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ग्रह योग का फल (Grah yogfal)
लग्न में शनि (Lagna Sani)
आपकी कुण्डली में शनि लग्न स्थान में स्थित है.शनि से सप्तम स्थान यानी सप्तम भाव में शुक्र स्थित है तो इन दोनों ग्रहों के मध्य दृष्टि सम्बन्ध के कारण पंचम भाव के फल में कमी आती है.पंचम भाव संतान का घर होता है अत: इस स्थिति में संतान के सम्बनध में कष्ट का सामना करना होता है.अगर पंचम भाव पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि पड़ रही है तो पंचम भाव पीड़ित नहीं होता है और संतान सम्बन्धी पीड़ा नही भोगना पड़ता है.
द्वितीय भाव में शनि (Sani Second house)
शनि देव अगर आपकी कुण्डली में द्वितीय भाव में विराजमान हैं तो यह संकेत है कि आपको अपने जन्म स्थान से दूर जाकर रोजगार की तलाश करनी होगी.आपका भाग्य पैतृक स्थान से दूर जागृत होगा.शनि से सम्बन्धित क्षेत्र जैसे वाहन, पेट्रोलियम, धातु का कारोबार आप करते हैं तो आपको इसमें अच्छी सफलता मिलेगी और आपकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी होगी.
शनि तुला में (Libra Sani)
आपकी कुण्डली में तुला राशि में शनि स्थित है.शनि की इस स्थिति में आप पर सरस्वती की कृपा दृष्टि है.आपका मन पढ़ाई में लगेगा और आप शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करेंगे.अपने अपने सहपाठियों एवं प्रतियोगियों से आगे रहेंगे.
द्वितीय स्थान में शुक्र (Venus Second house)
पैतृक सम्पत्ति से आपको सुख है अथवा नहीं इस संदर्भ में विशेष योग ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार आपकी कुण्डली के द्वितीय भाव में वृष अथवा तुला राशि है और शुक्र इस घर में स्थित है तो यह स्थिति बताती है कि आपको पैतृक सम्पत्ति से सुख प्राप्त होगा.
मकर राशि (Capricorn)
व्यवसाय में तरक्की के लिए मकर राशि का शुभ स्थिति में होना उत्तम फल देता है.ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार जन्मपत्री में मकर राशि में शुभ ग्रहों अथवा जिस भाव में मकर राशि हो उस भाव पर शुभ ग्रह दृष्टि डाल रहे हों तो व्यापार में कामयाबी मिलती है.इस प्रकार की ग्रह स्थिति वाले व्यक्ति व्यापार में ख्याति प्राप्त करते हैं.
केतु को पाप ग्रह के रूप में जाना जाता है.मकर राशि में केतु की स्थिति होने पर स्वास्थ्य के संदर्भ में परेशानी आती है.केतु से युत मकर राशि के कारण व्यक्ति को श्वास सम्बन्धी तकलीफ का सामना करना होता है.व्यक्ति दुबला पतला होता है.
लग्नेश और सप्तमेश (Lagnesh Saptmesh)
परिवार को चलाने की जिम्मेवारी पति पत्नी दोनों की होती है.किसी घर में पत्नी का प्रभाव अधिक होता है तो कहीं पति प्रभावशाली होता है.ज्योतिष विधा के अनुसार इसके लिए ग्रहों की स्थिति जिम्मेवार होती है.लग्न भाव का स्वामी अगर सप्तम भाव में स्थित है तो व्यक्ति पर जीवनसाथी का प्रभाव रहता है.इस स्थिति के विपरीत अगर सप्तमेश लग्न में हो तो व्यक्ति जीवनसाथी आपकी बातों को मानने वाला होता है
आपकी कुण्डली में शनि लग्न स्थान में स्थित है.शनि से सप्तम स्थान यानी सप्तम भाव में शुक्र स्थित है तो इन दोनों ग्रहों के मध्य दृष्टि सम्बन्ध के कारण पंचम भाव के फल में कमी आती है.पंचम भाव संतान का घर होता है अत: इस स्थिति में संतान के सम्बनध में कष्ट का सामना करना होता है.अगर पंचम भाव पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि पड़ रही है तो पंचम भाव पीड़ित नहीं होता है और संतान सम्बन्धी पीड़ा नही भोगना पड़ता है.
द्वितीय भाव में शनि (Sani Second house)
शनि देव अगर आपकी कुण्डली में द्वितीय भाव में विराजमान हैं तो यह संकेत है कि आपको अपने जन्म स्थान से दूर जाकर रोजगार की तलाश करनी होगी.आपका भाग्य पैतृक स्थान से दूर जागृत होगा.शनि से सम्बन्धित क्षेत्र जैसे वाहन, पेट्रोलियम, धातु का कारोबार आप करते हैं तो आपको इसमें अच्छी सफलता मिलेगी और आपकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी होगी.
शनि तुला में (Libra Sani)
आपकी कुण्डली में तुला राशि में शनि स्थित है.शनि की इस स्थिति में आप पर सरस्वती की कृपा दृष्टि है.आपका मन पढ़ाई में लगेगा और आप शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करेंगे.अपने अपने सहपाठियों एवं प्रतियोगियों से आगे रहेंगे.
द्वितीय स्थान में शुक्र (Venus Second house)
पैतृक सम्पत्ति से आपको सुख है अथवा नहीं इस संदर्भ में विशेष योग ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार आपकी कुण्डली के द्वितीय भाव में वृष अथवा तुला राशि है और शुक्र इस घर में स्थित है तो यह स्थिति बताती है कि आपको पैतृक सम्पत्ति से सुख प्राप्त होगा.
मकर राशि (Capricorn)
व्यवसाय में तरक्की के लिए मकर राशि का शुभ स्थिति में होना उत्तम फल देता है.ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार जन्मपत्री में मकर राशि में शुभ ग्रहों अथवा जिस भाव में मकर राशि हो उस भाव पर शुभ ग्रह दृष्टि डाल रहे हों तो व्यापार में कामयाबी मिलती है.इस प्रकार की ग्रह स्थिति वाले व्यक्ति व्यापार में ख्याति प्राप्त करते हैं.
केतु को पाप ग्रह के रूप में जाना जाता है.मकर राशि में केतु की स्थिति होने पर स्वास्थ्य के संदर्भ में परेशानी आती है.केतु से युत मकर राशि के कारण व्यक्ति को श्वास सम्बन्धी तकलीफ का सामना करना होता है.व्यक्ति दुबला पतला होता है.
लग्नेश और सप्तमेश (Lagnesh Saptmesh)
परिवार को चलाने की जिम्मेवारी पति पत्नी दोनों की होती है.किसी घर में पत्नी का प्रभाव अधिक होता है तो कहीं पति प्रभावशाली होता है.ज्योतिष विधा के अनुसार इसके लिए ग्रहों की स्थिति जिम्मेवार होती है.लग्न भाव का स्वामी अगर सप्तम भाव में स्थित है तो व्यक्ति पर जीवनसाथी का प्रभाव रहता है.इस स्थिति के विपरीत अगर सप्तमेश लग्न में हो तो व्यक्ति जीवनसाथी आपकी बातों को मानने वाला होता है




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Comments (3 posted):
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