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वैदिक ज्योतिष में अंशो का महत्व (Importance of Degrees In Vedic Jyotish)

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वैदिक ज्योतिष का आधार गणित है। इस आधार पर गणितीय सिद्धांत से ज्योतिषशास्त्र को अलग नहीं किया जा सकता। ज्योतिषशास्त्र में जिन नियमों को अपनाया गया है उसके अनुसार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को 360º यानी अंश माना गया है। इनमें कुल 12 राशिया होती हैं, प्रत्येक राशि के 30º होते हैं। 27 नक्षत्र (27 Nakshatras) होने से पत्येक नक्षत्र 13-20º का होता है।

सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को 360º माना गया है. कुल 12 राशिया होती हैं, प्रत्येक राशि के 30º होते हैं. 27 नक्षत्र (27 Nakshatras) होने से पत्येक नक्षत्र 13-20º का होता है. वैदिक ज्योतिष में अंश (Degrees in Vedic Jyotish) अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं . ग्रहो के उदय- अस्त तथा वक्री-मार्गी (Retrograde-Direct) होने में सूर्य से अन्य ग्रहो की दूरी को अंशो में ही मापा जाता है. अंशो के आधार पर ही ग्रह की बल्य, युवावस्था एवं वृद्धावस्था का पता चलता है. सूर्य से चन्द्र्मा के अंशो में दूरी होने पर ही शुक्ल पक्ष-कृष्ण पक्ष (Shukla Paksha/Krishna Paksha) का निर्माण होता है.

किसी जन्मकुण्डली के निर्माण के लिए व्यक्ति की जन्मतिथि, जन्म समय एवं जन्म स्थान को लिया जाता है. समय के बढ़ने के साथ ही जन्म लग्न के अंशो में भी वृद्धि होती है. वर्ग सारणी का पूरा आधार ही अंशो पर टिका है (Astrological Varg Chart depends on degree). अंशो को ज्ञात किये बिना नवमांश, दशमांश (Navmansh, Dushmansh) इत्यादि वर्गो का निर्माण नही किया जा सकता. आम तौर पर माना जाता है कि जब कोइ भी ग्रह सूर्य से 15º के अन्तर पर रह जाता है तो अस्त हो जाता है.

किसी भी ग्रह की सुर्य से दूरी बढ्ने पर उस ग्रह की गति में परिवर्तन होता है, ग्रह अस्त (Planetary Combustion) से उदित (Rising of planet) फिर अतिचारी (Speedy Planet) फिर शीघ्रगामी (Fast planet), फिर सामान्य गति फिर मन्दगति तथा फिर वक्री (Retrograde Planet) हो जाता है. मार्गी होने पर पुनः उपरोक्त गति के अनुसार भ्रमण करने लग जाता है. चन्द्रमा के अंशो के आधार पर ही विंशोत्तरी दशा निकाली जाती है. अतः हम अंशो की महत्ता को नकार नहीं सकते.

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