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ज्योतिष में पंच पक्षी का मूलभूत सिद्धान्त (Principle of Panchpakshi in Astrology)

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image Principle of Panchpakshi in Astrology

दक्षिण भारतीय ज्योतिष सिद्धान्त में समय को पांच भागों में बॉटा गया है। समय का विभाजन पक्षी के रूप में किया गया है। इस सिद्धांत के अनुसार हम जब कोई कार्य करते हैं उस समय जिस पक्षी की स्थिति होती है उसी के अनुरूप हमें फल मिलता है। ज्योतिष का यह सिद्धान्त पंच पक्षी के नाम से जाना जाता है।

जीवन में कई अवसर ऐसे आते हैं जब हमें एहसास होता है कि कोई विशेष शक्ति काम कर रही है जिससे अमुक काम आसानी से सम्पन्न हो गया। इसी प्रकार कई मौके ऐसे भी आते है जब लाख कोशिशों के बावजूद भी हमें अपनें प्रयास में सफलता नहीं मिलती है। यह ऐसी स्थिति होती है जब हमें एहसास होता है कि कोई अज्ञात शक्ति है जो हमारे कार्यों में सफलता और असफलता का निर्घारण करती है। ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि से इस विषय पर रोशनी डालने से ज्ञात होता है कि जीवन में घटने वाली तमाम घटनाओं का फल ग्रहों की गति एवं राशियों पर निर्भर करता है।
दक्षिण भारत के विद्वान संतों ने ज्योतिषशास्त्र में पंच पक्षी नामक एक ऐसी विधा को जन्म दिया जिसके तहत बताया गया कि जीवन में अगर सही समय पर आप कोई काम करते हैं तो आपको सफलता मिलती है। आपके लिए कौन सा समय सही है यह निर्घारण पंच पंक्षी से करके अगर आप काम करें तो आपको कामयाबी मिलने की संभावना अधिक रहती है।

पंच पक्षी सिद्धान्त के अन्तर्गत आने वाले पांच पंक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और मोर (The five panch-pakhshis are Owl, Crow, Vulture, Rooster and Peacock)। इन पांचों पंक्षियों के लिए बराबर समय निर्घारित किया गया है। समय निर्धारण में हरेक पक्षी का काल 2 घंटा 24 मिनट होता है। पूरे दिन में पांचों पक्षियों का समय बारी बारी से आता है। रात के समय भी पक्षियों का क्रम इसी प्रकार चलता है। आपके लग्न, नक्षत्र, जन्म स्थान के आधार पर आपका पक्षी ज्ञात किया जाता है।

इस सिद्धान्त का निर्घारण करते समय तमिल विद्वानों ने ग्रहों की गति एवं चन्द्र की कलाओं पर सूक्ष्मता से अध्ययन किया। अपने अध्ययन से विद्वानों ने एक निचोड़ पाया कि ग्रहों की गति  और चन्द्रमा की कला जो सूर्य से इसकी निकटता और दूरी पर निर्भ्रर करती है इनका भचक्र में मौजूद 12 राशियों एवं 27 नक्षत्रों पर प्रभाव होता है जिनसे हरेक व्यक्ति पर एक ही समय में अलग अगल प्रभाव पड़ता है।

विद्वानों ने अपने अध्ययन में यह भी पाया कि चन्द्रमा अपने चक्र में जैसे जैसे बढ़ता है और घटता है उसमें पांच प्रकार के अलग अलग प्रभाव उत्पन्न होते हैं। अध्ययन से उन्होंने यह भी जाना कि जो व्यक्ति इस धरती पर पैदा होता है उस पर सभी नौ ग्रहों का प्रभाव जीवन पर्यन्त बना रहता है। इन ग्रहों के गुण और चरित्र का भी हम पर अचेतन रूप से प्रभाव बना रहता है। हम अगर इस तथ्य को समझ लें कि ग्रह नक्षत्र और राशियों के संयोग से हम पर किस प्रकार का प्रभाव बन रहा है तो हम अपने कार्य में आसानी से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। पंच पक्षी का आधारभूत सिद्धांत यही है कि जब सभी प्रभावकारी तत्व अपने उच्चावस्था में होते हैं उस समय अगर हम अपने लक्ष्य की दिशा में बढें तो कामयाबी का सेहरा सर पर होगा।

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