वैदिक ज्योतिष
शर्मीले और संकोची होते हैं कन्या राशि के जातक। (Native of Virgo are shy and diffident)
कन्या राशि की पहचान हाथ में फूल की डाली लिये कन्या है। कन्या राशि, राशि चक्र में छठे स्थान पर आता है (Virgo is the sixth sign of zodiac)। इस राशि को दक्षिण दिशा का स्वमित्व प्राप्त है (Virgo is the king of south)।
हस्तक्षेप पसंद नहीं करते हैं सिंह राशि के जातक। (Native of Leo sing doesn't like interference)
सिंह राशि, राशि चक्र में पांचवें नम्बर पर आता है (Leo is the Fifth sign of zodiac)। इस राशि की पहचान सिंह हैं। इस राशि में अग्नि तत्व की प्रधानता रहती है। यह राशि स्थिर स्वभाव वाली होती है। इस राशि को पूर्व दिशा का स्वामित्व प्राप्त होता है। इस राशि के स्वामी सूर्यदेव हैं(Sun is the lord of Leo), इसमें कोई भी ग्रह उच्च या नीच का नहीं होता है। ...भावुक होते हैं कर्क नक्षत्र के जातक।(Native of Cancer sign known as sensitive and emotional person)
कर्क राशि राशिमंडल में चौथी राशि होती है(Fourth zodiac sign cancer)। कर्क राशि को चर राशि के नाम से जाता है। इस राशि की पहचान केकड़ा है। कर्क को उत्तर दिशा का स्वामित्व प्राप्त है (Cancer is the lord of North)। ...कला प्रेमी होते हैं मिथुन राशि के जातक। (Native of Gemini Sign known as art lover)
बारह राशि चक्र में मिथुन का स्थान तीसरा है(Gemini is the third zodiac sign) । इस राशि की गिनती पुरूष राशि में की जाती है। इस राशि की पहचान है एक साथ दो व्यक्ति। इस राशि के देवता भगवान विष्णु हैं और राशि स्वामी बुध को माना जाता है (God Vishnu is the Lord of Gemini sign)।...जीवनसाथी के प्रति वफादार होते हैं वृष राशि के जातक। (Native of Taurus sign Known as faithful life partner)
वृष् राशि को ज्योतिषशास्त्र में दूसरा स्थान प्राप्त होता है (Taurus is the second zodiac sign)। वृष को शुभ राशियों में गिना जाता है इसका चिन्ह "बैल" है। यह सौम्य राशि कही जाती है। इस राशि में जन्म लेने वाले जातक के विषय में कहा जाता है कि ये भाग्यशाली होते हैं। ...महत्वाकांक्षी होते हैं मेष लग्न के जातक। (Native of Aries Sign are very ambitious)
वैदिक ज्योतिष के अन्तर्गत कुल 12 राशियां होती है। इन राशियों में सबसे पहली राशि मेष होती है (Aries is the first sign in all zodiac sign)। इसकी पहचान मेढ़ा या भेड़ की आकृति से की जाती है। इसकी गिनती क्रूर राशियों में होती है। ...भरोसेमंद होते हैं रेवती नक्षत्र के जातक। (Native of Revti Nakshatra known as faithful & honest Person)
नक्षत्र मंडल में रेवती का स्थान 27 वां हैं (Revti is the 27th Nakshatra in the group of Constellation)। यह आखिरी नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी बुध होता है और राशि स्वामी बृहस्पति होता है (Mercury is lord of Revti Nakshatra and Jupiter is the lord of his sign)। ...हवाई किले बनाने में माहिर होते हैं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के जातक( Native of Uttra_Vadrapada Nakshatra known as dreamy Person)
नक्षत्रों को ज्योतिषशास्त्र की रीढ़ कहा जा सकता है। किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व, उसका स्वभाव एवं जीवनशैली कैसी होगी यह जन्म नक्षत्र से ज्ञात किया जा सकता है। किसी व्यक्ति का जन्म नक्षत्र वह होता है जिस नक्षत्र में जन्म के समय चन्द्रमा निवास करता है। इससे राशि का भी निर्धारण होता है क्योंकि हर नक्षत्र की अपने राशि होती है, बात करें उत्तराभाद्रपद नक्षत्र की तो इसके चारों चरण मीन राशि में होते हैं। इस राशि का स्वामी गुरू होता है व नक्षत्र स्वामी शनि होता है (Saturn is the lord of Uttra_Bhadrapada Nakshatra and Jupiter is the Lord of his sign)। जो व्यक्ति इस नक्षत्र में पैदा होते हैं उनपर इन सभी कारकों का प्रभाव होता है। आइये देखें कि इनका व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव होता है। ...परोपकारी होते हैं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के जातक। (Native of Purvabhadrapada Nakshatra are Philanthropic)
नक्षत्रों की दुनियां में पूर्वाभाद्रपद का स्थान 25वां हैं (Purvabhadrapada is the 25rd Nakshatra in the group of 27 Constellation)। इस नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति यानी गुरू होते हैं (Jupiter is the lord of Purvabhadrapada)। इस नक्षत्र का एक चरण मीन में होता है और तीन चरण कुम्भ में रहता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव व्यक्तित्व एवं उनकी जीवनशैली कैसी होती है आइये इस पर विचार करें। ...हिम्मती होते हैं, शतभिषा नक्षत्र के जातक (Native of Satvisha Nakshatra known as daring Personality)
शतभिषा नक्षत्र नक्षत्र मंडल में 24 वां नक्षत्र है (Satvisha Nakshatra is the 24th Nakshatra in the group of Constellation)। इस नक्षत्र को शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र का आकार चक्र के समान है जिसके बीच का हिस्सा ढ़का हुआ प्रतीत होता है। इस नक्षत्र का स्वामी राहु होता है। ...Featured author

