:
Home | वैदिक ज्योतिष | ग्रहों की शक्ति का मापक है 'षड्बल' (Shadbala is scale of Planet Strength)

ग्रहों की शक्ति का मापक है 'षड्बल' (Shadbala is scale of Planet Strength)

Font size: Decrease font Enlarge font

ग्रह बलवान होने से फल के परिणाम उत्तम और श्रेष्ठ प्राप्त होते हैं। कुण्डली में ग्रहों की क्या स्थिति है और वे कितने बलशाली हें इनका आंकलन करने के लिए ज्योतिषशास्त्र  में गणितीय ज्योतिष के 'षड्बल' का प्रयोग किया जाता है अर्थात षड्बल से ज्ञात किया जाता है कि कौन से ग्रह कितने बलशाली हैं।

ग्रहों की शक्ति को देखने के लिए यह गौर किया जाता है कि ग्रह किस भाव में उपस्थित हैं। ग्रहों की शक्ति का आंकलन करने के लिए यह भी विचार करना होता है कि ग्रह अस्त या नीचस्थ तो नहीं हैं। ग्रह वक्री तो नहीं और ये शत्रु राशि में तो नहीं हैं। ज्योतिषशास्त्रियों का मत है कि ग्रहों की शक्ति को मापने का सबसे बेहतर तरीका है षड्बल। षड्बल के मुख्य रूप से 6 भाग होते हैं(There are mainly 6 types of Shadbala)। ग्रहों की शक्ति का आंकलन इन सभी भागों से गणना करके ज्ञात किया जाता है।

षड्बल की सार्थकता: (Significance of Shadbala)
ज्योतिषशास्त्र में षड्बल की सार्थकता से इनकार नहीं किया जा सकता है (We can't ignore Shadbala in Astrology)। षड्बल से ही ज्ञात होता है कि कौन से ग्रह किस भाव में रहकर आपके लिए किस प्रकार की स्थिति को जन्म दे रहे हैं। कौन से ग्रह आपकी कुण्डली में कितने बलवान हैं और आपको उनका कितना सहयोग और समर्थन मिल रहा है।

कुण्डली से फल ज्ञात करने हेतु इस बात की जानकारी भी आवश्यक होती है कि भाव का स्वामी मज़बूत है अथवा नहीं। भाव स्वामी के आधार पर और उनकी स्थित पर ही सही फलादेश निकाला जा सकता है। अगर ये कमज़ोर होंगे तो परिणाम भी  उसी के अनुरूप कमज़ोर या अशुभ प्राप्त होगें। षड्बल में यह भी देखा जाता है कि आपके लिए कौन सी दिशा लाभप्रद है। दिशा की स्थिति का ज्ञान हमें षड्बल के 6 भागों में से एक भाग जिसका नाम 'दिग बल' है वह बताता है।

ग्रहों का बल आंकलन (Calculation of planet strength):
अब तक के अध्ययन से हम यह जान गये हैं कि षड्बल मुख्य रूप से 6 बलों का योग है। इन 6 बलों के  कई उपभाग भी हैं। ग्रहों का बल ज्ञात करने हेतु गणितीय विधि अपनायी जाती है। बलों को रूप और विरूप में जोड़ा जाता है। एक रूप में 60 विरूप होते हैं। कई स्रोतों में इनका मूल्यांकण 0 विरूप से 60 विरूप के मध्य किया जाता है आप विरूप को अंक भी मान सकते हैं। द्रेष्कोण बल में इनका पूर्ण मूल्य 30 अंक होता है।  

जानें कितने प्रकार के होते हैं षडबल (Type of Shadbala):
ज्योतिषशास्त्र में मूल रूप से 6 प्रकार के षड्बल हैं और इनके कई उप बल भी हैं आइये इन्हें देंखें। 1. स्थान बल: इसके कई उप बल हैं जैसे सप्तवर्ग बल, उच्च बल, दिन रात्रि बल, केन्द्रादि बल, दृक्कन बल। 2. दिगबल 3. कालबल: काल बल के भी कई उपवर्ग हैं जैसे नतोन्नत बल, पक्ष बल, त्रि-भाग बल, वर्ष-मास-दिन-होरा बल, युद्ध बल, आयन बल। 4.चेष्टा बल 5. नैसर्गिक बल  6. दृग बल।

नोट:  आप कम्पयूटर द्वारा स्वयं जन्मकुण्डली, विवाह मिलान और वर्षफल का निर्माण कर सकते हैं. यह सुविधा होरोस्कोप एक्सप्लोरर में उपलब्ध है. आप इसका 45 दिनों तक मुफ्त उपयोग कर सकते हैं. कीमत 1250 रु. जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करे