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शनि ताजिक ज्योतिष में (Shani in Tajik Jyotish)

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image Shani in Tajik Jyotish

यूनानी ज्योतिष विधि जिसे ताजिक ज्योतिष (Tajik Jyotish) कहते उसमें भी शनि के विभिन्न भाव के फलों का जिक्र किया गया है.

शनि को लेकर कई प्रकार की कथाएं एवं मान्यताएं ज्योतिष और हिन्दु शास्त्रों में है.सभी ने शनि को पीड़ादायक और कष्टकारी ग्रह के रूप में ही बताया है.इस धारणा के कारण शनि के प्रति लोगों के मन में एक भय बना हुआ है.कुण्डली 12 घरों में शनि की उपस्थिति भी अटल सत्य है और उसका फल भी निश्चित है तो देखिये शनि आपके लिए कैसा है.

ज्योतिष विधा के अनुसार शनि जिस घर में होता है वहां से तीसरे और दसवें भाव को एक चरण तथा पूर्ण दृष्टि से देखता है.चौथे भाव को 1/2 दृष्टि से, पांचवें एवं नवें भाव को दो चरण दृष्टि से, सातवें भाव को पूर्ण दृष्टि से और आठवें भाव को 1/2 दृष्टि से देखता है.शनि की यह दृष्टि ही अति प्रलयंकारी है कुपित होकर जिसे भी शनि देव देखते हैं वह कष्ट और पीड़ा भोगने के लिए मजबूर होता है.शनि की पीड़ा से बचाव के लिए ज्योतिषशास्त्र में कुछ उपाय बताये गये हैं, जिनका नियम पूर्वक पालन करने से शनि के कुप्रभाव में कमी आती है.

यूनानी ज्योतिष विधि जिसे ताजिक ज्योतिष (Tajik Jyotish) कहते उसमें भी शनि के विभिन्न भाव के फलों का जिक्र किया गया है. ताजिक ज्योतिष के अनुसार शनि जब लग्न में होता है तब यह शारीरिक कष्ट देता है और अनावश्य धन हानि का कारण बनता है.जिनकी कुण्डली में शनि द्वितीय भाव में होता है उन्हें राजकीय क्षेत्र से पीड़ा या उनसे परेशानी होती है, इन्हें सरकार से दंड या यातना मिलने की भी संभावना रहती है.द्वितीय भाव का शनि कार्यों में बाधा और असफलता देता है.

ताजिक ज्योतिष के अनुसार शनि का तीसरा भाव में होना शुभ रहता है.इस भाव में शनि धन की स्थिति को मजबूत बनाता है और आर्थिक लाभ देता है.राजकीय पक्ष में सफलता एवं सरकार से सहयोग दिलाने में तीसरे भाव का शनि मददगार होता है.शनि इस भाव में अधर्म से बचाता है और धार्मिक विचारों का संचार करता है.जन्मपत्री में चतुर्थ भाव सुख का घर कहा जाता है.चतुर्थ भाव में जिनके शनि होता है उनके जीवन का सुख चैन छिन जाता है.धन का निर्थक व्यय होता रहता है और व्यक्ति को आर्थिक संकट का सामना करना होता है.शारीरिक रूप से क्षीण एवं बुरी आदतों का साथी भी इस भाव का शनि बनाता है.

पंचम भाव में जिनके शनि होता है उनके घर में चोरी होने की संभावना रहती है.आर्थिक तंगी और रोग से व्यक्ति परेशान होता है.पंचम भाव संतान का घर होता है इस भाव में शनि के होने से संतान पक्ष से व्यक्ति को कष्ट होता है.शनि का षष्टम भाव में होना धन लाभ दिलाता है एवं शत्रु पीड़ा से बचाव करता है.सप्तम भाव को वैवाहिक और जीवनसाथी का घर कहा जाता है.इस भाव में शनि का मतलब गृहस्थ जीवन की असफलता का संकेत होता है.अष्टम भाव का शनि शारीरिक और मानसिक कष्ट देता है.आर्थिक मामलो के लिए भी इस भाव का शनि कष्टकारी होता है.

नवम भाव में शनि की उपस्थिति से भाई बहनों को तकलीफ होती है.जिनकी कुण्डली में शनि नवम में होता है उन्हें पशु के कारोबार में हाथ नहीं डालना चाहिए.दशम भाव में जिनके शनि हो उन्हें भी पशु सम्बन्धी कारोबार में हाथ नहीं डालना चाहिए.इस भाव शनिदेव की मौजूदगी आर्थिक पक्ष से ही कमज़ोर बनाता है.धन के लिए इस भाव का शनि शुभ फलदायी नहीं होता.एकादश भाव का शनि धन की स्थिति को मजबूत करता है और जीवन में आर्थिक कष्ट महसूस नहीं होने देता.एकादश भाव का शनि मित्रों से सहयोग एवं लाभ दिलाने वाला होता है.इस भाव में जिनके शनि होता है वे आमतौर पर जल्दी बीमार नहीं होते हैं.द्वादश भाव खर्च का घर होता है इस भाव में शनि की स्थिति का मतलब अत्यधिक व्यय होना है.द्वादश भाव का शनि खर्च तो करवाता है परंतु यह कार्यों में सफलता भी दिलाता है.

ताजिक ज्योतिष उपाय (Tajik Jyotish Remedies)
यूनानी ज्योतिष विधि में शनि के विभिन्न भावों में उपस्थिति के अनुसार इसके कुछ उपाय बताए गये हैं जैसे प्रथम भाव शनि दोष को शांत करने के लिए शनिवार के दिन सरसो तेल का दान करना चाहिए.माथे पर दूध या दही का तिलक लगाना चाहिए.द्वितीय भाव में शनि की शांति के लिए शनिवार के दिन आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को देना चाहिए.कच्चा दूध शनिवार के दिन कुएं में डालना चाहिए.तृतीय भाव में शनि होने पर शराब और मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए.काले कुत्ते को सरसों तेल लगी हुई रोटी खिलाएं.चतुर्थ भाव में शनि की स्थिति होने पर बहती नदी में शराब प्रवाहित करना चाहिए.रात में दूध नहीं पीना चाहिए.पंचम भाव में शनि स्थिति होने पर काला कुत्ता पालना चाहिए.सौंफ, गुड़ शहद, चांदी, तांबा नवीन वस्त्र में लपेट कर घर के अंधेरे कोने में रखना चाहिए.षष्ठम भाव में शनि की स्थिति होने पर कृष्णपक्ष मे प्रत्येक शनिवार का व्रत रखना चाहिए.शनिवार के दिन नदी में बादाम प्रवाहित करना चाहिए.

सप्तम भाव में जिनके शनि मौजूद हो उन्हें संयम रखना चाहिए.शराब एवं मांस मछली के सेवन से परहेज रखना चाहिए.काली गाय की सेवा करनी चाहिए.अष्टम शनि होने पर मांसाहार से परहेज करना चाहिए एवं सोमवार के दिन नदी में दूध प्रवाहित करना चाहिए.नवम भाव मे शनि की उपस्थिति होने पर शनि की शांति के लिए मकान की छत पर घर की बेकार चीज़ों को जमा नहीं करना चाहिए एवं गुरूवार के दिन बृहस्पति भगवान का व्रत एवं पूजा करनी चाहिए.दशम भाव में शनि के कोप को कम करने के लिए गणपति की आराधना करनी चाहिए.अंधे व्यक्ति की सेवा एवं मदद करनी चाहिए.

एकादश भाव में शनि यूं तो शुभ माना जाता है.इसकी शुभता को बनाये रखने के लिए शनिवार के दिन शनि देव का व्रत रखना चाहिए.मन और इन्द्रियों पर संयम रखना चाहिए.घर में चांदी का ईट बनवाकर रखने से भी शनि का विपरीत प्रभाव नहीं होता है.द्वादश भाव में शनि की शुभता के लिए शाकाहारी भोजन करें, सत्य व्रत का पालन करें और मकान के पीछे की ओर खिड़की या दरवाजा न बनाएं.

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Comments (1 posted):

sanjay kumar paswan on 16 April, 2009 01:35:18
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