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वैदिक ज्योतिष

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योगफल(Yogaphala)

व्यक्ति के स्वभाव की जब हम बात करते हैं तब हम सिर्फ उसके बाहरी व्यक्तित्व को देखते हैं। वास्तव में व्यक्तित्व और स्वभाव के निर्माण में कई तत्वों का योगदान रहता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव का निर्माण जन्म तिथि, वार, करण, राशि व योगों द्वारा होता है(According to the Astrology nature of person depends on the Birth Date, Day, Abstraction, Rashi and yoga)। अगर आप किसी के स्वभाव को अच्छा कहते हैं तो वास्तव में यह जानना चाहिए कि उस व्यक्ति का जन्म उस समय में हुआ था जिस समय उपरोक्त चीजों का सुन्दर समन्वय था। हम यहां योग से व्यक्ति के स्वभाव पर पड़ने वाले प्रभाव की बात कर रहे हैं तो आइये देखें कि किस योग में जन्म लेने से व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है।
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व्यक्ति के चरित्र और स्वभाव पर जन्मतिथि का प्रभाव पार्ट-1 (impact of birth date part-1 )

प्रतिपदा(pratipda) से लेकर अमावस(Amavas) तक तिथियों का एक चक्र होता है जैसे अंग्रेजी तिथि में 1 से 30 या 31 तारीख का चक्र होता है। ज्योतिषशास्त्र में सभी तिथियों का अपना महत्व है(As per Aistrology all dates have own Importance)। सभी तिथि अपने आप में विशिष्ट होती है। हमारे स्वभाव और व्यवहार पर तिथियों का काफी प्रभाव पड़ता है ऐसा ज्योतिषशास्त्री मानते हैं। हमारा जन्म जिस तिथि में होता है उसके अनुसार हमारा स्वभाव होता है(Our nature according to our Date of Birth)। आइये तिथिवार व्यक्ति के स्वभाव के विषय में जानकारी प्राप्त करें। ...
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जन्म पक्ष का व्यक्तित्व पर प्रभाव (Impact of Janma paksha on personality)

रोजमर्रा की जिन्दग़ी में हम कई लोगों से मिलते हैं और पाते हैं कि हर दूसरे व्यक्ति के स्वाभाव में कुछ न कुछ अंतर होता है। स्वभाव में अंतर कई कारणों से हो सकता है जैसे परिवेश, जीवन शैली आदि। अगर हम ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो व्यक्ति के स्वभाव में अंतर उनकी कुण्डली में स्थित ग्रह(Man Nature are different according to Palnet situated in Kundli), राशि और नक्षत्र (Nakshatra and Rashi) से होता है । ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कि स्वभाव में अंतर का कारण जन्म पक्ष भी होता है। व्यक्ति का जन्म जिस पक्ष में होता है उसके अनुसार व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन देखा जाता है। ...
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ज्योतिष की विभिन्न शाखाएं ( VARIOUS BRANCHES OF JYOTISH)

ज्योतिष का अर्थ होता है ज्योति दिखाना अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना. अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली यह विद्या अत्यंत गूढ़ और रहस्यमयी है. इस विद्या को पराविद्या भी कह सकते हैं क्योंकि यह इस लोक से परलोक तक की जानकारी प्रदान करने वाली एवं भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों पर प्रकाश डालने वाली विद्या है.हम आप जब इस धरती पर जन्म लेते है तब अपने साथ अपनी किस्मत और अपना भाग्य लेकर पैदा होते हैं विधाता पटकथा लेखक की तरह हमारे जीवन रूपी नाटक का हर दृश्य लिखकर हमें दुनियां में अपना चरित्र निभाने हेतु भेज देता है. ...
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ग्रहो की युति का प्रभाव (The impact of planetary conjunction)

जब किसी दर्शक तथा शरीर (ग्रह) के मध्य कोई दूसरा भारी शरीर (ग्रह) आ जाता है तो उस भारी वस्तु के कारण पहले वाली बस्तु (ग्रह) का प्रकाश दर्शक (व्यक्ति) तक नही पहुँच पाता तो उसे ग्रहण (eclipse) लग गया है, ऎसा खगोल बिज्ञान में कहा जाता है. ...
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अस्त भावस्वामी का फलादेश (The result of combust house lord)

कुण्डली और गोचर में जब ग्रह अस्त होता (Planetary combustion in the transit or in the chart) है तो उसका क्या परिणाम होता हे इसी को प्रत्येक भावानुसार दर्शाया गया है. ...
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पंचाग के अंग - करण (Part Of Panchang-Karan)

करण तिथि (Karan Tithi) का आधा भाग होता है. तिथि के पूर्वार्द्ध (Purvardha) अर्थात पहले आधे भाग में एक करण....
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पंचाग के अंग - नक्षत्र (Part Of Panchang- Nakshatra)

ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र(27 Nakshatras) मान्य है. 360º के भचक्र को समान 27 भागों में विभाजित करने पर प्रत्येक भाग का मान 13º-20' आता है. एक नक्षत्र सामान्यतय 24 घंटो तक रहता है. परन्तु कभी-कभी 13º-20' पार करने में नक्षत्र कम या अधिक समय भी ले लेता है. चन्द्रमा को जो समय 13º-20' पार करने में लगता है उसे नक्षत्र कहते हैं. सवा दो नक्षत्रो की एक चन्द्र राशी (One Moon Rashi of Nakshatra) होती है. ...
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पंचाग के अंग - योग (Part Of Panchang And Yog)

जब सूर्य और चन्द्रमा की गति में 13º-20' का अन्तर पड्ता है तो एक योग (Yog) होता है. योग संख्या (Yog Sankshya) में कुल (Kula) 27 होते हैं आकाश की स्थिति(Position Of Akash) से इन योगो का कोइ सम्बन्ध नहीं है. वैसे भी योगो की आवश्यकता यात्रा, मुहुर्त इत्यादि प्रकरण (Prakarana) में पडती है. ...
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पंचाग के अंग - तिथि (Part Of Panchang And Tithi)

पाँच अंगो के मिलने से पंचाग बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं:- ...
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