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अयंनाश (Ayanamsh)
अंग्रेजी सिस्टम में अयंनाश (Ayanamsh) होता है, इसीलिए उसे सायन सिस्टम के रुप में जाना जाता है. भारतीय सिस्टम में अयंनाश (Indian System of Ayanamsh) नही होता इसीलिए उसे निरायण सिस्टम के रुप में जाना जाता है. ये दोनो सिस्टम पूरे विश्व में बहुत ही प्रसिद्ध है.
अंग्रेजी सिस्टम में अयंनाश (Ayanamsh) होता है, इसीलिए उसे सायन सिस्टम के रुप में जाना जाता है. भारतीय सिस्टम में अयंनाश (Indian System of Ayanamsh) नही होता इसीलिए उसे निरायण सिस्टम के रुप में जाना जाता है. ये दोनो सिस्टम पूरे विश्व में बहुत ही प्रसिद्ध है. हिन्दु चन्द्र राशी (Chandra RashI) सितारो में स्थिर है जबकि अंग्रेजी चन्द्र राशी सितारो में चलायमान है. जबकि वास्तव में वरनल इक्वीनोक्स जो कि आकाशीय रेखा और ग्रहण (Grahan) के मध्य को काटने वाला बिन्दु है, जहाँ से सुर्य उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश करता है तथा प्रत्येक 72 वर्षो के बाद अपने स्थान से 1 अंश (Degree) पीछे हट जाता है. इसलिए वैशाखी जो कि सुर्य के मेष राशी (Sun In Aries Sign) में आने से आती है, प्रत्येक 72 सालों में एक दिन आगे बढ जाती है. इस प्रकार तेरह हजार वर्षो के बाद मौसम (ऋतु) में परिवर्तन (Climate Change) होगा, जिस कारण सर्दिया जून में तथा गर्मिया दिसम्बर में आऎगी.हिन्दु ज्योतिष में चित्रापक्षीय सिद्धान्त (Chitrapakhiya Sidhanta)) 41 के अनुसार वरनल इक्वीनोक्स 285 ईस्वी में स्थिर कर दिया गया तथा हिन्दु राशी (चन्द्र) के अनुसार पहला मेष बिन्दु (First Mesh Bindu) माना गया. वास्तव में वरनल ईक्वीनोक्स मूपिसीयम तारे से 43 इन्च आगे है जोकि चित्रा नक्षत्र के अल्फा विरजिनिस से 180º दूर स्थित है. रैवत पक्षीय सिद्धान्त के अनुसार वरनल इक्वीनोक्स(Vernal Equninox) रेवती नक्षत्र (Revati Nakshatra) के जेटापिसीयम (Zeta Pascium) तारे से टकराता है. सौर पक्षीय सिद्धान्त के अनुसार यह अपनी स्थिति से 12 इन्च आगे स्थित है. 1955 में सरकार ने चित्रा पक्षीय सिद्धान्त (Chitrapakhiya Sidhanta) को मान्यता दी.
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