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षड्बल में काल बल भाग-2 (Kala bala In Shad bala part-2)

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षड्बल के अन्तर्गत अबतक आपने काल बल के पहले भाग में नतोन्नत बल, पक्षबल और त्रि-भाग बल के विषय में आप जान चकु हैं। षड्बल के अन्तर्गत काल बल के दूसरे भाग में प्रस्तुत है वर्ष मास दिन होरा, आयन और युद्ध बल।

इन बलों के विषय में आप यहां विस्तार से जान सकते हैं और इस बात की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि इनकी गणना किस प्रकार से की जाती है।  

वर्ष मास दिन होरा बल (Varsha-Masa-Dina-Hora Bala)
वर्ष मास दिन होरा इन चारों से मिलकर बनने के कारण इस बल का नाम वर्ष-मास-दिन-होरा बल दिया गया है(Varsh-Mass-Din-Hora Bala is comprised of Varsh,Mass,Din and hora)। इसका पूर्णाक 60 15, 30, 45, 60 के क्रमश से बनता है।

वर्ष बल (Varsh Bala):
यहां वर्ष से तात्पर्य सम्वतसर यानी सौर वर्ष से है (The Varsha mentioned here is the solar year or the samvatsara)। सौर वर्ष की शुरूआत जब होती है उस समय पहली राशि यानी मेष से जिस दिन सूर्य गुजरता है उस दिन का जो स्वामी ग्रह होता है वह वर्ष का स्वामी माना जाता है, वर्ष के स्वामी ग्रह को कुल 15 स्कोर मिलते हैं (Lord of Varsh get 15 points)। अन्य को 0 प्राप्त होता है।

मास बल(Maasa Bala):
मास बाल का आंकलन भी कुल मिलाकर वर्ष बल के समान ही होता है। मास बल में वह ग्रह बलवान होता है जिस ग्रह का स्वामी मास के पहले दिन वर्तमान होता है। मास के पहले दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है उसके मास बल को 30 स्कोर प्राप्त होता है (Person who is born  during first day of massa, his massa bala gets total 30 score)।

वार बल:(Var Bala) :
जिस दिन व्यक्ति का जन्म होता उस वार का स्वामी ग्रह 45 स्कोर प्राप्त करता है (The day in Which a person takes birth, lord of the day get full score 45)।

होरा बल(Hora Bala):
हम सभी जानते हैं कि दिन को 24 घंटों में विभाजित किया गया है। एक होरा लगभग एक घंटे का होता है, होरा की कुल संख्या 24 होती। परिभाषा के तौर पर कहें तो होरा का मतलब ग्रहों की अवधि होती है (Hora means planetary hour)। प्रत्येक होरा का स्वामी एक ग्रह होता है। होरा सात ग्रहों द्वारा अर्थात सूर्य से शनि तक के ग्रहों द्वारा शासित होते हैं (Sun to Saturn every planet is the lord of Hora)। दिन के पहले होरा का जो स्वामी ग्रह होता है वह पूरे दिन का स्वामी होता है। उदाहरण से देखें तो सोमवार का पहला होरा चन्द्रमा होगा इसी प्रकार सप्ताह के अगले दिल का पहला होरा मंगल होगा फिर बुध और यह क्रम चलता रहेगा। यहा ध्यान देने वाली बात यह है कि भूमध्य रेखा से जैसे जैसे हम दूर होते जाते हैं दिन और रात की दूरी बढ़ती जाती है इसलिए रात और दिन के होरा की लम्बाई में अंतर आ जाता है। ज्योतिष नियमानुसार जिस होरा में व्यक्ति का जन्म होता है उस होरा को कुल 60 स्कोर प्राप्त होते हैं (As per the rule of Astrology, in which hora person take birth, that hora gets full 60 points.)।

आयन बल (Ayana Bala):
ग्रहों का आयन बल भूमध्य रेखा से ग्रहों के क्रान्ति  (Declination) के आधार पर देखा जाता है। अगर कोई ग्रह 0 डिग्री क्रान्ति पर है तो स्वत: ही उसमें 30 आयन बल जुट जाएगा। उत्तरी आयन हमेशा दक्षणी आयन से बलशाली होगा यही कारण है कि शुक्र, सूर्य और बृहस्पति जब उत्तरी क्रांति पर होते हैं तब उनके अंक में दक्षिणी आयन से घटाकर उतने ही अंक जोड़ दिये जाते हैं।
आयन बल ज्ञात करने का एक आसन सा तरीका है जिसे आप यहां देख सकते हैं।

आयन बल  =60x (230 27' ± क्रान्ति) / (46054') = (230 27' ± क्रान्ति) x 1.2793.
आयन बल ज्ञात करते समय यह ध्यान रखें कि जब सूर्य का आयन बल ज्ञात करने हो तब इस नियम से जो भी परिणाम आये उसमें 2 से गुणा कर दें।

युद्ध बल (Yudhdha Bala):
ग्रहों के बल का आंकलन करने के लिए काल बल के अन्तर्गत एक बल आता है युद्ध बल। युद्ध बल से तात्पर्य हैं ग्रहों के बीच आपसी टकराव में लगने वाला बल, यही कारण है कि इस बल में केवल उन ग्रहों का विचार किया जाता है जिनके बीच संघर्ष होता है। इस बल के आंकलन के लिए सबसे पहले दोनों विरोधी ग्रहों का कुल स्थान बल निकाला जाता है फिर दिग्बल और काल बल सहित होरा तक आंकलन किया जाता है (For assessment of Yudhha Bala we Should first calculate Sthana bala of apponent planets then calculate Digbala, Kala bala and hora) । दोनों ग्रहों के बीच जो भी मान सामने आता है उन्हें आपस में घटाया जाता है। इस घटाव से जो अंक सामने आता वह युद्ध बल कहलाता है। इस अंक को जीतने वाले ग्रह में बोनस के तौर पर जोड़ दिया जाता है और उतना ही हारने वाले ग्रह से कम किया जाता है इस तरह युद्ध बल ज्ञात किया जाता है। 

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