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स्थान बल के प्रकार, 'भाग दो' (Sthana Bala Part-2)
दिवा रात्रि बल (Diva Ratri Bala) :
दिवा रात्रि बल ग्रहों के राशीश और नवमांश के सम और विषय स्थान पर स्थिति के विषय में बताते है (Diva-ratri bala is assessed by considering its position in even odd signs)। इसके अन्तर्गत स्त्री राशि जैसे चन्द्र और शुक्र 15 अंक प्राप्त करते हैं जबकि ये ग्रह राशि और नवमांश में सम होते हैं ( Female sign like Moon and Venus get 15 Points when they are placed in even Rasis or Navamsas)। अन्य स्थति में इन्हें शून्य अंक प्राप्त होता है। पुरूष ग्रह जैसे सूर्य, मंगल और बृहस्पति तटस्थ होते हैं व बुध एवं शनि 15 अंक प्राप्त करते हैं जबकि, ये गह विषम राशि और नवमांश में होते हैं। अन्य स्थिति में इन ग्रहों को शून्य अंक प्राप्त होता है। यह गणना राशि और नवमांश चार्ट के लिए अलग अलग किये जाने चाहिए इससे ग्रह अधिकतम शक्ति अर्थात 30 अंक तक प्राप्त कर लेते हैं। इन तथ्यो को समझने के लिए आप एक उदाहरण देख सकते हैं। मान लीजिए चन्द्रमा प्रथम भाव यानी मीन राशि में है। यहां चन्द्रमा विषम राशि में हाने से 15 अंक प्राप्त करता है और नवमांश स्त्री अर्थात कर्क होने से 15 अंक प्राप्त करते है। इस स्थिति में दिवा रात्रि बल कुल तीस होगा।
केन्द्रादि बल (Kendradi Bala):
केन्द्रादि बल स्थान बल का चतुर्थ भाग है (Kendradi bala is the fourth part of Sthana Bala)। केन्द्रादि बल कुण्डली में स्थित ग्रहों के बल का आंकलन करने में सहायक होता है। केन्द्रादि बल नाम से भी स्पष्ट होता है कि यह केन्द्र सहित कुण्डली में पनफर और अपोक्लिम में स्थित ग्रहों के बल को दिखाता है (Kendradi bala locates the bala of Planets situated in Kendra, Panphara or Apoklima houses)। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार केन्द्रादि बल का सिद्धांत यह है कि, वे ग्रह जो केन्द्र में होते हैं वे सबसे बलशाली होते हैं इसलिए उन्हें 60 अंक दिये जाते हैं। पनफर में स्थित ग्रहों को 50 प्रतिशत यानी 30 अंक प्रदान किये जाते हैं और जो ग्रह अपोक्लिम में होते हैं उन्हें 25 प्रतिशत यानी 15 अंक मिलते हैं। इस बल के अन्तर्गत स्त्री और पुरूष ग्रहों के बीच किसी प्रकार का कोई विभेद नहीं होता है।
केन्द्रादि बल में विभिन्न भावों में ग्रहों के बल को आप यहां चार्ट में देख सकते हैं।
प्रकार
भाव
शक्ति
केन्द्र (Angle)
1, 4, 7, 10
60
पनफर (Panaphara)
2, 5, 8, 11
30
अपोक्लिम (Apoklima)
3, 6, 9, 12
1
द्रेष्कोण बल (Dreccan Bala):
द्रेष्कोण बल राशीश के डेकानेट पर ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है (Drekkana Bala is based upon placement of planets in decanates or Rasis)।
द्रेष्कोण बल में पुरूष ग्रह जैसे सूर्य, मंगल और शनि पहले डेकानेट में 15 अंक प्राप्त करते हैं (Male Planets like Sun, Mars and Saturn get 15 points in first decanates of Dreccan Bala)। स्त्री ग्रह दूसरे डेकानेट मे और तटस्थ ग्रह तीसरे डेकानेट में यह अंक प्राप्त करते हैं। यहां स्त्री पुरूष राशि में कोई विभेद नहीं किया गया है।
आसानी से द्रेष्कोण को समझ सकें इसलिए यहां अपकी सुविधा के लिए चार्ट दिया गया हैं। राशि की स्थिति से द्रेष्कोण बल आप यहां देख सकते हैं।
ग्रह/डिग्री
0° - 10°
10° - 20°
20°- 30°
सूर्य, मंगल, बृहस्पति
15
0
0
चन्द्रमा, शुक्र
0
15
0
बुध, शनि
0
0
15
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