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नवीन पद्वति द्वारा जन्मकुण्डली का निर्माण (New Method Of Making Birth Chart)

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image नवीन पद्वति द्वारा जन्मकुण्डली का निर्माण (New Method Of Making Birth Chart)

नवीन पद्वति द्वारा इष्टकालिक लग्न राशी (Lagna Rashi) जानने के लिए इष्टकालिक (Estakalik) साम्पत्तिक काल की आवश्यकता होती है. साम्पत्तिक काल साधन (Kal Sadhan) के लिए स्थानीय मध्य काल (Local Mean Time) के बारे में ज्ञात होना जरुरी है. किसी भी देश के Standard Time को L.M.T. में बदलने के लिए उस देश के (Standard Time Meridian) की आवश्यकता होती है. किसी भी देश के रेखांश (Longitude) को उस देश का (Standard Time) कहते हैं, जैसे कि भारत का Standard Time (IST) 82º-30' (पूर्व) रेखांश है.

जिस देश में जातक/ जातिका का जन्म हुआ है उस देश की Standard Time (रेखांश) से उसके (Native) जन्म स्थान (शहर) के रेखांशो का अन्तर करने पर अंश कलाऎ ज्ञात होती हैं. इन अंश-कलाओ (Ansh- Kalas) को चार से गुना करने पर मिनट सैकण्ड प्राप्त होते हैं. अह मिनटादि अन्तर उस नगर के L.M.T. और् C.S.T. (Country Standard Time) का अन्तर होगा. इस अन्तर को हम 'Standard Difference' कहेंगे. एटलस (मानचित्र) में दिये गये रेखांश से हम यह ज्ञात कर सकते हैं कि Native का जन्मस्थान C.S.T. से पूर्व में स्थित है या पश्चिम में. पूर्व में होने पर Standard अन्तर धन(+) तथा पश्चिम में ऋण (-) होगा. जैसा कि हम पहले ही बता चुके है कि इष्टकालिक लग्न राशी (Estakalik Lagna Rashi) जानने के लिए इष्टकालिक साम्पत्तिक काल की आवश्यकता होती है,

तथा शुद्ध साम्पत्तिक काल निकालने कि लिए पाँच सारणियो की आवश्यकता पड्ती है और ये सारणियाँ इस प्रकार हैं:- 1) तिथि-मास संस्कार सारणी (Tithi- Month Sanskar Sarani) 2) वर्ष संस्कार सारणी (Year Sanskar Sarani) 3) रेखांश संस्कार सारणी (Longitude Sanskar Sarani) 4) काल संस्कार (Time Sanskar Sarani) सारणी तथा 5) अयंनाश संस्कार सारणी (Ayanamsh Sanskar Sarani). इन सारणियो के आधार पर शुद्ध साम्पत्तिक काल ज्ञात किया जाता है. अब इस साम्पत्तिक काल से लग्न ज्ञात करने के लिए हमें 'लग्नारम्भ साधन सारणी' की आवश्यकता पडेगी. आइये इसे एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट करते हैं.

उदाहरण:- मान लो एक बच्चे का जन्म 10 अप्रेल 2004 को प्रातः 11 बजकर 30 मिनट पर (I.S.T.) दिल्ली में हुआ तो उस बालक के जन्मकालिक साम्पत्तिक काल के आधार पर लग्न राशी ज्ञात करें.

चूंकि दिल्ली का Standard Difference Time भारत से-21:12 मिनट पर है तो बालक का स्थानीय मध्य काल है

11:29:60

- 21:12

11»08:48 Time of Birth

अब साम्पत्तिक काल साधन करने के लिए इसमें तिथि-मास संस्कार करें

11»08:48 (स्थानीय मध्य काल)

+13:07:11 (तिथि-मास संस्कार) 24:!5:59

अब इसमें वर्ष संस्कार करें

24:15:59

+ 3:08 (
वर्ष संस्कार)

24:18:67

अब इसमें रेखांश संस्कार करें, दिल्ली का रेखांश 77-12 East है

24:18:67

- 51 (
रेखांश संस्कार)

24:18:16

अब इसमें काल संस्कार करें

24:18:16

+ 1:50 (
काल संस्कार)

24:20:06

अब इसमें अयंनाश संस्कार करें

24:20:06

+ 39 (
अयंनाश संस्कार)

24:20:45

यहाँ पर एक संस्कार (लीप वर्ष संस्कार) और करना पडेगा क्योंकि सन 2004 लीप लीप वर्ष है.

24:20:45

+ 3:57 (
लीप वर्ष संस्कार)

24:24:42

अन्त में 24 घंटो को 24 में से घटाने पर हमें शुद्ध इष्टकालिक साम्पत्तिक काल ज्ञात हुआ

24:24:42

-24:00:00

00:24:42

दिल्ली के भूकेन्द्रीय अक्षांस 28-28 N है. तो लग्नारम्भ साधन सारणी में 28-28 उत्तर अक्षांसीय कॉलम देखने से पता चलता है कि बच्चे की लग्न राशी मिथुन है (मिथुन लग्न है) (Gemini Ascendant)

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