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द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर योग का प्रभाव (Effects of Dwipushkar and Tripushkar Yoga)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर आप अपना काम शुभ मुहुर्त में करते हैं तो आपको कार्य का परिणाम कई गुणा बेहतर मिलता है। मुहुर्त के विषय में ज्योतिषशास्त्र यह भी कहता है कि कुछ योग ऐसे भी होते हैं जिनमें किये गये काम को पुन: दुहराना पड़ता है। यहां हम इसी प्रकार के कुछ योगों की बात कर रहे हैं। यह योग कैसे बनता है, इस योग का प्रभाव क्या होता है और इन योगों का व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव होता है आइये हम मिलकर देखते हैं। ...शुभ योग है अमृतसिद्धि और सर्वर्थसिद्ध योग (Amritsidhi and Sarvarth siddhi yoga are auspicious)
जब कोई मांगलिक कार्य करना होता है तब हम देखते हैं कि समय कार्य हेतु शुभ है अथवा नहीं। शुभ समय में शुभ कार्य करने की बात ज्योतिषशास्त्र इसलिए कहता है क्योंकि जब हम अच्छे समय में काम की शुरूआत करते हैं तब उसका परिणाम भी अनुकूल होता है। ज्योतिशास्त्र में अच्छा समय शुभ योग कहलता है। शुभ योग में अमृतसिद्धि योग और सर्वार्थसिद्धि योग सभी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। सर्वाथ सिद्ध योग नाम से ही ज्ञात होता है कि यह योग सभी प्रकार की मनोकामना को पूरा करने वाला योग है। इस योग के विषय में ज्योतिषशास्त्र कहता है कि इस योग के दौरान अगर आप कोई शुभ कार्य शुरू करें तो आपको सम्बन्धित काम में अवश्य सफलता मिलती है। यह योग किस प्रकार निर्मित होता है आइये इसे जानें: ...
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