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नवमांश कुण्डली (Navamsha Kundali)
नवमांश कुण्डली (Navamsha Kundli) से जीवन के लगभग सभी प्रश्नों का उत्तर ज्ञात किया जा सकता है। शिक्षा से सम्बन्धित, व्यवसाय से सम्बन्धित, विवाह से सम्बन्धित, माता पिता एवं संतान से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर आप नवमांश कुण्डली से जान सकते हैं।
नवमांश कुण्डली (Navamsha Kundali) वर्ग चार्ट कुण्डली के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लग्न कुण्डली अगर शरीर है तो नवमांश कुण्डली को उसकी आत्मा कहा जा सकता है क्योंकि इसी से ग्रहों के फल देने की क्षमता का ज्ञान होता है। कुण्डली से फलादेश करते समय जबतक नवमांश कुण्डली का सही आंकलन नहीं किया जाए फलादेश सही नहीं हो सकता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का लग्न वर्गोत्तम नवमांश होता है वह शारीरिक व मानसिक तौर पर स्वस्थ और मजबूत होता है। इसके अलावा व्यक्ति को अपने लग्न में स्थित राशि के अनुसार फल प्राप्त होत हैं। इसी प्रकार ग्रहों के वर्गोत्तम होने पर भी अलग अलग फल मिलता है जैसे
सूर्य वर्गोत्तम (Surya Vargottam)
जिस व्यक्ति का सूर्य वर्गोत्तम होता हे वह दार्शनिक प्रवृति का होता है। इनकी मानसिक व शारीरिक क्षमता अच्छी होती है। ये शानो शौकत से जीवन का आनन्द लेते हैं। इन्हें समाज में मान सम्मान एवं प्रतिष्ठा मिलती है। गूढ़ विषयों में इनकी रूचि होती है। नवमांश कुण्डली में लग्न वर्गोत्तम है और 12 वें स्थान पर सूर्य स्थित है तो यह व्यक्ति को सरकारी क्षेत्र में उच्च पद दिलाता है।
चन्द्र वर्गोत्तम (Chandra Vargottam)
चन्द्र वर्गात्तम वाले व्यक्ति माता के भक्त होते है। इनकी स्मरण क्षमता अच्छी रहती है। ये बुद्धिमान और होशियार होते हैं। ये भेदभाव का विचार नहीं रखते और सभी के साथ एक समान व्यवहार रखने वाले होते हैं। ये अपनी चाहतों को अच्छी तरह से समझते हैं और उसे प्राप्त करने हेतु तत्पर रहते हैं। नवमांश कुण्डली में लग्न वर्गोत्तम है और 12 वें स्थान पर चन्द्र स्थित है तो व्यक्ति को व्यापार में सफलता मिलती है।
मंगल वर्गोत्तम (Mangal Vargottam)
जिस व्यक्ति की कुण्डली में मंगल वर्गोत्तम होता है वे अपनी बातों से लोगों को प्रभावित करना जानते हैं। ये ज्योतिष विद्या में रूचि रखते हैं और अपने परिवेश में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान करने की क्षमता रखते हैं। ये उत्साही प्रवृति के होते हैं जो इन्हें पसंद नहीं होता उसका विरोध करते हैं। ये अपने ऊपर किसी चीज़ को जबर्दस्ती नहीं ढोते। नवमांश कुण्डली में लग्न वर्गोत्तम है और 12 वें स्थान पर मंगल स्थित है तो व्यक्ति सेना और उससे सम्बन्धित क्षेत्र में कामयाब होता है।
बुध वर्गोत्तम (Budh Vargottam)
बुध वर्गोत्तम वाले व्यक्ति बुद्धिमान होते हैं। ये अपनी बातों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। ये तर्क वितर्क में कुशल और प्रभावशाली होते हैं। इस वर्गोत्तम के व्यक्ति ज्योतिष विद्या में भी निपुणता रखते हैं। नवमांश कुण्डली में लग्न वर्गोत्तम है और 12 वें स्थान पर बुध स्थित है तो यह व्यक्ति को शिक्षा के क्षेत्र में सफल होता है।
बृहस्पति वर्गोत्तम (Guru Vargottam)
जो व्यक्ति बृहस्पति वर्गोत्तम से प्रभावित होते हैं वे घमंडी और अहंकारी होते हैं। ये दूसरों की बातों को ध्यान से सुनते और समझते हैं और सच को जानने की कोशिश करते हैं। ये बुद्धिमान और समझदार होते हैं। ये दिखने में सुन्दर और गठीले नज़र आते हैं। नवमांश कुण्डली में लग्न वर्गोत्तम है और 12 वें स्थान पर बृहस्पति स्थित है तो यह व्यक्ति को धार्मिक क्षेत्र में उच्च स्थान दिलाता है।
शुक्र वर्गोत्तम (Shukra Vargottam)
शुक्र वर्गोत्तम वाले व्यक्ति अपने शरीर और सौन्दर्य के प्रति विशेष ध्यान देने वाले होते हैं। इस वर्गोत्तम के व्यक्ति सामने वाले के मन में क्या चल रहा है इस बात को समझने की बेहतर क्षमता रखते हैं। ये एक अच्छे भविष्यवक्ता हो सकते हैं। ये अधिक बीमार नहीं होते क्योंकि इनमें रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। नवमांश कुण्डली में लग्न वर्गोत्तम है और 12 वें स्थान पर शुक्र स्थित है तो यह व्यक्ति को सुख सुविधाओं से परिपूर्ण जीवन प्रदान करता है।
शनि वर्गोत्तम (Shani Vargottam)
शनि वर्गोत्तम से प्रभावित व्यक्ति अपनी जिम्मेवारियों के प्रति लापरवाह होते हैं और मेहनत से बचना चाहते हैं। इनमें दृढ़ इच्छा शक्ति होती है। ये अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत और गंभीर होते हैं। इनकी आयु लम्बी होती है परंतु इनका जीवन संघर्ष से भरा होता है। नवमांश कुण्डली में लग्न वर्गोत्तम है और 12 वें स्थान पर शनि स्थित है तो व्यक्ति जीवन भर किसी की नौकरी करता है।
विवाह कुण्डली में नवमांश की भूमिका (Navamsha and Gun Milan Melapak)
विवाह हर व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। विवाह जैसे गंभीर विषय में भी नवमांश की बड़ी भूमिका होती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रह जब गोचर में 64 वें नवमांश में हों उस समय विवाह नहीं करना चाहिए। विवाह मूहुर्त में वर कन्या के 36, 64, 72 तथा 96वें नवमांश में अशुभ ग्रह गोचर में हों तो विवाह नहीं करना चाहिए अन्यथा वैवाहिक जीवन का सुख नष्ट होता है। विवाह मुहूर्त में जब लग्न व चन्द्रमा के 55 वें नवमांश में कोई ग्रह स्थित हो तब भी शादी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इस स्थिति में शादी होने पर पति पत्नी में कलह और अशांति बनी रहती है।
दशा गोचर पर नवमांश का प्रभाव (Navamsha and Dasha Gochar)
विंशोत्तरी दशा में जब व्यक्ति की कुण्डली में लग्नेश के नवमांश की दशा चल रही होती है तो यह दशा उत्तम फल देती है। सप्तमेश जिस नवमांश में होता है उस नवमांश के स्वामी के साथ जिस ग्रह की युति होती है उनकी दशा एवं अन्तर्दशा में शुभ प्रभाव मिलता है इसी प्रकार पांचवें नवमांश के स्वामी की दशा, अन्तर्दशा भी लाभप्रद होती है। 64वें नवमांश के अधिपति तथा उससे युति करने वाले ग्रहों की जब दशा अन्तर्दशा चलती है तब व्यक्ति को अत्यंत दु ख भोगना पड़ता है।




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Comments (4 posted):
एक् प्रश्न- अगर कोई ग्रह नीचस्थ है, और वर्गोत्तम भी, तब उस ग्रह का बल किस तरह से बढ़ेगा? बुरा प्रभाव होगा या अच्छा?
और प्लीज़ ये word verification हटा लें।
THANX
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