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लग्न से षष्टम तक द्वादशेश का फल (Dwadshes Lagna to Sixth House)
द्वादशेश प्रथम भाव में (Dwadshes in Lagna)
आपकी कुण्डली के प्रथम भाव में द्वादश भाव का स्वामी स्थित है.इस स्थिति में आप दिखने में आकर्षक होते हैं.आपकी वाणी में मधुरता रहती है परंतु क्रोध भी जल्दी आता है जिसके कारण आप किसी से भी उलझ पडते हैं.आपका अधिकांश समय पैतृक स्थान से दूर व्यतीत होता है.आपकी शिक्षा दीक्षा भी विदेश में होती है.व्यय भाव का स्वामी आपसे अनावश्यक व्यय कराता है.वैवाहिक जीवन में परेशानी आती है.लग्न स्थान में तुला अथवा कुम्भ राशि हो और द्वादशेश शनि अथवा बुध हो तो शुभ फलदायी होता है अन्यथा लग्न स्थान में द्वादश भाव का स्वामी पीड़ादायक होता है.
द्वादशेश द्वितीय भाव में (Dwadshes in Second house)
व्ययेश धनेश के घर में होने पर धन की कमी का सामना करना होता है.आय की अपेक्षा खर्च की अधिकता रहती है.आय के साधन भी सीमित रहते हैं.द्वितीय भाव में जिनके द्वादशेश होता है उन्हें मित्रों एवं सगे सम्बन्धियों से भी सहयोग मिलता कठिन होता है.व्यवहार में कोमलता का अभाव रहने के कारण इन्हें कई प्रकार की कठिनाईयों का भी समाना करना होता है.
द्वादशेश तृतीय भाव में (Dwadshes in Third house)
तृतीय भाव पराक्रम और अर्जित धन के विषय में बताता है.इस भाव में द्वादशेश की स्थिति होने पर अशुभ प्रभाव अधिक देता है.शुभ ग्रह अगर द्वादश भाव का स्वामी होकर तृतीय भाव में विराजमान होता है तो अशुभ प्रभाव में कमी आती है.व्यापार एवं कारोबार में धन की स्थिति अच्छी रहती है.अधिक से अधिक धन अर्जन के प्रति मन में उत्सुकता रहती है.पारिवारिक जीवन के सुख में कमी का सामना करना होता है क्योंकि इनका अधिकांश समय घर परिवार से दूर ही गुजरता है.द्वादशेश पाप ग्रह होने पर व्यवसाय में लाभ कि स्थिति बहुत अच्छी नही रहती है.भाईयों से सुख का अभाव होता है.
द्वादशेश चतुर्थ भाव में (Dwadshes in Fourth house)
कुण्डली का चौथा घर सुख का घर होता है.द्वादशेश सुखेश के घर में यानी चतुर्थ भाव में होने पर संतान के सम्बन्ध में पीड़ादायक होता है.व्ययेश से पीड़ित होने के कारण सुख में कमी आती है.द्वादशेश शुभ ग्रह होने पर सामान्य सुख प्राप्त होता है.वृद्धावस्था में स्वस्थ्य और सुख प्राप्त करता है.संतान को लेकर मन दु:खी रहता है.
द्वादशेश पंचम भाव में (Dwadshes in Fifth house)
पंचम भाव को विद्या और संतान का घर कहा जाता है.कुण्डली में द्वादशेश जब पंचम भाव में होता है तब यह संतान सुख में कमी लाता है.इस भाव में स्थित व्ययेश व्यवसाय एवं कारोबार में भी हानि पहुंचाता है.अगर पाप ग्रह द्वादशेश होकर इस भाव में स्थित हो तो और भी अशुभ प्रभाव देता है.शुभ ग्रह व्ययेश होने से संतान सुख प्राप्त होता है.कारोबार एवं रोजगार में अच्छी सफलता मिलती है.पैतृक सम्पत्ति से सुख प्राप्त करता है.
द्वादशेश षष्टम भाव में (Dwadshes in Sixth house)
कुण्डली के छठे भाव में द्वादश भाव का स्वामी होने पर प्रभावित व्यक्ति जरूरत से अधिक कंजूसी करता है.आवश्यक चीज़ों में भी धन खर्च करने से पहले ये हज़ार बार सोचते हैं.इनका जीवन अशांत और परेशानियों से घिरा होता है.व्ययेश शुभ ग्रह होने पर यह अधिक कष्टकारी नहीं होता है.इनका जीवन सुखमय रहता है.कारोबार एवं व्यवसाय में स्थिति सामान्य रहती है.
आपकी कुण्डली के प्रथम भाव में द्वादश भाव का स्वामी स्थित है.इस स्थिति में आप दिखने में आकर्षक होते हैं.आपकी वाणी में मधुरता रहती है परंतु क्रोध भी जल्दी आता है जिसके कारण आप किसी से भी उलझ पडते हैं.आपका अधिकांश समय पैतृक स्थान से दूर व्यतीत होता है.आपकी शिक्षा दीक्षा भी विदेश में होती है.व्यय भाव का स्वामी आपसे अनावश्यक व्यय कराता है.वैवाहिक जीवन में परेशानी आती है.लग्न स्थान में तुला अथवा कुम्भ राशि हो और द्वादशेश शनि अथवा बुध हो तो शुभ फलदायी होता है अन्यथा लग्न स्थान में द्वादश भाव का स्वामी पीड़ादायक होता है.
द्वादशेश द्वितीय भाव में (Dwadshes in Second house)
व्ययेश धनेश के घर में होने पर धन की कमी का सामना करना होता है.आय की अपेक्षा खर्च की अधिकता रहती है.आय के साधन भी सीमित रहते हैं.द्वितीय भाव में जिनके द्वादशेश होता है उन्हें मित्रों एवं सगे सम्बन्धियों से भी सहयोग मिलता कठिन होता है.व्यवहार में कोमलता का अभाव रहने के कारण इन्हें कई प्रकार की कठिनाईयों का भी समाना करना होता है.
द्वादशेश तृतीय भाव में (Dwadshes in Third house)
तृतीय भाव पराक्रम और अर्जित धन के विषय में बताता है.इस भाव में द्वादशेश की स्थिति होने पर अशुभ प्रभाव अधिक देता है.शुभ ग्रह अगर द्वादश भाव का स्वामी होकर तृतीय भाव में विराजमान होता है तो अशुभ प्रभाव में कमी आती है.व्यापार एवं कारोबार में धन की स्थिति अच्छी रहती है.अधिक से अधिक धन अर्जन के प्रति मन में उत्सुकता रहती है.पारिवारिक जीवन के सुख में कमी का सामना करना होता है क्योंकि इनका अधिकांश समय घर परिवार से दूर ही गुजरता है.द्वादशेश पाप ग्रह होने पर व्यवसाय में लाभ कि स्थिति बहुत अच्छी नही रहती है.भाईयों से सुख का अभाव होता है.
द्वादशेश चतुर्थ भाव में (Dwadshes in Fourth house)
कुण्डली का चौथा घर सुख का घर होता है.द्वादशेश सुखेश के घर में यानी चतुर्थ भाव में होने पर संतान के सम्बन्ध में पीड़ादायक होता है.व्ययेश से पीड़ित होने के कारण सुख में कमी आती है.द्वादशेश शुभ ग्रह होने पर सामान्य सुख प्राप्त होता है.वृद्धावस्था में स्वस्थ्य और सुख प्राप्त करता है.संतान को लेकर मन दु:खी रहता है.
द्वादशेश पंचम भाव में (Dwadshes in Fifth house)
पंचम भाव को विद्या और संतान का घर कहा जाता है.कुण्डली में द्वादशेश जब पंचम भाव में होता है तब यह संतान सुख में कमी लाता है.इस भाव में स्थित व्ययेश व्यवसाय एवं कारोबार में भी हानि पहुंचाता है.अगर पाप ग्रह द्वादशेश होकर इस भाव में स्थित हो तो और भी अशुभ प्रभाव देता है.शुभ ग्रह व्ययेश होने से संतान सुख प्राप्त होता है.कारोबार एवं रोजगार में अच्छी सफलता मिलती है.पैतृक सम्पत्ति से सुख प्राप्त करता है.
द्वादशेश षष्टम भाव में (Dwadshes in Sixth house)
कुण्डली के छठे भाव में द्वादश भाव का स्वामी होने पर प्रभावित व्यक्ति जरूरत से अधिक कंजूसी करता है.आवश्यक चीज़ों में भी धन खर्च करने से पहले ये हज़ार बार सोचते हैं.इनका जीवन अशांत और परेशानियों से घिरा होता है.व्ययेश शुभ ग्रह होने पर यह अधिक कष्टकारी नहीं होता है.इनका जीवन सुखमय रहता है.कारोबार एवं व्यवसाय में स्थिति सामान्य रहती है.




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