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क्या सूर्य, मंगल, शनि, राहु-केतु अशुभ ग्रह है?(Are Sun, Mars, Saturn, Rahu And Ketu Malefic Planets?)
ज्योतिष ग्रन्थो में नवग्रहो (Nav Grahas) को दो श्रेणियो में बाँटा गया है. शुभ ग्रह जैसे कि चन्द्रमा, बुध, गुरु एंव शुक्र तथा पापी ग्रह (Malefic Planets) सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु. शुभ ग्रह का अर्थ है, वो ग्रह जो शुभ फल प्रदान करते हैं तथा अशुभ फल देने वाले ग्रह अशुभ् कहलाते हैं. एक प्रश्न जो चिन्तन में उभरता है कि क्या अशुभ् कहे जाने वाले ग्रह सदा हानि ही करते है. और यदि लाभ भी देते हैं तो उनको अशुभ् क्यो कहा जाता है. लेखक ने इस प्रश्न का उत्तर अपने अनुभवो के आधार पर इस आलेख में देने का प्रयास किया है.
ज्योतिष ग्रन्थो में नवग्रहो (Nav Grahas) को दो श्रेणियो में बाँटा गया है. शुभ ग्रह जैसे कि चन्द्रमा, बुध, गुरु एंव शुक्र तथा अशुभ ग्रह (Malefic Planets) सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु. शुभ ग्रह का अर्थ है, वो ग्रह जो शुभ फल प्रदान करते हैं तथा अशुभ फल देने वाले ग्रह अशुभ् कहलाते हैं. एक प्रश्न जो चिन्तन में उभरता है कि क्या अशुभ कहे जाने वाले ग्रह सदा हानि ही करते है. और यदि लाभ भी देते हैं तो उनको अशुभ् क्यो कहा जाता है. लेखक ने इस प्रश्न का उत्तर अपने अनुभवो के आधार पर इस आलेख में देने का प्रयास किया है.
लेखक के विचार में यदि सूर्य-मेष राशी में (Sun In Aries Sign), मंगल मकर राशी में (Mars In Capricorn Sign), शनि तुला राशी में (Saturn In Libra Sign) , राहु मिथुन (Rahu In Gemini) तथा केतु धनु (Ketu In Saggitarius Sign) राशी में हो तो ये सभी उच्चस्थ ग्रह (Exalted Planets) कहलाते हैं. ज्योतिष का सिद्धान्त है कि ग्रह उच्च राशी में होने पर शुभ फलदायी हो जाता है, इस प्रकार अशुभ ग्रह वाली मान्यता स्वयं खण्डित हो जाती है, इसलिए हमें इन ग्रहो के लिए अशुभ के स्थान पर क्रूर शब्द का प्रयोग करना चाहिये तथा ग्रह के नीच राशी (Nich Rashi) में होने पर उसे हम अशुभ कह सकते हैं. इस स्थिति में शुभ कहे जाने वाले ग्रह चन्द्रमा-वृश्चिक राशी, बुध-मीन राशी, गुरु मकर राशी तथा शुक्र-कन्या राशी में स्थित होने पर हानि करते है, इस प्रकार ये पापी ग्रह हुए. अतः इन शुभ ग्रहो को शुभ स्थिति में होने पर सौम्य ग्रह के नाम से जानना चाहिये. दो भिन्न उदाहरणो से हम इस कथन की पुष्टि कर सकते हैं. 1) मकर राशी में मंगल (Mars In Capricorn Sign) के स्थित होने पर वह उच्च का ग्रह बन जाता है. जिस जातक/ जातिका (Native) की जन्म कुण्डली में मंगल उच्च राशी का हो तो वह पुलिस, सेना खेल या डॉक्टरी के क्षेत्र में उच्च पद पर आसीन होता है एंव बहुत बडी सम्पत्ति का मालिक होता है. साहस और पराक्रम उसमें कूट-कूट कर भरा होता है. छोटे भाई- बहनो का उसे पूर्ण सुख प्राप्त होता है. इतनी शुभ स्थिति होने पर भी क्या हम मंगल को पापी ग्रह कहेंगे.2) कन्या राशी में शुक्र (Venus In Virgo Sign) के स्थित होने पर वह नीच का ग्रह कहलाता है. जिस जातक/ जातिका (Native) की जन्मकुण्डली में शुक्र नीच राशी का हो तो उसके सांसारिक सुखो में व्यवधान आ जाता है. यदि वह पुरुष है तो उसके पत्नि सुख में बाधा रहती है. वैचारिक दृष्टि से भी ऎसा व्यक्ति पतित पाया जाता है. वाहन से चोट लगने की सम्भावना रहती है. वैध रुप से धन का अभाव रहता है तथा अवैध तरीके से ही धनवान बना जा सकता है. इस प्रकार की अशुभ स्थिति होने पर भी क्या शुक्र को शुभ ग्रह की संज्ञा दी जा सकती है.
उपरोक्त दोनो उदाहरणो से आप समझ गए होंगे कि कोइ भी ग्रह शुभ या पापी नहीं होता है, केवल उनकी स्थिति तथा लग्न/ लग्नेश के साथ उनका सम्बन्ध (Relationship with Ascendant & Lord Of Ascendant) ही शुभ या अशुभ् नाम की संज्ञा देता है.
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2011
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