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वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ ग्रह का फल (Placement of Planets in Scorpio Ascendant)

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image Placement of Planets in Scorpio Ascendant

वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल है.सूर्य, चन्द्र, गुरू इस लग्न में कारक ग्रह होते हैं.मंगल भी लग्नेश होने से कारक होता है.अकारक ग्रह के रूप में बुध, शुक्र और शनि मंदा फल देते हैं.लग्न भाव में जब नवग्रह बैठते हैं तो यह किस प्रकार के व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं, एवं किस ग्रह का क्या फल होता है देखिए!

वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ सूर्य (Sun placed in Scorpio Ascendant)
वृश्चिक लग्न की कुण्डली में सूर्य दशमेश होने से कारक ग्रह होता है (Sun becomes a Karak by becoming the lord of the tenth house).मंगल की राशि में लग्नस्थ होकर सूर्य व्यक्ति को आत्मबल प्रदान करता है.यह बुद्धिमान और महत्वाकांक्षी बनाता है.सरकारी पक्ष से लाभ दिलाता है.सूर्य कर्मेश होने से व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिलने की भी प्रबल संभावना रहती है.जिस व्यक्ति की कुण्डली में यह स्थिति होती है उन्हें पिता से सहयोग एवं स्नेह प्राप्त होता है.सप्तम भाव में स्थित शुक्र की राशि वृष पर सूर्य की दृष्टि होने से श्रृंगार एवं सौन्दर्य की वस्तुओं के कारोबार में इन्हें विशेष लाभ मिलता है.जीवनसाथी से वैमनस्य रहता है लेकिन माता से स्नेहपूर्ण सम्बन्ध रहता है.

वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ चन्द्र (Moon placed in Scorpio ascendant)
चन्द्रमा वृश्चिक लग्न की कुण्डली में भाग्येश और त्रिकोणेश होता है.यह इस लग्न के जातक के लिए शुभ फलदायी होता है.लग्न में चन्द्र स्थित होने से व्यक्ति दिखने में सुन्दर और आकर्षक होता है.इनका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है.इनकी धार्मिक भावना गहरी होती है.तीर्थाटन से इन्हें आनन्द प्राप्त होता है.दया और करूणा की भावना भी इनमें रहती है.इन्हें कमर दर्द एवं पित्त रोग की संभावना रहती है.भाग्य के बल से इनका काम आसानी से बनता है एवं मान सम्मान व यश प्राप्त करते हैं.सप्तम भाव पर चन्द्र की दृष्टि होने से सुन्दर और सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त करते हैं.जीवनसाथी से इन्हें सहयोग प्राप्त होता है.

वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ मंगल (Mars placed in Scorpio Ascendant)
वृश्चिक लग्न में मंगल लग्नेश होने से शुभ कारक ग्रह होता है.षष्टम भाव का स्वामी होने से इसका शुभत्व प्रभावित होता है फिर भी लग्नेश होने से शुभ प्रभाव ही देता है.लग्नस्थ होने पर यह विशेष लाभकारी होता है.प्रथम भाव में स्थित होकर यह व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है.यह व्यक्ति को शारीरिक तौर पर शक्तिशाली, परिश्रमी और नीरोग बनाए रखता है.शत्रुओ से ये भयभीत नहीं होते हैं.समाज में इनका सम्मान और आदर होता है.मातृ पक्ष से इन्हें लाभ प्राप्त होता है.लग्नस्थ मंगल चतुर्थ, सप्तम एवं अष्टम भाव को देखता है.मंगल जिस भाव को देखता है उस भाव के फल को पीड़ित करता है फलत: भूमि, भवन एवं वाहन सुख मंदा होता है.माता से भी मेतभेद की संभावना रहती है.जीवनसाथी को कष्ट होता है.वैवाहिक जीवन में कठिनाईयों का सामना करना होता है.

वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ बुध (Mercury placed in Scorpio Ascendant)
बुध शुभ ग्रह होने पर भी इस लग्न में अष्टमेश और द्वादशेश होने से अशुभ और अकारक ग्रह बन जाता है.वृश्चिक लग्न की कुण्डली में बुध लग्नस्थ होने पर व्यक्ति को साहसी एवं ज्ञानी बनाता है (Mercury makes the native bold and knowledgable when placed in Ascendant).बुध के प्रभाव से व्यक्ति खाने पीने का शौकीन होता है.इनके जन्म के पश्चात पिता की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.पिता एवं पिता पक्ष से स्नेह एवं लाभ मिलता है.लग्नस्थ बुध पूर्ण दृष्टि से सप्तम भाव में स्थित शुक्र की राशि वृष को देखता है.इसके प्रभाव से जीवनसाथी एवं संतान से सहयोग प्राप्त होता है.धन संचय करने की कला में निपुण होते हुए भी कई बार अपनी आदतों और शौक के कारण इन्हें आर्थिक कठिनाईयों का भी सामना करना होता है.बुध पाप ग्रह से युत अथवा दृष्ट हो तो गृहस्थ जीवन कलहपूर्ण होता है.खर्च की अधिकता के कारण ऋण भी लेना पड़ता है.

वृश्चिक लग्न में लग्न्स्थ गुरू (Jupiter placed in Scorpio Ascendant)
गुरू वृश्चिक लग्न की कुण्डली में द्वितीयेश और पंचमेश होता है.द्वितीयेश होने से इसका शुभत्व प्रभावित होता है (Jupiter's auspiciuosness is effected when it becomes the lord of the second house when Ascendant is Scorpio) लेकिन त्रिकोणेश होने से कारक ग्रह का फल देता है.इस लग्न की कुण्डली में गुरू अगर लग्नस्थ होता है तो व्यक्ति दिखने में सुन्दर और आत्मविश्वास से परिपूर्ण होता है.गुरू के प्रभाव से उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त करते हैं और बुद्धिमान होते हैं.वाणी प्रभावशाली होती है.भविष्य के लिए धन संचय करने की प्रवृति के कारण आमतौर पर इनका जीवन सुख और आनन्द में व्यतीत होता है.लग्नस्थ गुरू अपनी पूर्ण दृष्टि से पंचम, सप्तम और नवम भाव को देखता है.गुरू की दृष्टि से व्यक्ति धनवान, संतानवान और सम्मानित होता है.जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होता है.

वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ शुक्र (Venus placed in Scorpio Ascendant)
शुक्र वृश्चिक लग्न की कुण्डली में सप्तमेश और द्वादशेश होने से अकारक और अशुभ ग्रह के रूप में कार्य करता है.शुक्र कुण्डली में लग्नस्थ होता है तो शरीर और व्यवहार पर विपरीत प्रभाव डालता है.स्वास्थ्य की हानि करता है.मानसिक रूप से परेशान करता है.व्यक्ति को कामी और विलासी बनाता है.लग्नस्थ शुक्र पूर्ण दृष्टि से सप्तम भाव में स्वराशि वृष को देखता है.जीवनसाथी से मतभेद होता है.जीवनसाथी का स्वास्थ्य प्रभावित होने से कष्ट होता है.साझेदारों से हानि होती है.वस्त्र, श्रृंगार और सुगंधित पदार्थो के कारोबार से इन्हें लाभ होता है.कृषि से सम्बन्धित कारोबार भी इनके लिए लाभप्रद होता है.

वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ शनि (Saturn placed in Scorpio Ascendant)
वृश्चक लग्न की कुण्डली में शनि तृतीयेश और चतुर्थेश होने से अकारक ग्रह हो जाता है.जिस व्यक्ति की कुण्डली में यह प्रथम भाव में होता है उन्हें स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना होता है (Saturn in Scoprio ascendant causes health related problems).इन्हें सरकारी पक्ष से कष्ट होता है.दुर्घटना की संभावना रहती है.स्त्रियों की कुण्डली में वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ शनि संतान के विषय में कष्टकारी होता है.प्रथमस्थ शनि तृतीय, सप्तम एव दशम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है.शनि की दृष्टि फल से भाईयो से सहयोग प्राप्त होता है.विपरीत लिंग वाले व्यक्तियो से लाभ मिलता है.कई प्रेम प्रसंग होते है.ससुराल पक्ष से लाभ होता है परन्तु जीवनसाथी से वैमनस्य रहता है.

वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ राहु (Rahu placed in Scorpio Ascendant)
इस लग्न की कुण्डली में राहु लग्नस्थ होने से व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा देता है.स्वास्थ्य की हानि करता है.राहु की दशावधि में रोग की संभावन रहती है.इससे प्रभावित व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी रहती है.लग्नस्थ राहु पंचम, सप्तम एवं नवम भाव पर दृष्टिपात करता है (Rahu aspects the fifth and the seventh house form ascendant).राहु की दृष्टि से व्यक्ति को रोजगार एवं कारोबार में कठिनाईयों का सामना करना होता है.अचानक हानि की संभावना रहती है.इनके कई प्रेम प्रसंग होते हैं.वैवाहिक जीवन में कठिनाईयों का सामना करना होता है.जीवनसाथी से विवाद और मुनमुटाव होता है.

वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ केतु (Ketu placed in Scorpio Ascendant)
केतु वृश्चिक लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ होने से व्यक्ति आमतौर पर स्वस्थ रहता है.केतु के प्रभाव से व्यक्ति शारीरिक तौर पर शक्तिशाली और सुदृ़ढ होता है.सामाजिक प्रतिष्ठा एवं मान सम्मान प्राप्त होता है.मातृपक्ष से स्नेह और सहयोग मिलता है.पंचम, सप्तम एवं नवम भाव केतु से दृष्ट होने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है.जीवनसाथी और संतान के संदर्भ में कष्ट की अनुभूति होती है.

Comments (17 posted):

ankur on 10 May, 2009 09:35:24
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muze makar lagna k bare me details chahiye agar apke pas kuch vishes details uplabdh ho to krupaya web pe rakhiye
sanjeev Abrol on 13 May, 2009 05:05:10
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meri brichak lagna ki kundli hai,,meri kundli ke 12th house mein surya,mangal,rahu,budh hai,,pls tell me some predictions
Ramesh Sharma on 19 May, 2009 02:52:01
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Meri brichak lagan ki kundly hai.Or 12th house main Chader hai.pls tell me predictionsplz
mahesh on 20 May, 2009 04:18:54
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how can i download the information provided on this site?
nirmal.kaur on 13 June, 2009 03:01:51
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meri brichak rashi hai mai bhout BADDHI COMPANY MAI JANA CHATTI HU BUT NAHI HO PA REHA MAI PEHLE RELAINCE MAI THE BUT MERI NUKRI VHA SE CHUTT GYE HAI MAI FIR VAPIS JA SAKAGE JA NAI PLZ CONFIRM
abhishek sharma on 13 June, 2009 08:39:46
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meri vrischik lagna ki kundli hai surya mangal ,budh,10th house main hai.mangal ast. nahin hai.chandra & shukra 9th house main hain,sani&ketu 12th house main hain,Guru 3rd house main vakri hai.Rahu 6th house main hain.Shukra Mahadasha main RAhu aney valey hain 12/09/2009.mujhey mere career ko leke puchna tha aur kya mujhey business karna chahiye.ThankYou Sir
shammi beri on 16 June, 2009 01:53:46
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mera name shammi beri hai. mera date of birth 14 novc1986 hai time 02:45 am hai place hoshiarpur hai muje mera pyar wapis mil jaye ga humare bich kafi aan ban ho chuki hai wo muje dobra kab tak mil paye ga
mera name surendra basnet on 20 June, 2009 09:22:07
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mera bhavi jeevankestra bita jata ha mera padai kistra hojataya mera birth
nepali b.s 2049/01/09
REKHA on 09 July, 2009 01:48:10
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MYHUS DATE 15/3/1953,TIME11;17 PLAS JODHPUR(RAS)HE IS FIT TO ME&MY PRESENT.I AM NOTGOINGTOMY PRESENT HOUSE
surender saini on 15 July, 2009 05:55:59
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name-surender
D.O.B-06-10-1984
TIME-10:40 AM
PLACE -HISAR (HARYANA)
MERI SHADI ME BHOT DIKET AA RAHI HE MERI SHADI KAB TAK HO JAYAGI
nitin on 20 August, 2009 05:25:19
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what is treatment of makar rashi in sun and jupitar 3 house in scorpio lagna
neema bhatt on 07 September, 2009 11:58:02
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meri shadi tay ho rahi hai to mera shadi ka jeeven kasa betaga
nandlal sharma on 22 September, 2009 05:53:04
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my name is nandlal sharma date of birth 02-07-1982, born on kasauli distt - solan himachal pardesh.
Navneet Kumar Sonkar on 22 September, 2009 10:00:37
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Name Navneet kumar sonkar
D.O.B.03-02-1987
Time 11:40
Place: Varanasi
Meri Sarkari Naukri kab tak lagegi aur Hamari Shadi kab tak hogi
manojsingh on 03 December, 2009 04:59:29
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mera naam manoj singh hai.meri date of birth 12-marc-1981 time-12:32am birth place almora uttrakahnd. merivrischik lagna ki kundali hai.muje thik jab nahi mil pa rahi hai. me jaan sakta hu ki muje thik jab milegi ya nahi ?
vinod on 19 July, 2010 07:05:01
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mujhe aap ki ye web site achhchi lagi
hai
main is se prabhavit hua hu

kya aap mere bussines ke bare main bata sakte hai kya mera birth time 01-12-1982 ,6.15am kanpur up
Narendra Singh Negi on 14 September, 2010 12:58:47
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mujhe aap ki ye web site achhchi lagi
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main is se prabhavit hua hu

kya aap mere bussines ke bare main bata sakte hai kya mera birth time

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