Home | वैदिक ज्योतिष | मुख्य अशुभ योग (Main Malefic Yog)

मुख्य अशुभ योग (Main Malefic Yog)

Font size: Decrease font Enlarge font
image मुख्य अशुभ योग (Main Malefic Yog)

जन्मकुण्डली में ग्रहो की अशुभ स्थिति होने पर एंव उनका आपस में या भाव के साथ सम्बन्ध स्थापित करने पर अशुभ योग (Inauspicious Yog) का निर्माण होता है. मुख्य अशुभ योग इस प्रकार से है.

1) केमद्रुम योग (Karmadruma Yog)
जन्मकुण्डली में चन्द्रमा के द्वितीय और द्वादश (Moon In 2nd and 12th House) भाव में (चन्द्र के आगे-पीछे) किसी भी ग्रह के न होने पर इस योग का निर्माण होता है. केमद्रुम योग दरिद्रता का परिचायक है.

2) ग्रहण योग (Grahan Yog)
चन्द्रमा के साथ राहु या केतु की युति होने पर इस योग का निर्माण होता है. यदि चन्द्र-राहु/केतु (Combination of Moon with Rahu and Ketu) के साथ सूर्य ग्रह भी संयुक्त हो जाये तो प्रबल ग्रहण योग बनता है. इस अवस्था में मानसिक स्थिति डाँवाडोल रहती है.

3) शकट योग (Shakat Yog)
जब चन्द्रमा से छटे या आँठवे भाव में बृहस्पति हो तो शकट योग का निर्माण होता है. यह योग प्रगति में बाधा उत्पन्न करता है.

4) चाण्डाल योग (Chandal Yog)
जन्मकुण्डली में गुरु के साथ राहु की युति बनने पर चाण्डाल नामक योग का निर्माण होता है. यह योग शिक्षा एंव आर्थिक दृष्टिकोण से हानिप्रद होता है.

5) कुजयोग (Kuja Yog)
जन्मकुण्डली में मंगल ग्रह के 1,4,7,8,12 भाव में होने पर 'कुज' नामक योग होता है. इसे मंगलीक दोष (Mangalik Dosha) नाम से भी कहा जाता है. जन्मकुण्डली में कुछ योग ग्रह का भाव से सम्बन्ध बनाने पर भी बनते हैं, वे इस प्रकार हैं

6) शत्रुपीडा/ अस्वस्थ योग (Shukrapida Yog / Aswastha Yog)
जब लग्नेश का षष्टेश के साथ राशी परिवर्तन या दृष्टि सम्बन्ध योग बन रहा हो तथा लग्नेश कमजोर पड रहा हो तो या तो व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब रहता है या फिर उसे शत्रु पीडित करता है.

7) कर्ज योग (Karj Yog)
जन्मकुण्डली में मंगल के त्रिक भाव (6,8,12) में होने पर एंव लग्नेश व घनेश (2,11) के कमजोर होने पर व्यक्ति कर्ज में डूबा रहता है.

8)षडयन्त्र योग (Shadhayantra Yog)
जन्मकुण्डली में लग्नेश के अष्टम भाव(Ascendant Lord In Eigth House) में होने पर तथा उस पर किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि न होने पर व्यक्ति अपने ही निकटवर्ती लोगो के षडयन्त्रो का शिकार होता है.

9) दरिद्रयोग (Daridra Yog)
जन्मकुण्डली में घनेश एंव लाभेश के त्रिक भाव में होने तथा लग्नेश के कमजोर होने के कारण दरिद्र योग होता है.

10) भाव नाशक योग (Bhava Nashak Yog)
किसी भी भाव का स्वामी त्रिक भाव (Trine Position) में बैठकर भाव की हानि करता है. सम्बन्धित भाव का नुक्सान करने के कारण इसे भाव नाशक योग कहते हैं.

11) व्यय योग (pya yog)
जन्मकुण्डली में व्ययेश के बलवान होने तथा लग्नेश के कमजोर होने पर व्यक्ति के खर्च में अधिकता रहती है अतः इसे व्यय योग कहा जाता है.

12) अल्पायु योग (Alpayu Yog)
जन्मकुण्डली में चन्द्रमा के पापी ग्रहो द्वारा पीडित होने या कमजोर होकर त्रिक भाव में बैठने तथा लग्नेश के कमजोर होने के कारण जातक/जातिका (Native) अल्पायु होता है.

13) मारकेश योग (Marekesh Yog)
द्वितीयेश या सप्तमेश के बलवान होने तथा लग्नेश के कमजोर होने पर मारकेश योग बनता है. इस योग में व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो सकता है.

14) षडाष्टक योग (Shadhastak Yog)
जब कोइ एक ग्रह किसी दूसरे ग्रह से छटें या आठवे भाव में स्थित हो तो षडाष्टक योग (Shadhastak Yog) बनता है. इस स्थिति में दोनो भावो से सम्बन्धित व्यक्तियों में शत्रुता का भाव रहता है.

नोट: आप कम्पयूटर द्वारा स्वयं जन्मकुण्डली, विवाह मिलान और वर्षफल का निर्माण कर सकते हैं. यह सुविधा होरोस्कोप एक्सप्लोरर में उपलब्ध है. आप इसका 45 दिन तक मुफ्त उपयोग कर सकते हैं. कीमत 1250 रु. जानकारी के लिये  यहाँ क्लिक करे

Comments (9 posted):

PRABHAKAR on 09 January, 2009 02:17:35
avatar
I want to know about mritu shadastak what is it mean ? is samebady from husband or wife will die if they married ?
Aruna Bhatnagar on 13 March, 2009 12:11:44
avatar
Well, I want to know wheather I have any kalsarp yog or any chandalyog in my kundli. if yes, please suggest remedy.
rajesh vats on 06 July, 2009 01:00:24
avatar
mujae es saal ke grahano keay barae may pata karana hai
Rajendra Parmar on 30 September, 2009 08:11:34
avatar
what are effects & remedies of shani rahu & Ketu in lagnasthaan together
bhupendra soni on 15 September, 2010 07:05:12
avatar
I want to know about mritu shadastak what is it mean ? is samebady from husband or wife will die if they married ?
damini on 20 October, 2010 12:57:11
avatar
if guru and rahu have only drasti relation guru in tula rasi and rahu in kumbh rasi with moon in 12th house in the kundli , then this is chandal yog yes or not? if moon and rahu in kumbh rasi and in 12th bhav in kundli then what is remedy?
rajesh on 08 November, 2010 01:46:22
avatar
what are effects of guru/ketu both in 5 th house .give remeady .DOB is date 2-6-1969 . 6.20 am morning ,ahmedabad
HMJ on 23 November, 2010 07:37:23
avatar
I have guru and rahu @12th place in my kundali so what it is affect me or help me........plz reply tomymail
HMJ on 23 November, 2010 07:37:23
avatar
I have guru and rahu @12th place in my kundali so what it is affect me or help me........plz reply tomymail

Post your comment comment

Please enter the code you see in the image: