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विवाह संस्कार (Vivah Sanskar part II)
ग्रहों का भावों में निषेध(inauspicious house for planets): विवाह मुहुर्त लग्न में, लग्नेश षष्टम, अष्टम भाव में, सूर्य प्रथम, सप्तम भाव में, चन्द्रमा प्रथम, षष्ठी, सप्तम और अष्टम भाव में, मंगल प्रथम, सप्तम, अष्टम, दशम भाव में, बुध सप्तम, अष्टम भाव में, बृहस्पति सप्तम, अष्टम भाव में शुक्र तृतीय, षष्टम, सप्तम, अष्टम भाव में, शनि प्रथम, सप्तम, द्वादश भाव में, राहु-केतु प्रथम, सप्तम भाव में नहीं होने चाहिए। अगर ऐसा है तो इसे मुहुर्त के अनुसार दोषपूर्ण माना जाएगा। ....विवाह संस्कार (Vivaha Sanskar Part I)
सोलह संस्कार में विवाह संस्कार का प्रमुख स्थान है(Vivah Sanskar is very important part in Sixteen Sanskar)। इस संस्कार के पश्चात व्यक्ति गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है। विवाह के पश्चात व्यक्ति को पारिवारिक व सामाजिक जीवन का निर्वाह करना होता है। ...
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