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क्या ग्रह अस्त होने पर प्रभावहीन हो जाता है? (Does Combustion Influence The Planets)

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ज्योतिष शास्त्रो में सामान्य तौर पर ऎसा माना जाता है कि ग्रह अस्त (Combustion of Planets) होने के बाद अपना प्रभाव खो देता है. अर्थात वह निष्फल हो जाता है. तार्किक दृष्टि से तो यह सिद्धान्त सही प्रतीत होता है परन्तु व्यवहारिक दृष्टि से भी क्या यह सही है इसकी विवेचना हम इस लेख के माध्यम से करेंगे. लेखक की मान्यता है कि यदि ग्रह फल देने में एकदम प्रभावहीन हो जाये तो जन्मकुण्डली में उस ग्रह विशेष की उपस्थिति का कोइ अर्थ ही नहीं. कोइ ग्रह अस्त होने पर कमजोर हो सकता है, कडे परिश्रम के उपरान्त फल देगा यह हो सकता है (रुकावटो के पश्चात फल देगा) तथा पूर्ण फल(Purna Phala) न देकर आधा-अधूरा (श्रम के अनुसार)फल प्रदान करेगा. यहाँ एक बात और विशेष रुप से ध्यान देने की है कि यदि अस्त होने वाला ग्रह सूर्य का मित्र हो तो कम हानि और यदि शत्रु हो तो अधिक हानि करेगा.

ज्योतिष शास्त्रो में सामान्य तौर पर ऎसा माना जाता है कि ग्रह अस्त (Combustion of Planets) होने के बाद अपना प्रभाव खो देता है. अर्थात वह निष्फल हो जाता है. तार्किक दृष्टि से तो यह सिद्धान्त सही प्रतीत होता है परन्तु व्यवहारिक दृष्टि से भी क्या यह सही है इसकी विवेचना हम इस लेख के माध्यम से करेंगे. लेखक की मान्यता है कि यदि ग्रह फल देने में एकदम प्रभावहीन हो जाये तो जन्मकुण्डली में उस ग्रह विशेष की उपस्थिति का कोइ अर्थ ही नहीं. कोइ ग्रह अस्त होने पर कमजोर हो सकता है, कडे परिश्रम के उपरान्त फल देगा यह हो सकता है (रुकावटो के पश्चात फल देगा) तथा पूर्ण फल(Purna Phala) देकर आधा-अधूरा (श्रम के अनुसार)फल प्रदान करेगा. यहाँ एक बात और विशेष रुप से ध्यान देने की है कि यदि अस्त होने वाला ग्रह सूर्य का मित्र हो तो कम हानि और यदि शत्रु हो तो अधिक हानि करेगा.

एक कहावत है कि उगते सूरज (Rising Sun) को सब सलाम करते हैं तथा एक सामान्य आदमी हवा के रुख के साथ बहता है, अधिकतर ज्योतिषी विद्वजन भी इसी श्रेणी में आते हैं. यदि उनको किसी कुण्डली का विश्लेषण करने का काम दिया जाये तो सबसे पहले वो यह जानने का प्रयास करते हैं कि कुण्डली किसी सफल व्यक्ति की है या असफल व्यक्ति की. मान लो वह कुण्डली सफल व्यक्ति की है तो ज्योतिषी महाशय उस कुण्डली में मौजूद सभी प्रकार के शुभ योगो (Auspicious Yog) का बखान बडे ही विस्तृत तरीके से करेंगे. और यदि कुण्डली किसी असफल व्यक्ति की है तो उस कुण्डली में कितने बुरे योग हैं, अपनी पूरी विद्वता इसी पर लगा देंगे और कुण्डली में स्थित शुभ प्रभावो को एकदम नजरअन्दाज कर देंगे.

लेखक ने अपने व्यावहारिक जीवन में ऎसी बहुत सी कुण्डलियो की विवेचना की है जिनमें कुण्डली में अच्छे ग्रह होते हुए भी व्यक्ति सामान्य स्तर पर है तथा अस्त ग्रहो (Combust Planet) वाला व्यक्ति उँचे स्तर पर है. इस विरोधाभास का क्या कारण है क्योंकि यह ज्योतिषीय सिद्धान्तो के विपरीत है. वास्तविकता यह है कि शुभ ग्रहो से युक्त कुण्डली वाला व्यक्ति अल्प प्रयास से फल की प्राप्ती कर लेता है जबकि अशुभ ग्रहो से प्रभावित व्यक्ति को फल पाप्त करने के लिए कडा परिश्रम (अधिक प्रयास) करना पड्ता है. अन्तर केवल फल के प्रतिशत(Degree Of Result) में है.

ज्योतिष शास्त्र कभी भी किसी को कर्म से विमुख नहीं करता. तुलसीदास जी ने कहा भी है कि "सकल पदार्थ है जगमाँही, कर्महीन नर पावत नाहीं". कर्म तो उत्तम ग्रहो वाले व्यक्तियों को भी करना पड्ता है, यह और बात है कि अल्प प्रयास में ही फल की प्राप्ति हो जाती है. ज्योतिष का अर्थ है सच्चाई प्रकट करना कि भयभीत करना. इसलिए यदि आपकी कुण्डली में ग्रह अस्त या कमजोर हैं तो घबरायें नहीं बल्कि इस सत्य को स्वीकार करें कि आपको पुरुषार्थी या कर्मयोगी बनना है. परिश्रम के उपरान्त मिलने वाला फल बहुत ही मीठा आनन्द देने वाला होता है. यदि आप परिश्रमी हैं, साहसी हैं, लग्नशील हैं, बुद्धिमान हैं अपने लक्ष्य के प्रति अडिग हैं तो आपको मंजिल प्राप्त करने से कौन सा ग्रह रोक लेगा.

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Comments (1 posted):

Pankaj Tripathi on 05 January, 2010 01:12:38
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it was fantastic interpretation and it has aroused curiosity in my mind about my subh and asubg yogas in my kundli
name : Pankaj Tripathi
dob : 12-01-1984
time : 11.30 pm
place: Pratapgarh (UP)
India
Please tell me about the good and bad yogas in my kundli at this email
pankajtripathi1284@gmail.com

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