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ज्योतिष योग एवं योगफल (Astrology Yoga and Yogphal)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव का निर्माण जन्म तिथि, वार, करण, राशि व योगों द्वारा होता है. हम यहां योग से व्यक्ति के स्वभाव पर पड़ने वाले प्रभाव की बात कर रहे हैं तो आइये देखें कि किस योग में जन्म लेने से व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है
व्यक्ति के स्वभाव की जब हम बात करते हैं तब हम सिर्फ उसके बाहरी व्यक्तित्व को देखते हैं. वास्तव में व्यक्तित्व और स्वभाव के निर्माण में कई तत्वों का योगदान रहता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव का निर्माण जन्म तिथि, वार, करण, राशि व योगों द्वारा होता है. अगर आप किसी के स्वभाव को अच्छा कहते हैं तो वास्तव में यह जानना चाहिए कि उस व्यक्ति का जन्म उस समय में हुआ था जिस समय उपरोक्त चीजों का सुन्दर समन्वय था. हम यहां योग से व्यक्ति के स्वभाव पर पड़ने वाले प्रभाव की बात कर रहे हैं तो आइये देखें कि किस योग में जन्म लेने से व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है.
1.विष्कुम्भ योग(Vishkumbh Yoga):
ज्योतिषशास्त्र में विष्कुम्भ योग को अशुभ योग माना गया है, परंतु इस योग में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह बहुत ही भाग्यशाली और उत्तम गुणों वाला होता है. इस योग के जातक को आर्थिक तंगी का भी सामना नहीं करना पड़ता है यानी ये आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं. इन्हें इस योग के प्रभाव से हर प्रकार का सांसारिक सुख प्राप्त होता है. अपने व्यक्तित्व से ये लोगों को प्रभावित करते हैं जिससे इनकी मित्रता का दायरा काफी बड़ा होता है. ये काफी अक्लमंद और बुद्धिमान होते हैं. ये रूप और गुण से भरे होते हैं.
2.प्रीति योग(Preeti Yoga):
प्रीति योग भी काफी शुभ माना गया है. इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति विषयों को जानने वाला, जिन्दादिल और किसी भी काम को उत्साह पूर्वक करने वाला होता है. प्रीती योग के जातक सौन्दर्य से प्रेम करने वाले होते हैं, व अपने विपरीत लिंग वाले व्यक्ति से प्रीति रखने वाले होते हैं. ये चालाक होते हैं और अपने स्वार्थ को किसी भी तरह सिद्ध करना जानते हैं.
आयुष्मान योग(Ayushman Yoga):
जिस व्यक्ति का जन्म आयुष्मान योग में होता है वह व्यक्ति आयुष्मान होता है अर्थात लम्बे समय तक धरती का सुख प्राप्त करता है. इस योग के जातक काव्य से यानी कविताओं और गीतों के शौकीन होते हैं. इस योग के जातक धनवान अर्थात धन धान्य से भरे होते हैं. ये शक्तिशाली होते हैं और संघर्ष की स्थिति में अपने विपक्षी को पराजित करने में सक्षम होते हैं.
4.सौभाग्य योग(Saubhagya yoga):
इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर इस योग के नाम का पूरा असर रहता है. इस योग का जातक सौभाग्यशाली होता है. इनमे हर प्रकार के गुण भरे होते हैं. ये जहां भी होते हैं अपने गुणों के लिए प्रशांसित होते हैं. इस योग के जातक विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के प्रति विशेष लगाव रखते हैं, सुन्दर स्त्री और पुरूष इनके मन को आकर्षित करते हैं.
5.शोभन योग(Shobhan Yoga):
इस योग का जातक सुन्दर और आकर्षक होता है. इनके सामने जो भी काम आता है वे उसे तत्परता के साथ पूरा करते हैं. इनकी पत्नी सुन्दर और अच्छे गुणोंवाली होती है. संतान पक्ष से भी ये बहुत भाग्यशाली होते हैं. इनकी संतान आज्ञाकारी होती है और इन्हें संतान से सुख प्राप्त होता है. इन्हें युद्ध करना पसंद होता है. .
6.अतिगण्ड योग(Atigand Yoga):
ज्योतिषशास्त्र में अतिगण्ड योग अशुभ योगों में गिना जाता है. इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति के स्वभाव और व्यक्तित्व के विषय में कहा जाता है कि इनका व्यवहार ऐसा होता है जिससे इनके कुल परिवार की मर्यादा को चोट पहुंचती है. इस योग में जिनका जन्म होता है उनकी माता को कष्ट और परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अतिगण्ड में जब गण्डान्त योग (Gandant Yoga) बनता है उस समय जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति हत्या करने वाला भी हो सकता है.
7.सुकर्मा योग(Sukarma Yoga):
इस योग में जिन व्यक्ति का जन्म होता है वे अच्छे कर्मों वाले होते हैं अर्थात ये धर्म कर्म में विश्वास रखने वाले होते हैं. इस योग के जातक का स्वभाव सरल और शालीन होता है. ये सभी के प्रति स्नेह और प्रेम रखते हैं. ये गुणवान और लोगों के मध्य आदर के पात्र होते हैं. ये हर प्रकार के ऐश्वर्य का भोग करने वाले होते हैं.
8.धृति योग(Dhriti Yoga):
धृति योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति में काफी धैर्य होता है वे किसी बात पर तुरंत उत्तेजित नहीं होते बल्कि सोच समझ कर कोई फैसला लेते हैं. इनकी सेहत अच्छी होती है ये समान्यत: स्वस्थ रहते हैं. ये विद्वान और गुणवान होते हैं. ये सम्पन्न और सुखमय जीवन जीते हैं और समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करते है.
9.शूल योग(Shool Yoga):
ज्योतिषशास्त्र कहता है कि जो व्यक्ति शूल योग में जन्म लेते हैं वे धार्मिक प्रवृति के होते हैं, ये शास्त्रों में रूचि रखते हैं और काफी ज्ञानी होते हैं. ये यज्ञादि कर्मों को करना जानते हैं और धन संग्रह करना भी इन्हें आता है. इनता सब कुछ होने के बावजूद भी इनके जीवन में कष्ट और दु:ख लगा रहता है.
10.गण्ड योग(Gand Yoga):
जो व्यक्ति गण्ड योग में जन्म लेते हैं, उन्हें कई प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है. इन्हें स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है. इस योग के जातक का कद छोटा होता है और सर बड़ा होता है. ये शक्तिशाली होते हैं और भोग विलास में रत रहने वाले होते हैं. ये कुछ जिद्दी स्वभाव के होते हैं और अपनी बातों पर जमे रहते हैं.
11.वृद्धि योग(Vridhhi Yoga):
वृद्धि योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति रूप और स्वभाव दोनों से सुन्दर होता है. इस योग का जातक धनवान होता है और गुणों से भरा होता है. इनकी पत्नी और पुत्र दोनों ही अच्छे स्वभाव और गुणों वाले होते हैं. ये पराक्रमी एवं शक्ति से सम्पन्न होते हैं और सांसारिक सुखों का उपभोग करते हैं.
12.ध्रुव योग(Dhruva Yoga):
ध्रुव योग में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह स्थिर बुद्धि का स्वामी होता है और जो भी काम करता है उसे मन लगाकर करता है. इस योग में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह बहुत ही बलवान एवं धनवान होता है. यह हर वर्ग से प्यार पाते हैं और दीर्घायु होते हैं.
13.व्याघात योग(Vyaghat Yoga):
इस योग में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह मनुष्य हर प्रकार के कार्य करने में निपुण होता है. ये काफी गुणवान होते हैं और समाज से इन्हें मान सम्मान मिलता है. ये अपने गुणों एवं कार्यों से दुनियां में विख्यात होते हैं.
14.हर्षण योग(Harshan Yoga):
हर्षण योग बहुत ही शुभ माना गया है. इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी भाग्यशाली कहा जाता है. जो व्यक्ति इस योग में जन्म लेते हैं वे अनेक विद्याओं के ज्ञाता होते हैं. इस योग के जातक शास्त्रों में पारंगत होते हैं. ये अपने फैसले पर अडिग रहने वाले होते हैं. ये धनवान होते हैं तथा समाज के विशिष्ट लोगों से मान सम्मान प्राप्त करते हैं.
15.वज्र योग(Vajra Yoga):
वज्र योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति वज्र के समान मजबूत और शक्तिशाली होता है. इनके हाथों में ग़जब की ताकत और शक्ति होती है. यह कई प्रकार की विद्याओं में निपुण होते हैं और अस्त्र-शस्त्र चलाने में पारंगत होते हैं. इन्हें आम तौर पर धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है. ये बहुत ही साहसी और परक्रमी भी होते हैं.
16.सिद्ध(Siddha Yoga):
सिद्ध योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति को हरफनमौला कहा जा सकता है क्योंकि ये सभी प्रकार के काम में निपुण होते हैं. इन्हें जो भी काम मिलता है वे उस काम को पूरी लगन और होशियारी से पूरा कर पाने में सक्षम होते हैं. ये दिखने में सुन्दर होते हैं और सुखमय जीवन का आनन्द लेते हैं. ये लोगों की सहायता करने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं. मज़बूर और लाचारों को दान देने में भी ये आगे रहते हैं. इन्हें स्वास्थ्य को लेकर कुछ परेशानियों का सामना करना होता है और कुछ दु:ख उठाना पड़ता है.
17.व्यतीपात(Vyatipat Yoga):
ज्योतिशास्त्र के कथनानुसार जो व्यक्ति व्यतीपात योग में जन्म लेता है वह व्यक्ति बचपन में काफी परेशानी महसूस करता है. बाल्यावस्था में इन्हें कष्ट का सामना करना पड़ता है. यह व्यक्ति जैसे जैसे बड़ा होता जाता है अपने अनुभवों से दु:ख को सुख में बदल लेने में सक्षम होता है. युवावस्था आते आते ये सुखमय जीवन का आन्नद पाने लगते हैं और यशस्वी होते हैं.
18.वारीयन योग(variyan Yoga):
जिस व्यक्ति का जन्म वारीयन योग में होता है वह मनुष्य संगीत, नृत्य एवं कला के विभिन्न क्षेत्रों में रूचि रखता है अगर ये इन क्षेत्रों में प्रयास करें तो इन्हें बहुत जल्दी कामयाबी मिलती है. ये शिल्प कला में भी कामयाबी हासिल कर सकते हैं. ये धुन के पक्के होते हैं जो तय कर लेते हैं उसे पूरा करके ही रहते हैं. ये शक्तिशाली और ताकतवर होते हैं.
19.परिध योग(Paridh Yoga):
परिध योग में जन्म लेने वाला मनुष्य बुद्धिमान होता है और कई विद्याओं का जानकार होता है. ये विद्वान और ज्ञानी होते हैं और मधुर बोलने वाले होते हैं. ये अपने गुणों एवं कार्यों से कुल परिवार का नाम ऊँचा करते हैं तथा सांसारिक सुखों का आनन्द लेते हैं.
20.शिव योग(Shiv Yoga):
जिस व्यक्ति का जन्म शिव योग में होता है वह मनुष्य बहुत ही बुद्धिमान होता है और जीवों का कल्याण चाहने वाला होता है. ये स्वार्थ के वश में नहीं होते हैं और दूसरों के लिए आपनी चाहतों और हितों का त्याग करने वाले होते हैं. ये सच्चे हृदय के व्यक्ति होते हैं. समाज में अपने साधु स्वभाव के कारण काफी मान सम्मान प्राप्त करते हैं.
21.सिद्ध योग(Siddha yoga):
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सिद्धयोग में होता है वह मनुष्य तंत्र मंत्र में रूचि रखता है और इनकी उपासना भी करता है. इनकी पत्नी सुन्दर एवं गुणवती होती हैं. ये धनवान एवं सम्पत्ति से परिपूर्ण होते हैं.
22.साध्य योग(Sadhya Yoga):
साध्य योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति दृढ संकल्पी होता है अर्थात जो तय कर लेता है उस पर कायम रहने वाला होता है. ये जो भी काम करते हैं उसमें तब तक जुटे रहते हैं जब तक कि उनमें कामयबी न मिले. ये दीर्घसूत्री होते हैं जो भी काम करते हैं बहुत ही धैर्य से करते हैं. जल्दबाजी में कुछ नहीं करते हैं.
23.शुभ योग(Shubh Yoga):
जैसा योग का नाम है उसी प्रकार यह योग शुभ होता है. इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति का चेहरा सुन्दर होता है ये बुद्धिमान और ज्ञानी होते हैं. इनके पास धन की कमी नहीं रहती है ये धनवान होते हैं. ये उदारता पूर्वक दान देने वाले होते हैं. ये ब्राह्मणों की सेवा और सम्मान करने वाले होते हैं.
24.शुक्ल योग (Shukla Yoga):
जिस व्यक्ति का जन्म शुक्ल योग में होता है वह मनुष्य सभी प्रकार की कलाओं में पारंगत होता है. ये कविताओं में रूचि रखते हैं और कवि होते हैं. ये विद्या के धनी अर्थात विद्वान होते हैं. इस योग के जातक बहुत ही बहादुर और वीर होते हैं. आर्थिक रूप से ये काफी सम्पन्न होते हैं. ये अपने व्यवहार एवं स्वभाव से लोगों के दिलों पर राज करते हैं.
25.ब्रह्म योग(Brahma Yoga):
जो व्यक्ति ब्रह्म योग में जन्म लेता है वह व्यक्ति बहुत ही ज्ञानी होता है. वह वेदों एवं विद्याओं का ज्ञाता होता है. ये सभी प्रकार के काम करने में निपुण होते है. ये ईश्वर में विश्वास करने वाले और सच्चे हृदय के व्यक्ति होते हैं.
26.ऐन्द्र योग(Aindra Yoga):
जिस व्यक्ति का जन्म ऐन्द्र योग में होता है वह मनुष्य बहुत ही भाग्यशाली होता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस योग का जातक काफी धनवान व गुणवान होता है. ये सांसारिक सुखों का उपभोग करने वाले होते हैं. इस योग में पैदा लेने वाले मनुष्य के विषय में ज्योतिषशास्त्र कहता है कि इनकी आयु कम होती है अर्थात ये अल्पायु होते हैं.
27.वैधृति योग(Vaidhiriti Yoga):
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म वैधृति योग में होता है वह व्यक्ति सदा उत्साहित रहता है, जो भी काम करता उसे जोश और उमंग से साथ पूरा करता है. ये मेहनती और कर्मठ होते हैं. इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति जहां तक संभव होता है लोगों की सहायता करने हेतु तत्पर रहता है फिर भी इन्हें लोगों से उचित स्नेह और मान सम्मान नहीं मिलता है.




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