वैदिक ज्योतिष
मिलनसार एवं कोमल हृदय के होते हैं पुनर्वसु के जातक(Native of Punarvashu Nakshatra are Soft hearted & affable)
पुनर्वसु नक्षत्र को सातवां नक्षत्र माना जाता है(Punarvashu is seventh Nakshatra in constellation)। इस नक्षत्र के चारों चरणों में मिथुन राशि होता है। इस नक्षत्र का स्वामी गुरू को माना जाता है (Jupiter is the lord of Punarvashu Nakshartra)। देवमाता अदिति इस नक्षत्र की देवी मानी जाती हैं। बाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम का जन्म इसी नक्षत्र में हुआ था (Lord Rama was born in Punarvashu Nakshatra)।
राजनीति में पारंगत होते हैं आर्दा नक्षत्र के जातक (Native of Ardra Nakshatra are Expert in Politics)
नभमंडल में विराजमान नक्षत्रों में आर्द्रा का स्थान छठा है (Ardra is sixth Nakshatra of constellation) । ज्योतिषशास्त्री कहते हैं ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार जिस जातक का जन्म जिस नक्षत्र में होता है, उस नक्षत्र के स्वामी का प्रभाव उसके जीवन, उसके व्यवहार और स्वभाव पर देखा जाता है। आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु को माना जाता है (Rahu is the ruler of Ardara Nakshatra) ।...बहादुर होते हैं मृगशिरा नक्षत्र के जातक (Native of Mrigashira Nakshatras are brave)
वैदिक ज्योतिष में मूल रूप से 27 नक्षत्रों का जिक्र किया गया है। नक्षत्रों के गणना क्रम में मृगशिरा नक्षत्र का स्थान पांचवां है (Mrigashira is the fifth Nakshatra of constellation)। इस नक्षत्र पर मंगल का प्रभाव रहता है क्योंकि इस नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है (Mars is Lord of Mrigasira Nakshatra)। ...भावुक और संवदेनशील होते हैं रोहिणी नक्षत्र के जातक (Native of Rohini Nakshatra are Emotional and Sensitive)
हम सभी जानते हैं कि नक्षत्रों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होता है। नक्षत्रों के प्रभाव से हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व और हमारी जीवन शैली प्रभावित होती है। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि हमारे जन्म के समय जो नक्षत्र होता है अर्थात जिस नक्षत्र में हमारा जन्म होता है उस नक्षत्र का हमारे व्यक्तित्व, व्यवहार एवं आचार विचार पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है (The Nakshatra we are born in, has an impact on our life)...पहली नज़र के प्यार पर नहीं करते ऐतबार कृतिका नक्षत्र के जातक (Native of Kritika Nakshatra dosen't believe in love at first sight)
ज्योतिषशास्त्र में नक्षत्रों को काफी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है (Nakshatras are very important in Astrology)। जब भी किसी व्यक्ति के जीवन के सम्बन्ध में कोई भविष्यवाणी करनी होती है तब ग्रह स्थिति, राशि आदि के साथ नक्षत्रों का भी आंकलन किया जाता है। नक्षत्र न केवल भविष्य को दर्शाते हैं वरन इंसान के व्यक्तित्व को भी उजागर करते है (Nakshatra not only predict they also reveal the nature of their native)।...अश्विनी नक्षत्र का व्यक्तित्व पर प्रभाव(Ashwani Nakshatra)
ज्योतिषशास्त्र के अन्तर्गत बताया गया है कि नक्षत्रों की कुल संख्या 27 है विशेष परिस्थिति में अभिजीत को लेकर इनकी संख्या 28 हो जाती है (Nakshatras are 27. In special condition they are 28 including Abhijeet Nakshatra.)।...भरणी नक्षत्र के जातक का व्यक्तित्व(Effect of Bharani Nakshatras on Person Personality)
जैसा कि हम जानते हैं हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व राशि, ग्रह, लग्न, नक्षत्र आदि से प्रभावित होता। इन सभी के प्रभाव से(We are usualy knows that our whol Personality depend on Rashi,Planets,Ascendent and Nakshatras) हमारा व्यक्तित्व निर्मित होता है। यहां हम बात करते हैं कि भिन्न भिन्न नक्षत्रों द्वारा हमारा व्यक्तित्व कैसे निर्घारित होता है। "व्यक्तित्व और नक्षत्र की कड़ी" में हम गणना क्रम में दूसरे स्थान पर विराजमान भरणी नक्षत्र के विषय में आइये बात करें। ...अश्विनी नक्षत्र का व्यक्तित्व पर प्रभाव(Ashvini Nakshatras effect on Personality)
ज्योतिषशास्त्र के अन्तर्गत बताया गया है कि नक्षत्रों की कुल संख्या 27 है विशेष परिस्थिति में अभिजीत को लेकर इनकी संख्या 28 हो जाती है। गोचरवश नक्षत्र दिवस परिवर्तित होता रहता है। ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार हर नक्षत्र का अपना प्रभाव होता है(As per aspects of Astrology each nakshatras have it own Effects) । जिस नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म होता है उसके अनुरूप उसका व्यक्तित्व, व्यवहार और आचरण होता है। नक्षत्रों में सबसे पहला अश्विनी होता है(Ashvini is the first Nakshatras), इस नक्षत्र में जिनका जन्म होता है वे कैसे होते हैं आइये इसे जानें: ...रात और दिन का व्यक्तित्व पर प्रभाव (Effects of day and night on our personality)
एक दिन में 24 घंटे होते हैं और इन 24 घंटों में घड़ी की सूई रात और दिन का सफर तय करती है। आमतौर पर देखा जाय तो रात और दिन में मुख्य अंतर यह होता है कि दिन के वक्त सूर्य देव अपनी किरणों के साथ धरती को अपने तेज से रौशन करते हैं और रात्रि के वक्त चन्द्रमा की झिलमिलाती रोशनी अंधेरे में उम्मीद की लौ लिये नई सुबह और नई आशाओं का संदेश देती है। यह तो रही आम बातें, लेकिन ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार देखें तो दिन और रात हमारे स्वभाव और प्रकृति पर भी प्रभाव डालते हैं। आप जानना चाहेंगे कैसे तो, आइये देखें.....। ...वारों का स्वभाव पर प्रभाव (Nature effect with Day)
सप्ताह में कुल सात दिन या सात वार होते हैं। हम सभी लोगों का जन्म इन सातों वारों में से किसी एक वार को हुआ है। ज्योतिषशास्त्री कहते हैं, वार का हमारे व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है (Our nature is effected from birthday)। हमारा जन्म जिस वार में होता है उस वार के प्रभाव से हमारा व्यवहार और चरित्र भी प्रभावित होता है। आइये देखें कि किस वार में जन्म लेने पर व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है। ...Log in




