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वैदिक ज्योतिष

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ज्योतिष में अशुभ कालसर्प दोष (The Effect of Kalsarpa Dosha According to Astrology)

ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की स्थिति से बनने वाले शुभ योग हैं तो कुछ अशुभ योग भी हैं.कालसर्प दोष भी प्रमुख अशुभ योगों में से है..राहु केतु की स्थिति के अनुसार कालसर्प योग के कई प्रकार हैं.सभी कालसर्प योग अपने क्षेत्र विशेष में अशुभ परिणाम देते हैं।
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आर्थिक घाटे का एक कारण पंचम शनि (Pancham Shani Causes Financial Losses)

शनि की साढेसाती (Shani Sade Sati) व ढैया (Shani Dhaiya) के आर्थिक मामलों के लिए अच्छा नही समझा जाता है. इसके अतिरिक्त शनि की एक और स्थिति है जो आर्थिक स्थिति के सबसे अधिक प्रभावित करती है. जिसे पंचम शनि (Pancham Shani) के नाम से जाना जाता है....
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शनि की साढेसाती : चन्द्र के अनुसार सहनशक्ति का मापन (Saturn's Transit: Endurance Test Through Moon)

जन्म राशि के शनि के निकट आने पर शनि की साढेसाती आरम्भ होती है. और जन्म राशि का अर्थ है कुण्डली की वह राशि जिसमे चन्द्र स्थित है (Janma Rashi is the sign in which Moon was placed at the time of birth). इसलिए जन्मागं मे चन्द्र की स्थिति शनि की साढेसाती की अवधि के शुभ फलों मे कमी या बढोतरी के पूरी तरह से प्रभावित करती है....
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शनि की साढेसाती : सोने से कुण्दन बनने के साढेसात साल (Saturn's Sadesati : 7 1/2 Years of Endurance Test)

शनि की महादशा व्यक्ति के संघर्ष व मेहनत की आग मे तपा कर सोने से कुण्दन बनाने के समान काम करती है. चन्द्र के ज्योतषि शास्त्र मे मन व मानसिक स्थिति का कारक कहा गया है (Moon is the karak for the heart and mental status as per Jyotish). तथा शनि के जन्मों का न्याय करके कष्ट देने वाला ग्रह कहा गया है....
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कैरियर और कारकांश कुण्डली (Career & Karakamsh Kundali)

आज युवाओं के बीच सबसे अधिक चिंता का विषय आजीविका है.चिंता के इस विषय का समाधान ज्योतिष विधि से किया जाए तो मुश्किल काफी हद तक आसान हो सकती है.ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार हमारी कुण्डली में सब कुछ लिखा है बस उसे गहरी से जानने की आवश्यकता है.आइये जानें क्या कहती है कुण्डली कैरियर के बारे में....
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शनि का कन्या राशि मे प्रवेश : सिंह राशि के लिए फल विचार (Transit of Saturn into Virgo and Leo Moonsign)

कन्या राशि मे शनि के प्रवेश के साथ ही सिंह राशि के जातको के लिए साढेसाती का तीसरा चरण आरम्भ होता है (The third phase of Sadhe sati wil start for Leo Moonsign on 10th September). कन्या राशि का स्वामी बुध ग्रह शनि का मित्र है (Lord of Virgo Mercury is a friend of Saturn). शनि इस समय सिंह राशि से दूसरे घर मे रहेगा. और कन्या राशि से वह अपनी तीसरी दृ्ष्टि से चौथे घर मे स्थित वृ्श्चिक राशि को देखेगा....
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गोचर शनि के शुभ फल: (Benefic Results of Saturn's Transits)

शनि कुण्डली के सभी ग्रहो मे सबसे अधिक मन्द गति से चलता है (Saturn is the slowest planet in the kundali in Vedic astrology). शनि एक ही राशि मे लगभग ढाई वर्ष रहता है. इसलिए सभी शुभ व महत्वपूर्ण घटनाऔ के घटित होने का समय निकालते समय शनि के गोचर पर विशेष ध्यान दिया जाता है. ...
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शनि का कन्या राशि मे प्रवेश : कितना शुभ कितना अशुभ (Saturn's Transit into Virgo)

शनि 10 सितम्बर 09 को अपनी राशि बदल रहे है. इस समय मे शनि कन्या राशि (Shani Gochar in Kanya Rashi) मे प्रवेश करेगे. तथा जिसके फलस्वरुप तुला राशि की साढेसाती (Shani Sade Sati for Tula Rashi) आरम्भ हो जायेगी. यह समय तुला राशि के व्यक्तियों के लिए भरपूर मेहनत कर लाभ पाने का रहेगा. तुला राशि मे चढती साढेसाती रहेगी. आने वाले पूरे पांच साल तुला राशि के लिए अच्छे रहेगे....
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गोचर फल (Predictions for Transit of Planets)

सभी ग्रह चलायमान हैं.सभी ग्रहों की अपनी रफ्तार है कोई ग्रह तेज चलने वाला है तो कोई मंद गति से चलता है.ग्रहों की इसी गति को गोचर कहते हैं (The movement of planets through the zodiac is called transit).ग्रहों का गोचर ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है.ग्रहों के गोचर के आधार पर ही ज्योतिष विधि से फल का विश्लेषण किया जाता है....
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ज्योतिष में संतान योग (Progeny Related Combinations in Vedic Astrology)

गृहस्थ जीवन में संतान सुख की कामना सभी विवाहित स्त्री पुरूष करते हैं.संतान सुख आपको मिलेगा या नहीं यह सब आपकी कुण्डली में स्थित ग्रह निर्धारित करते हैं.किसी की कुण्डली में ग्रहों की ऐसी स्थिति होती है जो उन्हें कई संतानों का सुख देती है. देखिये क्या कहती है आपकी कुण्डली संतान प्राप्ति के संदर्भ में. ...
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शकट योग का संकट (The Peril of Shakat Yoga)

जैसे कुण्डली मे उपस्थित शुभ योग के परिणामस्वरूप शुभ फल की प्राप्ति होती है उसी प्रकार कुण्डली में अशुभ योग होने पर व्यक्ति को उसका अशुभ परिणाम भी भोगना पड़ता है (Malefic yogas yield inauspicious results for the native).अशुभ योगों में से एक है "शकट योग" (Shakat yoga is a malefic yoga)....
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राहु महादशा में कालसर्प दोष (Kalsarpa Dosha in Rahu Mahadasha)

काल सर्प दोष को ज्योतिषशास्त्र में साढ़े साती की तरह महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है (The Kalsarpa Yoga is considered as malefic as the Sadesati).यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है वह राहु की दशा में आसमान की बुलंदियों को छूता है तो राहु की अशुभ दशा में दु:ख एवं कष्ट भोगता है....

स्वाति नाडी मुहूर्त (Swati Nadi Muhurtha)

स्वाति नाडी (Swati Nadi)...

मघा नाडी मुहूर्त (Magha Nadi Muhurtha)

मघा नाडी रविवार के दिन मुहुर्त समय में प्रतियोगियों को परास्त करने का कार्य किया जा सकता है. इस समय में मुहूर्त का सहयोग व्यक्ति ...

कृतिका नाडी मुहूर्त (Kritika Nadi Muhurtha)

कृतिका  नाडी मुहूर्त (Kritika Nadi Muhurtha)) रविवार समय में ग्रह प्रवेश नहीं करना चाहिए. अन्यथा घर में अशान्ति रहने की संभावना बनती है. इस नाडी ...
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आपके ग्रह आपका व्यवसाय (The planets & Your Business or Career)

ज्योतिष की ज्ञान गंगा बृहद जातक के अनुसार लग्न अथवा चन्द्र से दशम भाव में क्रमश: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र अथवा शनि हों तो क्रमश: पिता, माता, शत्रु, मित्र, बडे भाई, पत्नी अथवा नौकरों के द्वारा आय की प्राप्ति होती है. ...

हस्त नाडी मुहूर्त (Hast Nadi Muhurtha)

हस्त नाडी  (Hast Nadi) अवधि में रविवार के दिन बातचीत के जरिये काम पूरे होते है. इसलिये हस्त नाडी मुहूर्त (Hast Nadi Muhurtha) के इस ...

उत्तरा भाद्रपद नाडी मुहूर्त (Uttara Bhadrapada Nadi Muhurtha)

उत्तरा भाद्रपद नाडी मुहूर्त (Uttara Bhadrapada Nadi Muhurtha) रविवार के दिन दवाई आरम्भ करने पर रोगी को स्वास्थय लाभ प्राप्त होता है (Start medicinal treatment ...

पुनर्वसु नाडी मुहूर्त (Punarvasu Nadi Muhurtha)

पुनर्वसु नाडी मुहूर्त (Punarvasu Nadi Muhurtha) रविवार के दिन देवी-देवताओं की प्रतिमा की प्रतिष्ठा करने का कार्य करना चाहिए (establishment of deities in this Nadi ...

रोहिणी नाडी मुहूर्त (Rohini Nadi Muhurtha)

रविवार के दिन रोहिणी नाडी (Rohini Nadi) में घर निर्माण का कार्य आरम्भ किया जा सकता है(He can start house construction in this Nadi Muhurtha ...

ज्येष्ठा नाडी मुहुर्त (Jyeshtha Nadi Muhurtha)

ज्येष्ठा नाडी  (Jyeshtha Nadi) समय में रविवार के दिन मुहूर्त कार्य करने पर कलह होने कि संभावनाएं बनती है. सोमवार के दिन की ज्येष्ठा समय ...
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गोचर में राहु का फल (The Results For Rahu's Transit Through 12 Signs)

आकाशीय ग्रहों में राहु केतु का अस्तित्व भले ही नहीं हो परंतु ज्योतिषशास्त्र में अन्य ग्रहों की तरह इसे भी प्रमुखता दी गई है। राहु केतु आभासीय ग्रह (Rahu and Ketu are non-physical planets) हैं जो किसी भी व्यक्ति की जन्म पत्रिका में बैठकर भावानुसार फल प्रदान करते हैं। जन्म समय में गोचर में राहु की स्थिति का व्यक्ति पर काफी प्रभाव पड़ता है (Rahu's transit has a strong impact on a person)। ...
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मंगल लाल किताब में (Mars in Lal Kitab)

लाल रंग का प्रभावशाली और ओजस्वी ग्रह है मंगल.मंगल को उसके पराक्रम के कारण देवताओं का सेनापति भी कहा गया है....
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विभिन्न भावों में गुरू का प्रभाव- Impact of Jupiter in different Houses

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बृहस्पति अति प्रभावशाली और शुभ ग्रह है. यह ज्ञान का कारक ग्रह है. यह विद्या, बुद्धि, ज्ञान, विवाह, धन एवं विभिन्न विषयों पर अपना महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है. गोचर में गुरू के विभिन्न भावों से गुजरने पर व्यक्ति को अलग अलग परिणाम प्राप्त होता है. ...
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गोचर में शनि (Transits of Saturn)

जन्म पत्रिका के 12 भावो में आकाशीय ग्रहों को जन्म लग्न के अनुसार स्थान दिया जाता है। व्यक्ति के जन्म के पश्चात ग्रह जिस प्रकार से जन्म पत्रिका के चक्र में घूमते हैं उसे ग्रहो का गोचर कहा जाता है। ...
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लग्नस्थ ग्रहों का प्रभाव मीन लग्न में (Predictions for Planets Placed in Pisces Ascendant)

मीन लग्न का स्वामी गुरू होता है. इस लग्न में चन्द्र, मंगल और गुरू कारक ग्रह होते हैं. सूर्य, बुध, शुक्र एवं शनि इस लग्न में अकारक ग्रह बनकर मंदा फल देते हैं....
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कुम्भ लग्न में लग्नस्थ ग्रह (Planets placed in Aquarius ascendant)

कुम्भ लग्न का स्वामी शनि है. इस लग्न में सूर्य, शुक्र एवं शनि शुभ कारक ग्रह होते हैं. चन्द्रमा, मंगल, बुध एवं गुरू अशुभ और अकारक ग्रह होते हैं....
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मिथुन लग्न में नवग्रह का प्रभाव (Planets in Gemini Lagna)

राशि चक्र की तीसरी राशि मिथुन है.आपकी कुण्डली के लग्न भाव में यह राशि है तो आपका लग्न मिथुन कहलता है.आपके लग्न के साथ प्रथम भाव में जो भी ग्रह बैठता है वह आपके लग्न को प्रभावित करता है.आपके जीवन में जो कुछ भी हो रहा है वह कहीं लग्न में बैठे हुए ग्रहों का प्रभाव तो नहीं है।...
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कन्या लग्न में नवग्रहों का फल (Interpretation for placement of planets in Virgo Ascendant)

बुध कन्या राशि का स्वामी है. इस लग्न में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान, विवेकशील और व्यवसाय में निपुण होता है. इस लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे कल्पनाशील और कोमल हृदय के होते हैं. इस लग्न में लग्नस्थ ग्रह का फल अलग अलग होता है जैसे...
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