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फलित ज्योतिष में लग्नेश का महत्व (Relevance of Ascendant Lord On Phalit Jyotish)
यू तो फलादेश करते समय सभी नौ ग्रह महत्वपुर्ण होते हैं परन्तु लग्नेश (Lord of Ascendant) का विशेष महत्व है. प्रमुख ज्योतिष ग्रन्थो में कहा गया है कि केवल लग्नेश (Lagnesh) के बलवान होने पर कुण्डली में मौज़ूद कई दोषो का नाश हो जाता है.
नवग्रहो को हम तीन श्रेणियो में बांट सकते हैं,
- 1) मित्र ग्रह (Mitra Grah)
- 2) शत्रु ग्रह (Shatru Grah) और
- 3) तटस्थ ग्रह् (Neutral Grah).
फलादेश करते समय कुण्डली में मित्र ग्रहो के बलवान होने पर व्यक्ति सुखमय, शत्रु ग्रहो के बलवान होने पर संघर्षमय तथा तटस्थ ग्रहो के प्रभावकारी होने पर मिला-जुला जीवन व्यतीत करता है.
प्रत्येक लग्न के लिए कोइ न कोइ ग्रह भाग्यकारक (Bhagya Karak) होता है. इस ग्रह के बलवान होने पर मनुष्य भाग्य का शुभ फल प्राप्त करता है. परन्तु यदि किसी भी कारण से भाग्येश (Lord Of Furtune) ग्रहकमजोर हो जाता है तथा लग्नेश बलवान रहता है तो व्यक्ति अपने पुरुषार्थ द्वारा जीवन में सुखो को प्राप्त करता है. और यदि शत्रु ग्रह अपनी दृष्टि या उपस्थिति द्वारा व्यक्ति को पीडित करते है तो भी बलवान लग्नेशवाला व्यक्ति संघर्ष के पश्चात विजय प्राप्त करता है.
तटस्थ ग्रह अपने स्वभाव के अनुरुप मिला-जुला फल प्रदान करते हैं. लग्नेश किस प्रकार बलवान होता है इसके लिए हमें कुण्डली में राशी, भाव, वर्गसारणी (Rashi, Bhav, Vargasarani) में लग्नेश की स्थिति,लग्नेश का षडबल (Shadhabala) एवं वर्षसारणी(Varshasarani) व गोचर(Transit) का विवेचन करना पडता है




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Comments (6 posted):
this not only gives status also counter part in success happy married life ,intelegence face impression etc.
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