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विवाह संस्कार (Vivah Sanskar part II)
ग्रहों का भावों में निषेध(inauspicious house for planets): विवाह मुहुर्त लग्न में, लग्नेश षष्टम, अष्टम भाव में, सूर्य प्रथम, सप्तम भाव में, चन्द्रमा प्रथम, षष्ठी, सप्तम और अष्टम भाव में, मंगल प्रथम, सप्तम, अष्टम, दशम भाव में, बुध सप्तम, अष्टम भाव में, बृहस्पति सप्तम, अष्टम भाव में शुक्र तृतीय, षष्टम, सप्तम, अष्टम भाव में, शनि प्रथम, सप्तम, द्वादश भाव में, राहु-केतु प्रथम, सप्तम भाव में नहीं होने चाहिए। अगर ऐसा है तो इसे मुहुर्त के अनुसार दोषपूर्ण माना जाएगा। ....सोलह संस्कार (Sixteen Sanskar)
हिन्दु धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल सोलह संस्कार बताए गये हैं(According to the Hindu dharma there are 16 Sanskars till Death)। इन संस्कारों का इतिहास अति प्राचीन है, इन संस्कारों का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व है(Sanskars is very essential in our Life)। प्रत्येक संस्कार हमारे जीवन में बहुत महत्व रखते है। प्रत्येक संस्कार के मुहुर्त में कौन-कौन से नक्षत्र, तिथि आदि का उपयोग होता है अर्थात किस नक्षत्र, तिथि में कौन सा संस्कार किया जाना चाहिए यहां इसका उल्लेख किया जा रहा है। सबसे पहला संस्कार है गर्भधारण संस्कार.......(First sanskar is garbhdharan)।...दाह संस्कार (Daha Sanskar)
सोलह संस्कार वास्तव में एक चक्र है जो समय के साथ चलता रहता है(In reality 16 Sanskar is like a chakra which working according to the Time)। यह गर्भधारण से शुरू होता है और विभिन्न चरणों से गुजरते हुए शरीर के अंत के साथ समाप्त हो जाता है। हमारे शास्त्र, पुराण बताते हैं कि आत्मा अमर है यह निरन्तर एक शरीर से दूसरे शरीर में भ्रमण करता है जबतक कि आत्मा अपने परम अंश अर्थात परमात्मा को प्राप्त न कर ले। आत्मा की सदगति के लिए व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात हिन्दू धर्म में दाह संस्कार किया जाता है। ...
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