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शनि का पाया या पाव (Shani's Paya)
शनि देव के विषय में आम विचारधारा यह है कि शनि कष्टकारी और अशुभफलदायी ग्रह है। शनि के कोप से बचने हेतु हम आप जाने क्या क्या नहीं करते। अगर आप भी शनि से भयभीत हैं तो आइये जानें शनि का सच।
शनिदेव व्यक्ति को धनहीन, भाग्यहीन व शरीर से लाचार बनाकर पीड़ादायक कष्ट में डाल देते हैं ऐसा कहते हैं कुछ ज्योतिषशास्त्री। वास्तव में इस प्रकार की बातें वे ज्योतिषशास्त्री करते हैं जो आपके डर का लाभ उठाकर धन कामाने की इच्छा रखते हैं। कुशल और विद्वान ज्योतिषशास्त्री कहते हैं यह सत्य है कि शनि की दशा चाहे वह ढईया हो साढ़े साती या महादशा जो नौ वर्ष की अवधि तक रहती है उस दौरान लोगों को कष्ट और काफी मुश्किल हालातों से गुजरना पड़ता है परंतु कई लोगों के लिए यह दशा, महादशा लाभकारी भी होती है।
भारतीय दर्शन में सभी ग्रहों को मानवीय स्वरूप में देखा जाता है अत: उनके भी हाथ पैर और अन्य शरीर के अंग होते हैं। जिस प्रकार हम अपने पैरों से चलकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आते जाते हैं ठीक इसी प्रकार ग्रह भी गोचरवश भ्रमण करते हैं (Planets transit through the zodiac)। ग्रह जिस भाव में पहुंचते हैं उस भाव व राशि के अनुसार हमें फल मिलता है। बात करें शनि देव की तो कुछ स्थानों पर इनके कदम अर्थात इनके पाव या पाया शुभ फलदायी होता है तो कुछ भावों में शनि का पाया होने से कष्ट और अशुभ फल प्राप्त होता है।
ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि गोचर में जब शनि के कदम जन्म राशि से पहले, छठे तथा ग्यारहवें स्थान पर होता है तब यह अत्यंत लाभदायक और शुभ होता है (Saturn is auspicious when it transits through the first, 6th and 11th sign from the birth moon sign)। ज्योतिषशास्त्र में इन स्थानों को शनिग्रह के संदर्भ में सोने का पाया कहा जाता है। इस स्थान पर जब शनि होते हैं तब आपको धन, सम्पत्ति, सुख एवं हर प्रकार से खुशियां ही खुशियां मिलती हैं। जन्म राशि से शनि जब दूसरे, पांचवें या नवम स्थान पर होता है तब भी शनि का शुभ फल आपको मिलता है। इन स्थानों को चांदी का पाया कहा गया है, इस पाया में शनि आपको धन दौलत प्रदान करते हैं व आपको संकटों से बचाये रखते हैं।
सोने और चांदी के पाये के बाद आता है ताम्बे का पाया यह पाया मिला जुला फल प्रदान करता है। इस स्थिति में आपको आर्थिक लाभ होता है तो खर्च की भी अधिकता रहती है। आपको एक ओर खुशियां मिलती है तो दूसरी ओर परेशानियों के लिए भी तैयार रहना पड़ता है परंतु इस अवस्था में मिलने वाला कष्ट अधिक दु:खद नहीं होता है।। शनि का तीसरा पाया तब होता है जब शनि जन्म राशि से तीसरे, सातवें अथवा दसवें स्थान में होता है। शनि का चौथा पाया लोहे का पाया है। चौथा पाया बहुत कष्टकारी और दु:खद कहा गया है। इस पाये में शनि धन की हानि करता है, नौकरी व्यवसाय में नुकसान देता है और शारीरिक रूप से भी कष्ट भोगना पड़ता है। जब शनि जन्म राशि से चौथे, आठवें या बारहवें भाव में रहता है तब लोहे का पाया कहलाता है।
निष्कर्ष के तौर पर हम कह सकते हैं कि शनि की दशा से हमें डरने की जरूरत नहीं है, हमें यह देखने की जरूरत है कि शनि का पाया हमारी कुण्डली में कहां पर है शायद इस समय शनि आपकी कुण्डली में सोने के पाये में हो अत: शनि से घबराएं नहीं।
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