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पंचपक्षी से जीवन चक्र का आंकलन (Assessment of the life through Panch-Pakshi)
ज्योतिषशास्त्र में पंच पक्षी सिद्धान्त तमिल विद्वानों द्वारा खोज किया गया एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त हैं। यह सिद्धान्त बताता है कि हर दिन समय का एक चक्र नियत रूप से चलता रहता है। इस चक्र के परिणाम स्वरूप लाभ हानि एवं उपलब्धि हमें प्राप्त होती है।
इस सिद्धान्त के प्रतिपादकों ने अपने अध्ययन में पाया कि चन्द्र की गति के अनुसार और वार के मुताबिक पांच प्रकार के प्रभाव उत्पन्न होते हैं। इन पांचों प्रभावों का हमारे जीवन और गतिविधियों पर गहरा असर होता है। विद्वानों ने इन पांचों प्रभावों को पांच तत्व माना और इनका समय निर्धारण किया। समय निर्धारण में सभी तत्व के हिस्से में 2 घंटा 24 मिनट का समय आया। इन तत्वों के लिए निर्धारित समय को यम का नाम दिया गया। इस प्रकार दिन और रात में बराबर बराबर पांच यम आये। यह पद्धति समान्यतया इस नियम का अनुसरण करती है, परंतु विशेष स्थितियों में इसमें अंतर भी आता है। इसमें बदलाव पक्ष परिवर्तन और वार के प्रभाव से आता है।
इस पद्धति में सभी तत्वों का कोटि निर्धारण किया गया है। तत्वो का कोटि निर्धारण यानी क्रम तय करने के लिए एक नियम बनाया गया जिसके तहत यह कहा गया कि जिस तत्व का प्रभाव सबसे अधिक होगा वह प्रथम होगा इसके पश्चात जिन तत्व का प्रभाव जैसे जैसे कम होगा वह श्रृंखला में नीचे के क्रम में आता जाएगा। यह प्रक्रिया कुल मिलाकर उसी प्रकार है जैसे किसी कक्षा में अंक के आधार पर छात्र को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी दिया जाता है। क्रम निर्धारण में अंत में आने वाला तत्व मृत्यु या निष्क्रिय तत्व कहलाता है।
यहां हम जिन पांच तत्वों की बात कर रहे हैं वे पांच तत्व ही पंचपक्षी (The five elements are symbolised by the Panch-Pakshi) के नाम से जाने जाते हैं। पंच पक्षी में जिन पंक्षियो को शामिल किया गया है वे क्रमवार इस प्रकार हैं: 1. गिद्ध 2. उल्लू 3. कौआ 4. मुर्गा 5. मोर। इन पांचों पंक्षियों का अगल अलग स्वभाव और कर्म है जिनसे हम प्रभावित होते हैं। क्रमवार देखें तो इन पंक्षियों के कर्म इस प्रकार हैं: खाना, चलना, जीविकोपार्जन, शयन और मृत्यु।
तमिल विद्वानों ने कहा कि यह चक्र ऐसा है जो प्रतिदिन दिन और रात के पांचों यमों में चलता रहता है। इन्होंने कहा है कि वास्तव में सम्पूर्ण जीवन इन्हीं कर्मों से बांधा हुआ है। हम अपने शरीर को उर्जावान और कार्यशील बनाये रखने के लिए भोजन करते हैं। भोजन प्राप्त करने हेतु कर्म की दिशा में आगे बढ़ते हैं। कर्म से जीविकोपार्जन करते है। इन प्रक्रियाओं में जब हमारा शरीर थक जाता है तो हमें विश्राम की आवश्यकता होती है और हम सो जाते हैं। जीवन की तीन गतिविधियों के पश्चात मृत्यु को प्राप्त होते हैं और नये शरीर में प्रवेश करते हैं जहां फिर से नई उर्जा और नये उत्साह से यह चक्र शुरू होता है।
देखा जाय तो हम हर दिन जीवन की इस प्रक्रिया के साथ गतिमान रहते हैं। जब मृत्यु काल आता है उस समय जैसे हमें कष्ट होता है कुछ उसी प्रकार दिन में कुछ ऐसे पल भी आते हैं जब हमें किसी कारण से कष्ट होता है या उस वक्त कार्य में असफलता मिलती है। इसी प्रकार कभी खुशियां मिलती है तो कभी स्वत: ही शरीर में नई उर्जा का संचार हो उठता है। देखा जाय तो राशि, लग्न और नक्षत्र मिलकर हर दिन कुछ समय के लिए ऐसी स्थिति तैयार करते है जो हमारे लिए अत्यंत शुभ स्थिति का निर्माण करते हैं जिसमें हमारे अंदर नई उर्जा का संचार होता है। इस समय हम जो भी काम करते हैं उसमें हमें सफलता मिलती है।
पंच पक्षी के माध्यम से हम उस शुभ समय का अनुमान लगा सकते हैं और जीवन को सफलता के रास्ते पर आगे ले जा सकते हैं।
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Comments (1 posted):
Garud: Ist 5 nakshtar
Pingal:6 nakshatra
Kak :5 nakshatra
Kukkut: 5 Nakshatra
Mor : 6 Nakshatra
the above is for Shukla paksha ( brighter half)
Where as your division is 5,5,5,5,7
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