में धन खर्च होता है और अगर इस भाव में अशुभ ग्रह मौजूद हों तो अनावश्यक कार्यों में आपका धन व्यय होता है। द्वादश भाव में नीचस्थ ग्रह हो तथा एकादशेश या द्वितीयेश कमजोर होने से तथा लग्न की स्थिति अशुभ होने से आपका खर्च अनियंत्रित होता है

अर्थात आप ख्रर्च पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं। खर्च के सम्बन्ध में शनि की स्थिति (Saturn detemines expenditures) से भी विचार किया जाता है अगर आपकी कुण्डली में शनि स्वस्थ, मार्गी, बलवान होकर स्थित हो तो आप दानशील प्रवृति के होते हैं और धार्मिक कृत्यों में अपना धन दान स्वरूप भेट करते हैं। अगर कुण्डली में शनि पाप स्थिति में हो तो आप मितव्ययी और कंजूस प्रवृत्ति के व्यक्ति होते हैं।

ज्योतिष परम्परा के अनुसार द्वादश भाव धन व्यय कराता (12th house is the symbol of expenses) है। अगर आपकी कुण्डली में द्वादशेश/द्वादश भाव में हो तो आप आवश्यक कार्यों जैसे कि विदेश यात्रा में धन खर्च करते हैं। द्वादशेश के समान ही आपकी कुण्डली के द्वादश भाव में लग्नेश की उपस्थिति ( Presence of Lord of ascendant in 12th house determines journey to foreign country) होने से आप विदेश यात्रा के संदर्भ में धन खर्च करते हैं।

खर्च के संदर्भ में कुण्डली की स्थिति का अध्ययन करने से निष्कर्ष निकलता है कि प्रश्न कुण्डली में ग्रहों के कारण खर्च की स्थिति बन रही है तो आप चाहे कितना भी प्रयास करें आपको धन खर्च करना पड़ता है। ज्ञानी जन कहते हैं कि जब ग्रह आपको खर्च करने हेतु प्रेरित कर रहे हों तब आप शुभ कार्यों में अपना धन लगाएं अन्यथा जो खर्च होना है वह निरर्थक अन्यत्र दिशा में खर्च होकर रहेगा।

यदि धन खर्च करने का कोई प्रयोजन जब नहीं दिखाई दे तो धमार्थ कार्यों में धन दान करना चाहिए। दान के संदर्भ में मात्रा का नहीं बल्कि खर्च की भावना का विचार किया जाना चाहिए

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Comments (2 posted):

kuljit singh on 27 February, 2009 12:55:35
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what's happen in 2009 as per my kundli
harish chandra bisht on 02 December, 2009 09:12:46
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sir mere sadi kab hogi. main kitne baccho ka papa banuga.

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