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तुला लग्न में लग्नस्थ नवग्रह (The placement of planets in Libra)
तुला लग्न का स्वामी शुक्र है.इस लग्न में जन्म लेने वाले व्यक्ति दिखने में सुन्दर होते हैं.ये सत्यवादी और अनुशासनप्रिय होते हैं.इनमें परोपकारिता की भावना रहती है.गृहस्थ जीवन भी आमतौर पर खुशहाल होता है.इस लग्न में प्रथम भाव मे स्थित ग्रह के कारण अलग अलग व्यक्तियों को अलग अलग अनुभूति होती है.
तुला लग्न में लग्नस्थ सूर्य (Sun in Libra ascendant)तुला लग्न की कुण्डली में सूर्य एकादश भाव का स्वामी होने से अकारक ग्रह होता है (Sun becomes a malefic force in the kundali of libra ascendant).शत्रु की राशि में लग्न में बैठा सूर्य व्यक्ति को नेत्र सम्बन्धी रोग देता है.आय भाव का स्वामी होने से बार बार आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है.आय के साधनों में कमी लाता है.लग्न में सूर्य के साथ पाप ग्रहों की युति हो अथवा पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो व्यक्ति उग्र और क्रोधी स्वभाव का होता है.प्रथम भाव में स्थित सूर्य अपनी सप्तम दृष्टि से सप्तम भाव में स्थित मेष राशि को देखता है.सूर्य की दृष्टि मंगल की राशि पर होने से व्यक्ति साहसी और पराक्रमी होता है.इनका विवाह विलम्ब से होता है एवं जीवनसाथी से सहयोग का अभाव रहता है।
तुला लग्न में लग्नस्थ चन्द्रमा (Moon placed in Libra Ascendant)
चन्द्र तुला लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ होने से व्यक्ति का बचपन संघर्षमय और कठिन होता है.युवावस्था एवं वृद्धावस्था सुख और आनन्द से गुजरता है.चन्द्र इन्हें गुणी और विद्वान बनता है.इनका मन कल्पनाशील एवं अस्थिर होता है.कन्या लग्न की कुण्डली में चन्द्र अगर लग्नस्थ होता है तो माता के साथ स्नेहपूर्ण सम्बन्ध की संभावना कम रहती है.इन लग्न में चन्द्र दशमेश होकर अशुभ कारक होता है.सप्तम भाव पर इसकी दृष्टि होने से जीवनसाथी क्रोधी, साहसी एवं महत्वाकांक्षी होता है.लग्नस्थ चन्द्र अगर शुभ ग्रहों से युत अथवा दृष्ट हो तो सप्तम भाव से सम्बन्धित उत्तम फल प्राप्त होता है.
तुला लग्न में लग्नस्थ मंगल (Mars placed in Libra Ascendant)
तुला लग्न की कुण्डली में मंगल द्वितीय और सप्तम भाव का स्वामी होता है.प्रथम भाव में स्थित मंगल व्यक्ति को द्वितीयेश होने के कारण आर्थिक लाभ प्रदान करता है (Mars placed in the first house becomes the lord of the second house).व्यापार एवं कारोबार में अच्छी सफलता देता है.स्वतंत्र कार्य करने से इन्हें लाभ मिलता है जबकि साझेदारी में नुकसान की अधिक संभावना रहती है.लग्नस्थ मंगल अपनी पूर्ण दृष्टि से चतुर्थ, सप्तम एवं अष्टम भाव को देखता है.सुख भाव मंगल से दृष्ट होने के कारण भाईयों से अपेक्षित सहयोग का अभाव होता है.पूर्ण भौतिक सुख मिलने की संभावना कम रहती है.वैवाहिक जीवन में कठिनाईयां आती हैं.अष्टम भाव पीडि़त होने से मंगल की दशावधि में स्वास्थ्य स्म्बन्धी परेशानियों का सामना करना होता है.
तुला लग्न में लग्नस्थ बुध (Mercury placed in Libra Ascendant)
बुध तुला लग्न की कुण्डली में नवमेश और द्वादशेश होता है.यह इस लग्न में कारक ग्रह की भूमिका निभाता है.लग्नस्थ होकर यह व्यक्ति को नवम एवं दशम भाव का फल देता है.यह व्यक्ति को धार्मिक एवं बुद्धिमान बनता है.इनमें श्रेष्ठ जनों के प्रति श्रद्धा का भाव रहता है.सरकार एवं सरकारी तंत्र से सहयोग व सम्मान प्राप्त होता है.जन्म स्थान से दूर इनका भाग्य फलित होता है.इन्हें माता पिता का स्नेह और सहयोग प्राप्त होता है.बुध अपनी पूर्ण दृष्टि से सप्तम भाव को देखता है जिससे वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से सुखमय होता है.संतान एवं जीवनसाथी से सहयोग मिलता है.लग्नस्थ बुध अगर पाप ग्रहों से पीड़ित होता है तो धन, सुख एवं गृहस्थी में बाधक होता है.
तुला लग्न में लग्नस्थ गुरू (Jupiter placed in Libra Ascendant)
आपका लग्न तुला है तो आपकी कुण्डली में गुरू अकारक ग्रह है.यह तृतीय और षष्टम भाव का स्वामी है.गुरू अगर कुण्डली में लग्नस्थ है तो यह आपको आत्मविश्वास से परिपूर्ण बनाता है (Jupiter in the ascendant gives confidence).आपको विद्वान एवं साहसी भी बनाता है.आप अपनी बुद्धि एवं क्षमता से जीवन में धन व मान सम्मान अर्जित करते हैं.लग्न में बैठा गुरू पंचम, सप्तम एवं नवम भाव को देखता है. पंचम भाव पर गुरू की दृष्टि इस लग्न के लिए संतान कारक है. यह आपको बौद्धिक क्षमता एवं उच्च शिक्षा भी प्रदान करता है. भाईयों से सहयोग दिलाता है.जीवनसाथी से सहयोगात्मक एवं प्रेमपूर्ण सम्बन्ध बनाता है.मातृ पक्ष से लाभ दिलाता है.
तुला लग्न में लग्नस्थ शुक्र (Venus placed in Libra ascendant)
तुला लग्न की कुण्डली में शुक्र लग्नेश और अष्टमेश होता है.इस लग्न में यह कारक ग्रह की भूमिका निभाता है.प्रथम भाव में शुक्र की स्थिति से व्यक्ति उर्जावान एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण होता है.शुक्र के शुभ प्रभाव से व्यक्ति समान्यत: स्वस्थ और निरोग रहता है.सौन्दर्य के प्रति आकर्षण रहता है.संगीत एवं कला में अभिरूचि होती है.सप्तम भाव पर शुक्र की पूर्ण दृष्टि होने से व्यक्ति के कई प्रेम प्रसंग होते हैं.गृहस्थ जीवन में इस विषय के कारण जीवनसाथी से मनमुटाव भी होता है.भोग विलास की वस्तुओं में धन खर्च करना इन्हें पसंद होता है.
तुला लग्न में लग्नस्थ शनि (Saturn placed in Libra Ascendant)
कन्या लग्न की कुण्डली में शनि चतुर्थेश और पंचमेश होकर केन्द्र एवं त्रिकोण भाव का स्वामी होता है.इन दोनों भाव का स्वामी होने से शनि प्रमुख कारक ग्रह होता है (Saturn becomes very influential as it becomes the lord of a Cadent and trine house).इस लग्न मे शनि के लग्नस्थ होने से माता पिता से स्नेह व सहयोग प्राप्त होता है.शैक्षणिक स्थिति अच्छी रहती है.तकनीकी शिक्षा में इन्हें विशेष कामयाबी मिलती है.शनि अपनी पूर्ण दृष्टि से तृतीय, सप्तम एवं दशम भाव को देखता है.इसके प्रभाव से इनमें दया और करूणा की भावना का अभाव होता है.विवाह में विलम्ब होता है एवं गृहस्थ जीवन में जीवनसाथी से मतभेद होता है.शनि इन्हें धनवान बनाने के साथ ही भूमि और वाहन का सुख भी प्रदान करता है. सगे सम्बन्धियों से विवाद और मनमुटाव की संभावना रहती है.
तुला लग्न में लग्नस्थ राहु (Rahu placed in Libra Ascendant)
आपका जन्म तुला लग्न में हुआ है और लग्न भाव में राहु बैठा है तो आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना होता है.राहु अन्तर्मुखी बनाता है जिसके कारण किसी कार्य को पूरा करने से पहले उसके विषय में किसी से जिक्र नहीं करते.कार्य पूरा होने से पूर्व जिन योजनाओं का जिक्र करते हैं वह कार्य कठिनाई से होता है.लग्न में बैठा राहु पंचम, सप्तम एवं नवम भाव को देखता है.राहु की दृष्टि से शिक्षा में रूकावट, जीवनसाथी एवं संतान से असहयोग और भाग्य की हानि होती है।
तुला लग्न में लग्नस्थ केतु (Ketu placed in Libra Ascendant)
केतु तुला लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ होकर पंचम, सप्तम एवं नवम भाव को देखता है.लग्न में बैठा केतु व्यक्ति को परिश्रमी और साहसी बनाता है.साहस और परिश्रम के बल पर व्यक्ति कठिनतम कार्यों को भी पूरा करने की क्षमता रखता है.दूसरों के धन पर इनकी दृष्टि होती है.शिक्षा में केतु बाधक होता है.आमतौर पर इनमें धार्मिक भावनाओं का अभाव होता है.मन में अनजाना भय रहता है.सट्टा एवं जुए में धन अपव्यय होता हैं.
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आपके कमेन्ट्स (36 मिले):
pl.tell me about my marrieage when it will be?
and i wants to go to foriegn
marriage??
main bhut kuhs hoon because mere help karne wala meel gaya hai, sir i want to say that mera date of birth nahi malum hai so that aap humare help kar saktain hai mera koi bhi kam sahi nahi hota hai and main bhaut hard work karat hoon par result 15% hi meelta hai sir main kya karoo koi upai bataye ya koi stone hoto bataye sir main pichle 8 saal se presaan hoon aage mera koi kam sahi hoga ki nahi plz mujhe bataye sir aap ki badi kripa hogi.
Day, sunday, time:3.30
Iwant to Known about my Futur,my life partner.
Mera Tula lagna hi. Per koi graha nahi hi.
I want to known about my promotion when will be?
mari kundli tule lagan ki hai mein 10th house mein neech ka mangal hai. plz uppaya batiya.
tahnks
kya aap lagan kai anusar grah jis bhav mai bethe hai uska faladesh dai sakete ya vo aapki site par hai kripa kar kai marg darahan kare
thanks
my date of birth is 24janvery1981
place indore and my friends dob is 1janvery 1981 place is mysor.
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