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ग्रहों की दृष्टि से प्राप्त होने वाला बल है "दृग बल" ( Drig bala originates from aspect of Planets)

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image Drig_bala

सामान्य शब्दों में कहें तो दृग का अर्थ होता है देखना। ज्योतिष विधान के अनुसार बात करें तो दृग बल से तात्पर्य है "दृष्टि बल"(In Jyotish Drig Bala means Drishti Bala)।

 शड्बल के अन्तर्गत ग्रहों का बल जानने के लिए जिन मुख्य बलों से विचार किया जाता है उनमें से एक है दृग बल। दृग बल के अन्तर्गत देखा जाता है कि ग्रह की दृष्टि किस प्रकार से ग्रह विशेष के लिए लाभदायक है और नुकसानदेय (In Drig bala we can see how planets Drishti is Benefic or Malefic for other planets)। 

ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की दृष्टि का बहुत ही महत्व है( Aspect of Planets are very Important in Astrology)  । ग्रह अगर किसी विशेष ग्रह को पूर्ण या शुभ दृष्टि से देखता है तो यह जातक के लिए शुभ स्थिति कही जाती है इसके विपरीत जब ग्रह की दृष्टि अशुभ होती है तो जातक को कई प्रकार की परेशानी और नुकसान का सामना करना पड़ता है।

शड्बल के अन्तर्गत दृग बल ऐसा बल है जो ग्रहों को एक दूसरे की दृष्टि से प्राप्त होता है (Drig bala is created from drishti of Planets)। दृष्टिबल का आंकलन करते समय यह देखा जाता है कि गोचर में अमुक ग्रह किसी ग्रह विशेष को कितने समय तक किस डिग्री से देख रहा है।

दृष्टिबल में ग्रहों का बल डिग्री से देखा जाता है यानी कितनी डिग्री से ग्रह दूसरे ग्रह को देख रहा है यह महत्वपूर्ण होता है। ग्रह जब 7 सप्तम भाव में होते हैं तब वे 1800 का कोण बनाते हैं इस स्थिति में ग्रह को 60 अंक प्राप्त होते हैं यानी ग्रह शुभफलदायी होते हैं (When the Planets are situated in seventh house they make 180 degree angle, in this condition Planets get 60 Points)।

एक ग्रह जब दूसरे ग्रह को चतुर्थ और अष्टम भाव यानी 90 और 120 डिग्री से देखते हैं तब ग्रह को 75% बल मिलता है जिससे ग्रह का स्कोर 45 होता है। ग्रह जब 5 और नवम भाव से अर्थात 120 और 240 से ग्रह को देखते हैं तब 50 प्रतिशत दृष्टिबल मिलता है जिससे ग्रह का स्कोर 30 होता है। क्रमागत रूप से तीसरे और दशम भाव से जब ग्रह देखते हैं यानी 60 से 270 डिग्री पर ग्रह दृष्टि डालते हैं तब 25 % दृष्टिबल ग्रह को प्राप्त होता है और उनका स्कोर 15 होता है इससे आगे की स्थिति में शून्य बल प्राप्त होता है।

अपवाद के रूप में चतुर्थ और अष्टम भाव में मंगल को पूरा स्कोर यानी 60 अंक मिलता है। 5 और नवम भाव में बृहस्पति व तीसरे और दशम भाव में शनि पूर्णाक पाप्त करता है।

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