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दुर्भाग्यशाली नहीं होते मूल नक्षत्र के जातक (Native of Mool Nakshatra are not unfortunate)

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image Mool Nakshatra

मूल नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र के अन्तर्गत आता है। यह नक्षत्र बहुत ही अशुभ माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी केतु होता है। इस नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में होते हैं। इस नक्षत्र के विषय में यह धारणा है कि जो व्यक्ति इस नक्षत्र में जन्म लेते हैं उनके परिवार के सदस्यों को इसके दोष का सामना करना पड़ता है। दोष पर विशेष चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति में कई गुण होते हैं, हमें इन गुणों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

ज्योतिषशास्त्र कहता है जो व्यक्ति मूल नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे ईमानदार होते हैं। इनमें ईश्वर के प्रति आस्था होती है। ये बुद्धिमान होते हैं। ये न्याय के प्रति विश्वास रखते हैं। लोगों के साथ मधुर सम्बन्ध रखते हैं और इनकी प्रकृति मिलनसार होती है। स्वास्थ्य के मामले में ये भाग्यशाली होते हैं, ये सेहतमंद होते हैं। ये मजबूत व दृढ़ विचारधारा के स्वामी होते हैं। ये सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं। ये अपने गुणों एवं कार्यो से काफी प्रसिद्धि हासिल करते हैं।

मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के कई मित्र होते हैं क्योंकि इनमें वफादारी होती है। ये पढ़ने लिखने में अच्छे होते हैं तथा दर्शन शास्त्र में इनकी विशेष रूचि होती है। इन्हें विद्वानों की श्रेणी में गिना जाता है। ये आदर्शवादी और सिद्धान्तों पर चलने वाले व्यक्ति होते हैं अगर इनके सामने ऐसी स्थिति आ जाए जब धन और सम्मान मे से एक को चुनना हो तब ये धन की जगह सम्मान को चुनना पसंद करते हैं।

जो व्यक्ति इस नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे व्यवसाय एवं नौकरी दोनों में ही सफल होते हैं, परंतु व्यवसाय की अपेक्षा नौकरी करना इन्हें अधिक पसंद है। ये जहां भी होते हैं अपने क्षेत्र में सर्वोच्च होते हैं। ये शारीरिक श्रम की अपेक्षा बुद्धि का प्रयोग करना यानी बुद्धि से काम निकालना खूब जानते हैं।

अध्यात्म में विशेष रूचि होने के कारण धन का लोभ इनके अंदर नहीं रहता। ये समाज में पीड़ित लोगों की सहायता के लिए कई कार्यक्रमों में सक्रिय भाग लेते हैं। समाज में इनका काफी सम्मान होता है तथा ये प्रसिद्ध होते हैं। इनका सांसारिक जीवन खुशियों से भरा होता है। ये सुख सुविधाओं से युक्त जीवन जीने वाले होते हैं। समाज के उच्च वर्गों से इनकी मित्रता रहती है।

ये ईश्वरीय सत्ता में हृदय से विश्वास रखते हैं। इस नक्षत्र के जातक को मूल शांति करा लेनी चाहिए, इससे उत्तमता में वृद्धि होती है और अशुभ प्रभाव में कमी आती है।

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Comments (6 posted):

vijay gupta on 03 January, 2009 12:52:39
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Dear Sir,

Can u tell me timging of mool nakshtra for the date 26/04/1975.

Thanks & Regards

Vijay Gupta
yogendra kumar on 22 August, 2009 10:57:08
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mai 5 july 1982 ka moolnakshatra ka timing janana chahata hu
Sachin on 21 August, 2010 11:39:02
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Guru ji Pranam aur dhanyawad aapki jankari ke lye. mera janam 14/12/1983 ko raat 8:00 baje Chilka lake(Orissa)mein hua tha jo Revati Nakshtra Charan-2 ke prabhav mein ata hai kripaya batayen ke main moolshanti ab kab karwaoon.
DHANYAWAD
Sachin on 21 August, 2010 11:43:41
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Guru ji Pranam aur dhanyawad aapki jankari ke lye. mera janam 14/12/1983 ko raat 8:00 baje Chilka lake(Orissa)mein hua tha jo Revati Nakshtra Charan-2 ke prabhav mein ata hai kripaya batayen ke main moolshanti ab kab karwaoon.
DHANYAWAD
RAMESH GUPTA on 17 September, 2010 02:52:00
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guru gi pranam aur dhanawad aapki jankari ke lye mera janam 12/05/1960 ko rat 11.30 jalaun(u.p.)meain hua tha kripaya batayen ke moolshanti ab kab karwaoon DHANYWAD
kapilkhamele on 27 September, 2010 10:31:28
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gurujee pranam,mera janam 19 feb1991 me hua.mera adhikansh samay abhavo me hi bita .mai janana chata hu ki,kya mera khud ka ghar jindagi me banenga ki nahi.
sadhanavad.

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