- आपकी जन्म कुंडली
- कुंडली फलादेश
- कालसर्प दोष चैक
- वर्ष कुंडली
- वर्षफल
- राशिफल
- आज का राशिफल
- मासिक राशिफल
- दैनिक ज्योतिष
- चौघड़िया
- राहुकाल
- आज का पंचाग
- वैवाहिक ज्योतिष
- विवाह मिलान
- मांगलिक दोष
- लाल किताब
- लालकिताब कुंडली
- लालकिताब कुंडली
- अंक ज्योतिष
- आपका नाम
- आपका जन्मदिन
- नाम सलाह
- अन्य
- शुभ राशि रत्न
- शुभ रुद्राक्ष
बेनजीर भुट्टो की हत्या का ज्योतिषीय विश्लेषण (Astrlogical Analysis of Benazir Bhutto's Assassination)
पूर्वी एशियाई महाद्वीप एंव पाकिस्तान की बहादुर नेत्री भू. प्रधानमन्त्री श्री मति बेनजीर जरदारी भुट्टो की 27 दिसम्बर 2007 दिन बृहस्पतिवार को सांयकाल 5 बजकर 35 मिनट पर रावलपिण्डी में एक आम जनसभा के बाद सिर व गर्दन में गोली मारकर हत्या कर दी गई.
बेनजीर भुट्टो का ज
न्म 21 जून 1953 को लाहौर (पाकिस्तान) में साँयकाल हुआ था. जन्म समय पूर्वी क्षितिज पर धनु लग्न उदित था. बेनजीर भुट्टो की जन्मराशी(zodiac sign) तुला थी. विस्तार भय से हम श्रीमति भुट्टो के जन्माग का विश्लेषण न करके 27 दिसम्बर 2007 को ग्रहो के गोचरवश भ्रमण से पड्ने वाले प्रभाव की चर्चा विस्तार से करेंगे. ज्योतिष शास्त्र में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह लेख काफी ज्ञान वर्धक होगा.पूर्वी एशियाई महाद्वीप एंव पाकिस्तान की बहादुर नेत्री भू.पू. प्रधानमन्त्री श्री मति बेनजीर जरदारी भुट्टो की 27 दिसम्बर 2007 दिन बृहस्पतिवार को सांयकाल 5 बजकर 35 मिनट पर रावलपिण्डी में एक आम जनसभा के बाद सिर व गर्दन में गोली मारकर हत्या कर दी गई. बेनजीर भुट्टो का जन्म 21 जून 1953 को लाहौर (पाकिस्तान) में साँयकाल हुआ था. जन्म समय पूर्वी क्षितिज पर धनु लग्न उदित(Sagittarious ascendant) था.
बेनजीर भुट्टो की जन्मराशी(zodiac sign) तुला थी. विस्तार भय से हम श्रीमति भुट्टो के जन्माग का विश्लेषण न करके 27 दिसम्बर 2007 को ग्रहो के गोचरवश भ्रमण से पड्ने वाले प्रभाव की चर्चा विस्तार से करेंगे. ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों एंव आम जनमानस के लिए यह लेख काफी ज्ञान वर्धक होगा.
जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि बेनजीर भुट्टो का जन्म धनु लग्न में(Sigittarius ascendant) हुआ था तो धनु लग्न(Dhanu lagna) की कुण्डली को आधार मानकर ग्रहो की गोचरीय स्थिति(Transit of planet) का विश्लेषण किया जायेगा. हत्या के दिन लग्नेश (गुरु) सहित चारो केन्द्र स्थान (1,4,7,10) के स्वामी गुरु एंव बुध अस्त थे, अष्टमेश (आयु भाव) चन्द्रमा यद्यपि अष्टम भाव(Ashtm Bhav) में था परन्तु दोनो तरफ पापी ग्रह वक्री मंगल और वक्री शनि-केतु से घिरा होने के कारण पाप प्रभाव(Malefic effect) में आ गया अर्थात आयु (जीवन) पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया. अब हम भाग्य की स्थिति देखते हैं, यद्यपि भाग्येश सूर्य लग्न में स्थित है परन्तु नवम भाव (भाग्य स्थान) में सूर्य का परम शत्रु शनि वक्री होकर बैठा है. शनि की स्थिति एक तो करेला उपर से नीम चढा वाली है.शास्त्रीय सिद्धान्त है कि क्रूर ग्रह वक्री होकर और अधिक पापी बन जाते हैं. फिर शनि के साथ छाया ग्रह केतु भी है, केतु शनि का ही प्रभाव देगा. शनि कुण्डली के अनुसार मारकेश (द्वितीयेश) भी है.
जब इतनी सारी विपरीत स्थितियों का निर्माण हो रहा हो तो भाग्य का सूर्य तो अस्त होना ही है.
अब हम हत्या के कारक मंगल ग्रह की बात करते हैं. मंगल वक्री होकर सप्तम भाव (मारक स्थान) में स्थित होकर अपनी सप्तम दृष्टि से जातिका के शरीर (सिर) और अष्टम दृष्टि से द्वितीय भाव (गर्दन) को देख रहा है. यद्यपि सप्तमेश बुध लग्न में ही स्थित है परन्तु अस्त होने एंव मंगल द्वारा दृष्ट होने से निर्बल स्थिति में है. फलित ज्योतिष में यह सिद्धान्त है कि केन्द्र स्थान में वक्री ग्रह सदा हानि करते हैं और यदि वक्री ग्रह पापी (क्रूर) भी हो तो मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट भी देते हैं. मंगल ग्रह गोली बारुद का कारक एंव सप्तम भाव प्रत्यक्ष शत्रु का होता है. आप सबको मालूम ही होगा कि हत्यारे ने आटोमेटिक पिस्टल से बडे ही नजदीक से श्रीमति भुट्टो की सिर व गर्दन में 5-6 गोलियाँ मारकर हत्या कर दी. ग्रह कभी झूठ नहीं बोलते ज्योतिष समय का दर्पण है, संसार में जो भी अच्छा या बुरा होता है वह परमात्मा के निश्चित विधान के अनुसार होता है.
नोट: आप कम्पयूटर द्वारा स्वयं जन्मकुण्डली, विवाह मिलान और वर्षफल का निर्माण कर सकते हैं. यह सुविधा होरोस्कोप एक्सप्लोरर में उपलब्ध है. आप इसका 45 दिन तक मुफ्त उपयोग कर सकते हैं. कीमत 1250 रु. जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करे




Download attachment >>
del.icio.us
Digg

Comments (1 posted):
Post your comment