Home | वैदिक ज्योतिष | राहु-कालम : शुभ कार्यो में विशेष रुप से त्याज्य (Rahu Kalam: Aboondoned for Auspicious Events)

राहु-कालम : शुभ कार्यो में विशेष रुप से त्याज्य (Rahu Kalam: Aboondoned for Auspicious Events)

Font size: Decrease font Enlarge font
image Rahu Kalam

समय के दो पहलू है. पहले प्रकार का समय व्यक्ति को ठीक समय पर काम करने के लिये प्रेरित करता है. तो दूसरा समय उस काम को किस समय करना चाहिए इसका ज्ञान कराता है. (The first phase acts as a guide while in the second phase even the seconds are considered to determine the position of Moon or to obtain the period of Rahu Kaal.) पहला समय मार्गदर्शक की तरह काम करता है. जबकि दूसरा पल-पल का ध्यान रखते हुये कभी चन्द्र की दशाओं का तो कभी राहु काल की जानकारी देता है.

राहु-काल का महत्व :(The Importance of Rahu-Kaal)
(Rahu-Kal makes the person alert that this time is not auspicious for him) राहु-काल व्यक्ति को सावधान करता है. कि यह समय अच्छा नहीं है इस समय में किये गये कामों के निष्फल होने की संभावना है. इसलिये, इस समय में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाना चाहिए. कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है की इससे किये गये काम में अनिष्ट होने की संभावना रहती है. 

दक्षिण भारत में प्रचलित:(Popular in the South India)
राहु काल का विशेष प्रावधान दक्षिण भारत में है. (Rahu Kalam  occurs for 1 and 1/2 hour on a certain time in a day of the week which is inauspicious for performing any good and inauspicious event) यह सप्ताह के सातों दिन निश्चित समय पर लगभग डेढ़ घण्टे तक रहता है. इसे अशुभ समय के रुप मे देखा जाता है. इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को  यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है. 

राहु काल अलग- अलग स्थानों के लिये अलग-2 होता है. इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है. इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है.

दिन के आठ भाग :( The Eight Parts of a Day)
सप्ताह के पहले दिन के पहले भाग में कोई राहु काल नहीं होता है (Rahu kaal does not occur in the first part of a day)  . यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनि को तीसरे, शुक्र को चौथे, बुध को पांचवे, गुरुवार को छठे, मंगल को सांतवे तथा रविवार को आंठवे भाग में होता है. (It is fixed for every week) यह प्रत्येक सप्ताह के लिये स्थिर है. राहु काल को राहु-कालम् नाम से भी जाना जाता है.

सामान्य रुप से इसमें सूर्य के उदय के समय को प्रात: 06:00 बजे का मान कर अस्त का समय भी सायं काल 06:00 बजे का माना जाता है. 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है. प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है. वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है.

एक दम सही भाग निकालने के लिये सूर्य के उदय व अस्त के समय को पंचाग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाला जाता है. इससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना नहीं के बराबर रहती है. 

संक्षेप में यह इस प्रकार है:-

  • 1. सोमवार :(Rahu Kalam occurs between 7:30 a.m to 9:00 a.m) सुबह 7:30 बजे से लेकर प्रात: 9.00 बजे तक का समय इसके अन्तर्गत आता है.
  • 2. मंगलवार : राहु काल दोपहर 3:00 बजे से लेकर दोपहर बाद 04:30 बजे तक होता है.
  • 3. बुधवार: राहु काल दोपहर 12:00 बजे से लेकर 01:30 बजे दोपहर तक होता है.
  • 4. गुरुवार : (Rahu Kaalam occurs between 01:30 a.m to 3:00 a.m.) राहु काल दोपहर 01:30 बजे से लेकर 03:00 बजे दोपर तक होता है.
  • 5. शुक्रवार : राहु काल प्रात: 10:30 से 12:00 बजे तक का होता है.
  • 6. शनिवार: राहु काल प्रात: 09:00 से 10:30 बजे तक का होता है.
  • 7. रविवार: राहु काल सायं काल में 04:30 बजे से 06:00 बजे तक होता है.

राहु काल (Rahu Kalam) के समय में किसी नये काम को शुरु नहीं किया जाता है परन्तु ( the work you may start before Rahu-Kalam should not be left incomplete during Rahu-Kaalam) जो काम इस समय से पहले शुरु हो चुका है उसे राहु-काल के समय में बीच में नहीं छोडा जाता है. कोई व्यक्ति अगर किसी शुभ काम को इस समय में करता है तो यह माना जाता है की उस व्यक्ति को किये गये काम का शुभ फल नहीं मिलता है. उस व्यक्ति की मनोकामना पूरी नहीं होगी. अशुभ कामों के लिये इस समय का विचार नहीं किया जाता है. उन्हें दिन के किसी भी समय किया जा सकता है.

Comments (0 posted):

Post your comment comment

Please enter the code you see in the image: