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कर्क लग्न में नवग्रह (Navagraha In Cancer Lagna)

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image Navagraha In Cancer Lagna

कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा है.अगर आपका लग्न भी कर्क है तो आप घूमने के शौकीन होंगे.आपकी कल्पनाशीलता और स्मरण क्षमता अच्छी होगी.आप में निरन्तर प्रगति की ओर बढ़ने की इच्छा होगी.अगर आपकी कुण्डली के लग्न भाव में कोई ग्रह बैठा है तो इससे आप प्रभावित होंगे.ग्रहों का प्रभाव आपके लिए शुभ है या अशुभ जानिए.

कर्क लग्न की कुण्डली मे लग्नस्थ सूर्य (Sun in Cancer Ascendant)
कर्क लग्न की कुण्डली में सूर्य द्वितीय भाव का स्वामी होता है (In Cancer, Sun is the lord of the second house).प्रथम भाव में चन्द्रमा की राशि कर्क में होने से यह स्वास्थ्य के सम्बन्ध में कष्टकारी होता है.सूर्य की दशा में स्वास्थ्य को लेकर व्यक्ति परेशान होता है.इनमें अभिमान एवं उग्रता रहती है.इन्हें व्यापार की अपेक्षा नौकरी करना पसंद होता है.सरकारी मामलों में इन्हें परेशानियों का सामना करना होता है.पिता के साथ अनबन रहती है.इन्हें स्थिर होकर बैठना पसंद नहीं होता है.सगे सम्बन्धियों से विरोध का सामना करना होता है.

कर्क लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ चन्द्र (Moon in Cancer Ascendant)
चन्द्रमा कर्क लग्न की कुण्डली में लग्नेश होने से शुभ कारक ग्रह होता है.इस लग्न में चन्द्रमा स्वराशि का होता है तो उदार और परोपकारी होता है.इनमें ईश्वर के प्रति आस्था और बड़ों के प्रति सम्मान और आदर होता है.इनका मनोबल ऊँचा रहता है.अपने प्रयास से समाज में उच्च स्थान प्राप्त करते हैं.व्यापार में इन्हें सफलता मिलती है.कला के क्षेत्र में भी इन्हें अच्छी सफलता मिलती है.चन्द्रमा की दृष्टि सप्तम भाव पर होने से जीवनसाथी के सम्बन्ध में उत्तम फल देता है.व्यक्ति को विद्वान एवं ज्ञानवान बनता है.धन भाव चन्द्रमा का प्रभाव होने से आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है.विवाह के पश्चात इन्हें विशेष लाभ मिलता है.कटु सत्य एवं स्पष्ट कथन के कारण इन्हें विरोध का भी सामना करना होता है.

कर्क लग्न की कुण्डली मे लग्नस्थ मंगल (Mars in Cancer Ascendant)
मंगल कर्क लग्न की कुण्डली में पंचमेश और दशमेश होता है.यह दशमेश और त्रिकोणेश होने से कर्क लग्न में मंगलकारी होता है (Mars is auspicious in Cancer Ascendant). मंगल के प्रभाव से व्यक्ति क्रोधी और उग्र होता है.इनमें महत्वाकांक्षा अधिक रहती है.राजकीय पक्ष से मंगल इन्हें लाभ प्रदान करता है.प्रथम भाव में बैठा मंगल चतुर्थ भाव एवं अष्टम भाव को देखता है.मंगल की दृष्टि से व्यक्ति को आर्थिक लाभ मिलता रहता है लेकिन व्यय भी उसी अनुपात में होता रहता है.धन संचय कर रख पाना इनके लिए कठिन होता है.वैवाहिक जीवन में मधुरता की कमी रहती है क्योंकि मंगल की दृष्टि से सप्तम भाव प्रभावित होता है.पारिवारिक जीवन कलहपूर्ण रहता है.लग्नस्थ मंगल के प्रभाव से व्यक्ति संतान सुख प्राप्त करता है.स्वभाव में चतुराई और लालच के कारण कभी कभी इन्हें अपमान का भी सामना करना होता है.

कर्क लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ बुध (Mercury in Cancer Ascendant)
बुध कर्क लग्न की कुण्डली में अशुभ कारक ग्रह होता है.यह इस लग्न में तृतीय और द्वादश भाव का स्वामी होता है.बुध अगर लग्न भाव में स्थित हो तो व्यक्ति का व्यवहार और आचरण संदेहपूर्ण होता है.आजीविका के तौर पर नौकरी इन्हें पसंद होता है.व्यापार में इनकी रूचि बहुत कम रहती है.अगर ये जल से सम्बन्धित वस्तुओ का करोबार करते हैं तो व्यापार भी इनकें लिए लाभप्रद और उन्नति कारक होता है.इन्हें सगे सम्बन्धियों एवं भाईयों से विशेष लगाव नहीं रहता.सप्तम भाव पर बुध की दृष्टि होने से गृहस्थ जीवन में तनाव बना रहता है.साझेदारों से हानि होती है.शत्रुओं के कारण कठिनाईयो का सामना करना होता है.

कर्क लग्न की कुण्डली में में लग्नस्थ गुरू (Jupiter in Cancer Ascendant)
आपकी जन्म कुण्डली के लग्न भाव में कर्क राशि है अत: आप कर्क लग्न के है.आपकी कुण्डली में गुरू षष्टम एवं नवम भाव का स्वामी है (Jupiter is the lord of the sixth and eighth houses when placed in Ascendant).षष्टम का स्वामी होने से जहां गुरू दूषित होता है वहीं त्रिकोणेश होने से शुभ फलदायी भी होता है.लग्न में बैठा गुरू व्यक्तित्व को आकर्षक बनाता है.यह अपनी पूर्ण दृष्टि से पंचम, सप्तम एवं नवम भाव को देखता है.पंचम भाव में गुरू की दृष्टि संतान के संदर्भ में शुभ फलदायी होती है.सप्तम भाव में जीवनसाथी के विषय में उत्तमता प्रदान करती है.नवम भाव पर दृष्टि होने से भाग्य प्रबल रहता है.जीवन धन धान्य से परिपूर्ण होता है.व्यवहार में उदारता और दायभाव शामिल रहता है.अगर लग्न में स्थित गुरू पाप ग्रहों से दृष्ट अथवा युत हो तो गुरू की शुभता हेतु उपाय करना चाहिए..

कर्क लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ शुक्र (Venus in Cancer Ascendant)
चन्द्र की राशि कर्क में शुक्र अकारक ग्रह होता है.यह इस लग्न की कुण्डली में चतुर्थ और एकादश भाव का स्वामी होता है.दो केन्द्र भाव का स्वामी होने से शुक्र को केन्द्राधिपति दोष लगता है.शक्र लग्नस्थ होने से व्यक्ति में साहस की कमी रहती है.इनके मन में अनजाना भय बना रहता है.आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है.नौकरी एवं व्यापार दोनों में ही इन्हें अच्छी सफलता मिलती है.शुक्र की दृष्टि सप्तम भाव में स्थित शनि की राशि पर होने से व्यक्ति में काम की भावना अधिक रहती है.स्त्रियों से इनका विशेष लगाव रहता है.

कर्क लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ शनि (Saturn in Cancer Ascendant)
कर्क लग्न की कुण्डली में शनि सप्तमेश और अष्टमेश होता है.इस लग्न की कुण्डली में शनि अशुभ, कष्टकारी एवं पीड़ादायक होता है (Saturn gives malefic results when placed in Cancer Ascendant).इस राशि में शनि लग्नस्थ होने से व्यक्ति के  स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव होता रहता है.व्यक्ति दुबला पतला होता है.इनका स्वभाव विलासी होता है.ये सुख कामी होते हैं.अपना अधिकांश धन भोग विलास में खर्च करते हैं.लग्नस्थ शनि माता पिता के सुख में कमी करता है.संतान के विषय में भी यह कष्टकारी होता है.शनि अपनी पूर्ण दृष्टि से तृतीय, सप्तम एवं दशम भाव को देखता है.इसके कारण से भाईयों एवं कुटुम्बों से विशेष सहयोग नहीं मिल पाता है.गृहस्थी सुख में कमी आती है.शनि आर्थिक लाभ प्रदान करता है तो खर्च के भी कई रास्ते खोल देता है.नेत्र सम्बन्धी रोग की भी संभावना रहती है.

कर्क लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ राहु (Rahui n Cancer Ascendant)
राहु कर्क लग्न की कुण्डली में प्रथम भाव में स्थित होने से व्यक्ति को विलासी बनाता है.इनका मन सुख सुविधाओं के प्रति आकर्षित होता है.व्यापार में सफलता प्राप्त करने के लिए इन्हें कठिन परिश्रम करना होता है.नौकरी में इन्हें जल्दी सफलता मिलती है.राहु अपनी सातवीं दृष्टि से सप्तम भाव को देखता है जिससे वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण होता है.जीवनसाथी से सहयोग नहीं मिलता है.साझेदारी में नुकसान होता है.

कर्क लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ केतु (Ketu in Cancer Ascendant)
कर्क लग्न की कुण्डली मे प्रथम भाव में बैठा केतु स्वास्थ्य को प्रभावित करता है.केतु की दशा के समय स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव होता रहता है.समाजिक मान सम्मान एवं प्रतिष्ठा के प्रति ये विशेष उत्सुक होते हैं.इनके गुप्त शत्रु भी होते हैं जिनके कारण परेशानियों का सामना करना होता है.सप्तम भाव पर केतु की दृष्टि इस भाव के फल को मंदा कर देती है.इस भाव के केतु से पीड़ित होने के कारण वैवाहिक जीवन के सुख में कमी आती है.केतु इन्हें विवेहेत्तर सम्बन्ध के लिए भी प्रेरित करता है.

Comments (16 posted):

Honey on 23 May, 2009 02:55:24
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Main apni jindgi se bahut tang hun or barkat bhi nahi hoti ap koi upay btayen maharaj
jayesh on 02 June, 2009 08:32:28
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mera bhavishya kasa hoga muja har kam me asafalta milti hai mera sar pa bahut karz hai kesa utar pauga. maei madat kijiya panditji.pranam dhanyawad
Hitesh Pandya on 03 June, 2009 12:01:49
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Yadi kindali main Kark lagna ho aur sath main Shani-Chandra ho to uska faladesh batai ae?
satish pagedar on 06 June, 2009 05:16:11
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my dughter name akankasha,dob 6-4-2000,time 12:40 day time,place : Vadodara gujrat.

how will be her studies? i m worried ? please advise. what do i do for better studies n concentraion. I shall be oblige to get yr answer
Shriram Shukla on 12 June, 2009 02:01:35
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Good information. Pl tell the criteria to decide the good and bad grah in a kundali.
Brahmdeo on 01 July, 2009 02:37:29
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Mere karka lagna me surya aur chandra hai to meri position ke bare me details knowledge de.
anand jain on 04 July, 2009 03:57:58
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mera vaivahik jeevan in dino ashant chal raha hai kya talaak mere samasya kaa nidaan hai ya koi upaay ?
samaadhan batayen.
on 05 July, 2009 04:20:04
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sab galat galat chhapte ho
Pooja Goel on 12 July, 2009 01:00:46
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Meri Rashi Cancer hai. Pandit ji maje yeh batao ki meri shaddi kab tak hogi
balwinder singh on 15 July, 2009 04:20:14
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any fucher time
manisha basal on 27 July, 2009 01:10:58
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yadi lagna karke ho aur lagnapati koi graah na to tab kya future hoga?
Domdev sharadrao more on 13 August, 2009 03:53:20
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meri shadi kab hogi aur mera love marrage hoga ki arrange marrage janm nam (domdev)
harjeet sarangdevot on 25 August, 2009 12:37:19
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i want to be ips or ias so main ban sakthi hu kya,mera future muje janana hai
harjeet sarangdevot on 25 August, 2009 12:37:20
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i want to be ips or ias so main ban sakthi hu kya,mera future muje janana hai
hema on 21 November, 2009 02:23:15
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mein 22 year ,01,02,188 ka janam hai ,meri shadi ko aath mahine ho gye hai meri samsya yah hai ki mera sasuraal mein koi bhi meri helpfhul nahi hai meri saas se nahi banti or pati ko mein pasand nahi karti ho kyoki unka bachoo jesa dimag hai ,,kyayah isththi haamesha bani rahegi meri life mein,,, plz mughe iska upaaya batye ki yah meri kismat mein hai
Narayan Moharana on 03 December, 2009 07:24:52
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I am purva phalguni leo.My lagna is cancer.My date of birth is 13/02/1979 at 4.30pm.Now i am suffering of lung cancer.Shall i recover from this desease or die with this desease in the near future.

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