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शड्बल के 6 प्रमुख भागों में से चौथा है चेष्टा बल (Chesta bala is the fourth part of Shadbala)

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चन्द्रमा  चेष्टा बल पक्ष बल  होता है (Ayan Bala is the chesta bala of Sun and Paksha bala is the chesta bala of Moon)। सूर्य और चन्द्रमा की तरह मंगल से लेकर शनि ग्रहों की भी लगभग 8 प्रकार की गति होती है जो उनका चेष्टा बल कहलाता है। ग्रहों की गति मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है धीमी, सामान्य और तीव्र। इन मुख्य गति के अलावा ग्रहों की और भी गति होती है जैसे स्थिर, प्रतिगमन, और राशि में संक्रमण इसके अन्तर्गत ग्रह जिस राशि में होते हैं उससे अगले राशि और पिछली राशि में गमन करते हैं।

प्रतिगमन (Retrograde Motion)
चेष्टाबल के अन्तर्गत वे ग्रह बहुत ही शक्तिशाली कहे जाते हैं जो प्रतिगमन करते हैं। प्रतिगामी ग्रह को चेष्टाबल में सबसे अधिक अंक प्राप्त होता है। इनका स्कोर 60 होता है जो अधिकतम अंक कहा गया है। इस प्रकार की गति को वक्र कहा गया है (Retrograde Motion is called Vakra)।

ग्रह प्रतिगमन दो प्रकार से करते हैं पहले प्रकार के विषय में आप जान चुके हैं आइये अब दूसरे प्रकार के विषय में जानें। ग्रहों के प्रतिगमन के दूसरे प्रकार को अनुवक्र के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार की गति में ग्रह प्रतिगमन करते हुए जिस राशि में होता है उससे पीछली राशि में प्रवेश करता है। इस प्रकार की गति करने वाले ग्रह को 50% अंक यानी 30 स्कोर प्राप्त होता है।

स्थिर ग्रह (Stationary Planets)
जिस ग्रह की दिशा स्थिर होती है वे स्थिर ग्रह या स्टेशनरी प्लानेट कहलाते हैं (A Planet is Stationary if he is stable or devoid of Motion)। इस प्रकार की स्थिति तब आती है जबकि ग्रह मार्गी से वक्री और वक्री से मार्गी की ओर गमन करते हैं। स्थिर ग्रहों को चेष्टा बल के अन्तर्गत 25 प्रतिशत अंक मिलते है इसलिए इसका स्कोर 15 होता है। इस प्रकार की गति को विकल कहा जाता है।

मार्गी (Direct Motion)
होरा शास्त्र में बताया गया है कि कुल पांच प्रकार के मार्गी पांच प्रकार के होते हैं (According to the Hora shashtra, There are five types of direct motion.)
पहले मार्गी को मन्द तारा कहा जाता है (First type of Direct Motion called Mandatara)। मन्द तारा तब होता है जब ग्रह की गति धीमी होती है। ग्रह जब इस गति में होते हैं तब उन्हें 25% अंक यानी 15 स्कोर मिलते हैं।

मार्गी का दूसरा प्रकार है मन्द। ग्रहो की गति तब मन्द कही जाती है जबकि वे मध्यम गति से चल रहे होते हैं। इस दिशा में ग्रहों के गतिमान रहने पर 50 प्रतिशत अंक मिलता है जिससे इसका स्कोर 30 होता है।
मार्गी के अन्तर्गत ग्रहों की समान्य गति को सम कहा जाता है। ग्रहों की गति सामान्य तब कही जाती है जब वे औसत चाल में गतिमान होते हैं। इस प्रकार की गति होने पर ग्रह 7.5 अंक प्राप्त करते हैं। ग्रहों की इस गति को चेष्टा बल में सबसे कमज़ोर माना जाता है।

ग्रह जब तेज मार्गी होकर भ्रमण करते हैं तो इस गति को चर कहा जाता है (Fast Direct motion is called Chara)। जो ग्रह चर में गमन करते हैं उन्हें 75 प्रतिशत चेष्टा बल प्राप्त होता है इसलिए इनका स्कोर 45 होता है।

चर गति की एक विशेष प्रकार होती है जिसे अतिचर कहा जाता है (A special Chara motion is  called Atichara)। ग्रह की गति को अतिचार उन स्थिति में कहा जाता है जब वे गोचर में चर से चलते हुए दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते है। अतिचर ग्रह 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करते हैं और इनका कुल स्कोर 30 होता है।

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