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सप्तम से द्वादश तक द्वादशेश का फल (Dwadshes Seventh house to Twelveth House)
सप्तम भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Seventh house)
सप्तम भाव केन्द्रभाव होता है.यह जीवनसाथी और पति-पत्नी का घर भी कहलाता है.इस भाव में द्वादशेश की स्थिति वैवाहिक जीवन के सुखों के लिए हितकर नहीं होता है.अगर व्ययेश पाप ग्रह हो तो यह अधिक परेशानी देता है.इस स्थिति में विवाहेत्तर सम्बन्ध की संभावना भी प्रबल रहती है.ये किसी एक कारोबार में मन को नहीं लगाते हैं बल्कि कई क्षेत्रों से जुडे होते है जिससे व्यवसायिक एवं कारोबारी स्थिति भी अच्छी नहीं रहती है.शुभ ग्रह होने पर व्यवसाय सम्बन्धी परेशानियों का सामना नहीं करना होता है.
अष्टम भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Eighth house)
कुण्डली में आयु स्थान अष्टम भाव होता है.इस भाव में द्वादशेश अगर अशुभ ग्रह है तो यह शुभ प्रभाव देता है क्योंकि इस स्थिति में विपरीत राजयोग बनता है.इस स्थिति के शुभ प्रभाव से आर्थिक रूप से परेशानियों का सामना नहीं करना होता है.सुखमय और दीर्घायु जीवन प्राप्त होता है.अष्टम भाव में द्वादशेश शुभ ग्रह होने पर अशुभ प्रभाव देता है.द्वादशेश के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति काम पीड़ित होता है.वैवाहिक जीवन में सुख का अभाव होता है.
नवम भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Ninth house)
भाग्य भाव में द्वादश भाव का स्वामी शुभ ग्रह होने पर शुभ फल देता है.शुभ द्वादशेश व्यक्ति को धार्मिक प्रवृति का बनाता है.व्यक्ति सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में शामिल होकर हर संभव योगदान देता है.इनका धन सद्कार्यों में खर्च होता है.पाप ग्रह के होने पर धर्म के प्रति आस्था का अभाव होता है.व्यक्ति धर्म को धनार्जन का माध्यम बनाकर धार्मिक होने का दिखावा करने वाला होता है.चारित्रिक दोष होने पर इन्हें समाज में अपमान का भी सामना करना होता है.
दशम भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Tenth house)
कार्य भाव में द्वादशेश की उपस्थिति शुभ होने पर व्यक्ति स्वबलंबी और परिश्रमी होता है.अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर जीवन में कामयाबी की राह पर आगे बढ़ता है.जीवन में सुख और आनन्द बना रहा है.पति पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध रहता है.पापी द्वादशेश होने से व्यक्ति सुख कामी होती है.सुख की चाहत में कर्म में रूचि का अभाव होता है.अन्य स्त्रियों से भी सम्बन्ध की संभावना के कारण जीवनसाथी से मधुर सम्बन्ध का अभाव होता है.
एकादश भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Eleventh house)
व्ययेश पाप ग्रह हो या शुभ ग्रह लाभेश के घर में होना शुभ फलदायक होता है.जिस व्यक्ति की कुण्डली में ऐसी स्थिति होती वह सद्चरित्र होता है.इनका व्यक्तित्व आकर्षक होता है.धन एवं सुखमय जीवन का आनन्द मिलता है.सामाजिक कार्यों मे इनका योगदान रहता है.अपने कर्मों के कारण समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं.द्वादशेश के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को व्यापार, कारोबार में अच्छी सफलता मिलती है.राजकीय क्षेत्र में भी इन्हें प्रतिष्ठित पद प्राप्त होता है.
द्वादश भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Twelveth house)
व्ययेश अगर स्वगृही हो तो द्वादश भाव मजबूत होता है.स्वगृही व्ययेश व्यक्ति को सोच समझकर खर्च करना सिखाता है.जिनकी कुण्डली में द्वादशेश अपने घर में होता है वह व्यक्ति धनवान होता है.समाज में सम्मानित और श्रेष्ठ पद प्राप्त करता है.लोगों से बहुत अधिक मेल जोल रखना इन्हें पसंद नहीं होता.
सप्तम भाव केन्द्रभाव होता है.यह जीवनसाथी और पति-पत्नी का घर भी कहलाता है.इस भाव में द्वादशेश की स्थिति वैवाहिक जीवन के सुखों के लिए हितकर नहीं होता है.अगर व्ययेश पाप ग्रह हो तो यह अधिक परेशानी देता है.इस स्थिति में विवाहेत्तर सम्बन्ध की संभावना भी प्रबल रहती है.ये किसी एक कारोबार में मन को नहीं लगाते हैं बल्कि कई क्षेत्रों से जुडे होते है जिससे व्यवसायिक एवं कारोबारी स्थिति भी अच्छी नहीं रहती है.शुभ ग्रह होने पर व्यवसाय सम्बन्धी परेशानियों का सामना नहीं करना होता है.
अष्टम भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Eighth house)
कुण्डली में आयु स्थान अष्टम भाव होता है.इस भाव में द्वादशेश अगर अशुभ ग्रह है तो यह शुभ प्रभाव देता है क्योंकि इस स्थिति में विपरीत राजयोग बनता है.इस स्थिति के शुभ प्रभाव से आर्थिक रूप से परेशानियों का सामना नहीं करना होता है.सुखमय और दीर्घायु जीवन प्राप्त होता है.अष्टम भाव में द्वादशेश शुभ ग्रह होने पर अशुभ प्रभाव देता है.द्वादशेश के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति काम पीड़ित होता है.वैवाहिक जीवन में सुख का अभाव होता है.
नवम भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Ninth house)
भाग्य भाव में द्वादश भाव का स्वामी शुभ ग्रह होने पर शुभ फल देता है.शुभ द्वादशेश व्यक्ति को धार्मिक प्रवृति का बनाता है.व्यक्ति सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में शामिल होकर हर संभव योगदान देता है.इनका धन सद्कार्यों में खर्च होता है.पाप ग्रह के होने पर धर्म के प्रति आस्था का अभाव होता है.व्यक्ति धर्म को धनार्जन का माध्यम बनाकर धार्मिक होने का दिखावा करने वाला होता है.चारित्रिक दोष होने पर इन्हें समाज में अपमान का भी सामना करना होता है.
दशम भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Tenth house)
कार्य भाव में द्वादशेश की उपस्थिति शुभ होने पर व्यक्ति स्वबलंबी और परिश्रमी होता है.अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर जीवन में कामयाबी की राह पर आगे बढ़ता है.जीवन में सुख और आनन्द बना रहा है.पति पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध रहता है.पापी द्वादशेश होने से व्यक्ति सुख कामी होती है.सुख की चाहत में कर्म में रूचि का अभाव होता है.अन्य स्त्रियों से भी सम्बन्ध की संभावना के कारण जीवनसाथी से मधुर सम्बन्ध का अभाव होता है.
एकादश भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Eleventh house)
व्ययेश पाप ग्रह हो या शुभ ग्रह लाभेश के घर में होना शुभ फलदायक होता है.जिस व्यक्ति की कुण्डली में ऐसी स्थिति होती वह सद्चरित्र होता है.इनका व्यक्तित्व आकर्षक होता है.धन एवं सुखमय जीवन का आनन्द मिलता है.सामाजिक कार्यों मे इनका योगदान रहता है.अपने कर्मों के कारण समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं.द्वादशेश के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को व्यापार, कारोबार में अच्छी सफलता मिलती है.राजकीय क्षेत्र में भी इन्हें प्रतिष्ठित पद प्राप्त होता है.
द्वादश भाव में द्वादशेश (Dwadshes in Twelveth house)
व्ययेश अगर स्वगृही हो तो द्वादश भाव मजबूत होता है.स्वगृही व्ययेश व्यक्ति को सोच समझकर खर्च करना सिखाता है.जिनकी कुण्डली में द्वादशेश अपने घर में होता है वह व्यक्ति धनवान होता है.समाज में सम्मानित और श्रेष्ठ पद प्राप्त करता है.लोगों से बहुत अधिक मेल जोल रखना इन्हें पसंद नहीं होता.




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