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पंचाग के अंग - करण (Part Of Panchang-Karan)
करण तिथि (Karan Tithi) का आधा भाग होता है. तिथि के पूर्वार्द्ध (Purvardha) अर्थात पहले आधे भाग में एक करण.
उत्तरार्द्ध (Uttarardha) यानी दूसरे भाग का एक करण। इस प्रकार एक तिथि में 2 करण होते है। सूर्य और चन्द्रमा के बीच 6º का अन्तर होने से एक करण होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार करण की कुल संख्या 11 होती है।
चर करण् (Char Karan) 1) बव (Bav) 2) बालव (Balab) 3) कौलव (Koulab) 4) तैतिल (Taitil) 5) गर (Gar) 6) वणिज (Vanij) 7) विष्टि (Visti) 8) शकुनि (Shakuni) 9) चतुष्पद (Chatushpada) 10) नाग (Naga) 11) किस्तुध्न (Kimsthughna) नोट: आप कम्पयूटर द्वारा स्वयं जन्मकुण्डली, विवाह मिलान और वर्षफल का निर्माण कर सकते हैं. यह सुविधा होरोस्कोप एक्सप्लोरर में उपलब्ध है. आप इसका 45 दिन तक मुफ्त उपयोग कर सकते हैं. कीमत 1250 रु. जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करे




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