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शड्बल में कालबल से ग्रहों की शक्ति का आंकलन (Assessment of Planetary Strength as per Kaala Bala)
ज्योतिषशास्त्र में फलित ज्योतिष के समान ही गणित ज्योतिष का भी अपना महत्व है (In Astrology, Mathemetics Astrology is as important as Predictive Astrology)। गणितिय ज्योतिष के आधार पर ही ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों एवं नक्षत्रों की स्थिति का आंकलन किया जाता है और फलादेश किया जाता है। गणितीय ज्योतिष परआधारित काल बल के विषय में आइये चर्चा को आगे बढ़ायें।
काल बल का मतलब समय की शक्ति है (Kala bala is the Strength due to Time)। काल बल को स्पष्ट करने के लिए कह सकते हैं कि काल बल ग्रहों की स्थाई शक्ति है जो जन्म के समय ग्रहों को विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होता है। काल बल के 6 उप भाग होते हैं जिनसे मिलकर कालबल का निर्माण होता है (Kalbala is divided in six sub parts)। काल बल के 6 उप भाग क्रमश: इस प्रकार हैं नतउन्नत बल, पक्षबल, त्रि-भाग बल, वर्ष-मास-दिन-बल, युद्ध बल और आयन बल। यहां काल बल के पहले भाग में प्रथम तीन अंगों का उल्लेख किया जा रहा है।
1.नतोन्नत बल (Nathonatha Bala):
नतोन्नत बल के अन्तर्गत चन्द्र, शनि और मंगल अर्घरात्रि के समय शक्तिशाली होते हैं जबकि दोपहर के समय ये शक्तिहीन होते हैं (In Nathonatha Bala Moon, Saturn and Mars are Stronger during Midnight and powerless in Midday)। सूर्य, बृहस्पति और शुक्र दोपहर के समय शक्तिशाली होते हैं और अर्धरात्रि के समय ये कमज़ोर हो जाते हैं। काल बल में बुध हमेशा ही बलशाली होता है यानी इसमें बुध के पास हमेशा 60 अंक होते है (Mercury always gets 60 points in Nathonatha Bala)। सूर्य, चन्द्र और मंगल के पास 60 अंक तब होते है जबकि व्यक्ति आधी रात में जन्म लेता है। शून्य अंक तब मिलता है जबकि व्यक्ति का जन्म दोपहर में होता है। सूर्य, बृहस्पति और शुक्र 60 अंक तब प्राप्त करते हैं जब व्यक्ति का जन्म दोपहर में होता है और शून्य अंक तब पाते हैं जबकि व्यक्ति का जन्म मध्यरात्रि में होता है।
पक्ष बल (Paksha Bala)
पक्ष बल जन्म के समय चन्द्र की स्थिति पर निर्भर करता है (Paksha Bala is related to Lunar phase at the time of birth)। महीने में दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। एक पक्ष कुल 15 दिनों का होता है। क्षबल के सिद्धान्त के अनुसार शुभ ग्रह शुक्ल पक्ष के दौरान बलशाली होते हैं (As per Paksha rula benefic planets are stronger during Sukla paksha and malefic in Krishna paksha)। बृहस्पति, शुक्र और चन्द्र का शुक्ल पक्ष के 8 दिन और कृष्ण पक्ष के 8 दिन तक बुध पर शुभ प्रभाव रहता है। उपरोक्त ग्रह शुक्ल पक्ष में शक्तिशाली रहते हैं। सूर्य, मंगल, शनि का बुध और चन्द्र पर बुरा प्रभाव रहता है आठ दिन कृष्ण पक्ष में और आठ दिन शुक्ल पक्ष में। ये ग्रह कृष्णपक्ष के दौरान शक्तिशाली रहते हैं।
अमावस और पूर्णिमा के दिन चांद 120 विरूप यानी अंक प्राप्त करता है। पक्ष के मध्य में चन्द्रमा 60 अंक के साथ आपके जीवन को प्रभावित करता है। पक्ष बल निकालने का तरीका यह है कि सबसे पहले चांद और सूर्य के बीच कितने डिग्री का कोण बन रहा है यह ज्ञात किया जाता है। अगर 180 से अधिक हो रहा है तो उसे 360 से घटाएंगे। अब आपके सामने जो अंक होगा उसे तीन से भाग दें इससे आपको ग्रहों का पक्ष बल मिल जाएगा।
यहां आपकी सुविधा के लिए पक्ष बल निकालने का सूत्र दिया जा रहा है जिसे आप देख सकते हैं।
चन्द्र
3 - ------------ = पक्षबल
सूर्य
3. त्रिभाग बल (Tribhaga Bala):
अन्तर्गत दिन रात को तीन तीन भागों में बांटा गया है (In Tribhaga bala Day and Night are divided into three equal parts)। त्रिभाग बल के अन्तर्गत बृहस्पति को हमेशा 60 अंक प्राप्त होता है (Jupiter gets 60 points in Tribhaga Bala)। अगर व्यक्ति का जन्म दिन के प्रथम भाग में होता है तो उसकी कुण्डली में बुध को 60 अंक प्राप्त होता है यानी बुध बलवान होता है। व्यक्ति का जन्म अगर दिन के दूसरे भाग में होता है तो सूर्य को 60 अंक मिलता है। व्यक्ति अगर दिन के तीसरे प्रहर में जन्म लेता है तो शनि को 60 अंक मिलता है अर्थात शनि बलवान होता है। चन्द्रमा को 60 अंक उस स्थिति में मिलता है जबकि व्यक्ति रात्रि के प्रथम भाग में जन्म लेता है। अगर व्यक्ति का जन्म रात के दूसरे भाग में होता है तो शुक्र को 60 अंक मिलता है और अगर तीसरे प्रहर में जन्म होता है तो मंगल को यह बल मिलता है।
काल बल के प्रथम भाग में आपने इसके तीन उपभागों को पढ़ा, दूसरे भाग में आप पढ़ेंगे वर्ष-मास-दिन- होरा बल, युद्ध बल और आयन बल के विषय में। इन्हें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें..
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