वैदिक ज्योतिष
ज्येष्ठा नक्षत्र के जातक का व्यक्तित्व (Personality of Native in Jyestha Nakshatra)
ज्येष्ठा नक्षत्र को अशुभ नक्षत्रों की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि यह गण्डमूल नक्षत्रों में शुमार किया जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी बुध को माना जाता है और इसकी राशि वृश्चिक होती है। मंगल इस राशि का स्वामी होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर उपरोक्त स्थिति का क्या प्रभाव होता है और इससे व्यक्ति के स्वभाव एवं व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव होता है आइये इसे समझते हैं।
अनुराधा नक्षत्र के जातक अनुभवी एवं सिद्धांतवादी होते हैं। (The Native of Anuradha Nakshatra are Experienced and Ideological)
अनुराधा नक्षत्र को नक्षत्र मंडल में 17वां स्थान प्राप्त है। इसे शुभ नक्षत्र के रूप में शुमार किया जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। और इस नक्षत्र की राशि वृश्चिक है और इस राशि का स्वामी मंगल कहलता है। इस नक्षत्र के स्वामी और राशि के स्वामी में वैर भाव होता है। इस स्थिति का जातक पर क्या प्रभाव होता है और उसका व्यक्तित्व एवं स्वभाव कैसा होता है आइये इसे देखें:...सोलहवां नक्षत्र है विशाखा नक्षत्र (Vishakha Nakshatra is the 16th Nakshatra)
विशाखा नक्षत्र को नक्षत्र मंडल में 16 वां स्थान प्राप्त है। इस नक्षत्र को त्रिपाद नक्षत्र कहते हैं क्योंकि इसके तीन चरण तुला राशि में होते हैं और अंतिम चरण वृश्चिक में। इसका रंग सुनहरा होता है।...स्वाति नक्षत्र के जातक मोती के समान चमकते हैं (The Native of Swati Nakshatra are shining like a pearl)
स्वाति नक्षत्र का स्वरूप मोती के समान है (Swati nakshtra looks like a pearl)। इसे शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। इस नक्षत्र के विषय में मान्यता है कि, इस नक्षत्र के दौरान जब वर्षा की बूंदें मोती के मुख में पड़ती है तब सच्चा मोती बनता है, बांस में इसकी बूंदे पड़े तो---------...खुशहाल और सुखमय जीवन जीते हैं चित्रा नक्षत्र के जातक! (Native of Chitra Nakshatra Enjoy happy and Prosperous life)
चित्रा नक्षत्र की गिनती शुभ नक्षत्रों में की जाती है। आकाशमंडल में इस नक्षत्र का स्थान चौदहवां है( Chitra is the fourteenth Nakshatra)। इस नक्षत्र का स्वमी मंगल ग्रह होता है(Lord of chitra is Mars)। इस नक्षत्र के दो चरण कन्या राशि में होते हैं और दो तुला राशि में। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस नक्षत्र का रंग काला होता है। ...अपनी बुद्धि से बनते हैं धनवान हस्त नक्षत्र के जातक (Hasta Nakshatra natives get rich by their inteligence)
भमंडल में विचरण करने वाले नक्षत्रों में हस्त नक्षत्र (Hasta Nakshatra ) का स्थान तेरहवां है। इस नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है। और इस नक्षत्र की राशि कन्या है। ज्योतिषशास्त्र कहता है जो व्यक्ति जिस नक्षत्र में जन्म लेता है उस पर जीवन भर उस नक्षत्र और उस नक्षत्र की राशि का प्रभाव रहता है। ज्योतिष के इस सिद्धांत पर और भी जानकारी लेते हैं और देखते हैं कि हस्त नक्षत्र (Hast Nakshatra ) में पैदा लेने वाले व्यक्ति पर इस नक्षत्र और राशि का क्या प्रभाव होता है। ...पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के जातक (Native of Purvafalguni Nakshatra)
नक्षत्रमंडल में मौजूद 27 नक्षत्रों में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र ग्यारहवां है(Purvaphalguni is Eleventh Nakshatra of constellation)। इसे सुअक्षि नक्षत्र भी कहा जाता है, इस नक्षत्र का रंग हल्का कत्थई होता है। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी शुक्र होता है (Venus is the lord of Pruvapalguni Nakshatra )। यह सिंह राशि का नक्षत्र कहलता है (Purvafalguni Nakshatra is related to Zodiac sign Leo)। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के बारे में ज्योतिषशास्त्र क्या कहता है आइये इसे देखें। ...मघा नक्षत्र के जातक का व्यक्तित्व (Know the Personality of Magha Nakshatra's Native)
नक्षत्र मंडल में मघा नक्षत्र गिनती में दसवें स्थान पर आता है (magha nakshatra is tenth nakshatra of Constellation group)। मघा नक्षत्र को भी गण्डमूल नक्षत्र की श्रेणी में रखा गया है। मघा नक्षत्र का स्वामी केतु को माना जाता है (Ketu is the lord of Magha Nakshatra)। इस नक्षत्र के चारों पद सिंह राशि में आते हैं इसलिए सूर्य का प्रभाव भी इस नक्षत्र के जातक पर रहता है क्योंकि राशि का स्वामी सूर्य होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर नक्षत्र का क्या प्रभाव रहता है और इस प्रभाव के कारण व्यक्ति का स्वभाव, व्यक्तित्व और व्यवहार कैसा होता है आइये देखें:...आश्लेषा नक्षत्र के जातक (Native of Ashlesha Nakshatra)
नक्षत्रों की गणना के क्रम में आश्लेषा नक्षत्र नवम स्थान पर आता है(Aslesha is the ninth nakshatra)। यह नक्षत्र कर्क राशि के अन्तर्गत आता है (Aslesha Nakshatra is related to cancer)। इस नक्षत्र का स्वामी बुध होता है(Mercury is the lord of Aslesha Nakshatra)। इस नक्षत्र को अशुभ नक्षत्र की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि यह गण्डमूल नक्षत्र के अन्तर्गत आता है। इस नक्षत्र में पैदा लेने वाले व्यक्ति गण्डमूल नक्षत्र से प्रभावित होते हैं। ...पुष्य नक्षत्र के जातक परिपक्व होते हैं (Native of Pushya Nakshatra are Mature)
आकाश में विचरने वाले नक्षत्र जिनकी कुल संख्या 27 होती है (Nakshatras are twenty seven)। ये किसी न किसी रूप में हमारे जीवन पर अपना प्रभाव रखते है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार गोचर में नक्षत्र भ्रमण करते हैं और यह क्रम अनवरत रूप से चलता रहता है। इस क्रम में हमारे जन्म के समय जो नक्षत्र मौजूद होता है उसका प्रभाव हमारे जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक बना रहता है। बात करें पुष्य नक्षत्र की तो यह नक्षत्रों की गणना में आठवें स्थान पर आता है(Pushya is eighth Nakshatra in constellation)।...Log in




