- आपकी जन्म कुंडली
- कुंडली फलादेश
- कालसर्प दोष चैक
- वर्ष कुंडली
- वर्षफल
- राशिफल
- आज का राशिफल
- मासिक राशिफल
- दैनिक ज्योतिष
- चौघड़िया
- राहुकाल
- आज का पंचाग
- वैवाहिक ज्योतिष
- विवाह मिलान
- मांगलिक दोष
- लाल किताब
- लालकिताब कुंडली
- लालकिताब कुंडली
- अंक ज्योतिष
- आपका नाम
- आपका जन्मदिन
- नाम सलाह
- अन्य
- शुभ राशि रत्न
- शुभ रुद्राक्ष
गोचर में शनि (Transits of Saturn)
जन्म पत्रिका के 12 भावो में आकाशीय ग्रहों को जन्म लग्न के अनुसार स्थान दिया जाता है। व्यक्ति के जन्म के पश्चात ग्रह जिस प्रकार से जन्म पत्रिका के चक्र में घूमते हैं उसे ग्रहो का गोचर कहा जाता है।
सभी ग्रह समय समय पर अपने भाव के अनुसार प्रभाव देते हैं इसमें शनि का गोचर क्या कहता है देखें (Saturn's transit refers to the journey of Saturn through the 12 signs)।
गोचर शनि की विशेषता (Importance of Saturn's Transit)
शनि देव के नाम से बड़े से बड़ा सूरमा भी घबराता है। शनि का गोचर राजा को रंक और शक्तिशाली को शक्तिहीन बना देता है। लेकिन जरूरी नहीं कि गोचर में शनि देव सभी के लिए अशुभ कारक होते हैं। गोचर में शनि के कुछ सामान्य फल होते हैं तो कुछ विशेष प्रभाव भी होता है। साढ़े साती और कण्टक शनि ये दो शनिदेव के विशेष गोचर माने गये हैं। गोचर में साढ़े साती के दौरान शनि देव ढ़ाई ढ़ाई वर्ष के अन्तराल पर राशि परिवर्तन कर व्यक्ति की अलग अलग प्रकार से परीक्षा लेते हैं।
गोचर में शनि की साढ़े साती (Saturn's Sade-sati transit)
जब शनि का गोचर जन्म राशि से 12 वीं राशि में होता है तब साढ़े साती की शुरूआत होती है। ढाई वर्ष बाद जब शनि गोचर में जन्म राशि में पहुंचता है तब सिर पर साढ़ेसाती होती है जो ढ़ाई वर्ष तक रहती है अंतिम ढ़ाई वर्ष में शनि का गोचर जन्मराशि से एक राशि आगे होता है इस समय उतरती साढ़ेसाती होती है। गोचर में यह शनि काफी अनिष्टकारी माना जाता है। चढ़ती साढ़ेसाती के दौरान शनि धन की हानि करते हैं और जीवन को इस प्रकार अस्त व्यस्त कर देते हैं कि चैन से जीना मुश्किल हो जाता है। मानसिक और शारीरिक तौर पर भी व्यक्ति परेशान और पीड़ित होता है। शनि का गोचर आप आनलाइन astrobix.com पर भी देख सकते हैं
जन्मराशि में जब शनि का गोचर होता है उस दौरान शनि का गोचर विशेष पीड़ादायक होता है। इस समय हर तरफ से बाधा और रूकावट आकर आपके कार्य में व्यवधान डालते हैं। मन अशांत और चिन्ताओं से भरा होता है। स्वास्थ्य पर भी यह शनि अपनी कुदृष्टि डालता है जिससे रोग और बीमारियां आकर आपको घेरती हैं और आर्थिक क्षति एवं धन का अपव्यय होता रहता है। साढ़ेसाती जाते-जाते भी अपना तेवर दिखा जाती है। उतरती साढ़ेसाती के दौरान जब शनि जन्म राशि से एक राशि आगे बढ़ता है तब यह पारिवारिक शांति में विघ्न डालता है। इस समय भाई बंधुओं से मतभेद और मनमुटाव होता है। घर के लोग बीमार रहते हैं, इस समय किसी कुटुम्बी के लिए यह विशेष कष्टकारी हो सकता है।
गोचर में कण्टक शनि: (Kantak Shani Transit of Saturn)
गोचरवश शनि देव जब जन्म राशि से चतुर्थ राशि में पहुंचते हैं तो कण्टक शनि कहे जाते हैं। नामानुसार शनि इस समय बाधक और कष्टकारी हो जाते हैं। इस स्थिति में स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस समय व्यक्ति अधिकतर बीमार रहता है। परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि व्यक्ति को अपना घर छोड़कर अन्यत्र रहना होता है। चन्द्र राशि से सप्तम राशि में शनि का गोचर होने पर परदेश में निवास होता है। दशम राशि में शनि जीवन में उथल-पुथल मचा देता है। गोचर में इस भाव में शनि के आने पर रोजी रोजगार, व्यापार एवं कारोबार में परेशानी और असफलताओं का सामना करना होता है।
- शुक्र ग्रह की शान्ति के उपाय- Remedies for Venus
- Monthly Horoscope September 2010 - मासिक होरोस्कोप
- पंचक - Panchak
- शनि साढेसाती के तीन चरण - Three Steps of Shani Sade Sati and you
- कालसर्प शान्ति के लिये नाग पंचमी पूजा- Nag Panchmi 2010: An Occasion to Pacify Kalsarp Dosha
- सोये ग्रह के लिये उपाय - Lal Kitab Remedies for Sleepy Planets
- गुरु वक्री:- 23 जुलाई 2010 कुम्भ में वापसी - Retrograde Jupiter re-enters Aquarius sign: 23rd July 2010
- मंगल का कन्या राशि में प्रवेश Mars Enters Virgo 20 July 2010
- Raksha Bandhan Muhurat - 24th August 2010 - रक्षा बंधन मुहूर्त 24 अगस्त 2010
- प्रेम विवाह - Love Marriage analysis through the Birth Chart
- विवाह समय निर्धारण - Calculating the time of marriage through Mahadasha
- विवाह के तीन सूत्र ग्रह : गुरु, शुक्र व मंगल (Three keys to marriage astrology : Jupiter, Venus and Mars)
- बुध व गुरु ग्रह की शान्ति के उपाय (Remedies for Mercury and Jupiter according to Vedic Astrology)
- विवाह से पूर्व प्रश्न कुण्डली से जानिए भावी दम्पत्ति का स्वभाव (Know the nature of the married couple through Horary astrology)
- विवाह के लिए प्रश्न कुण्डली में ग्रह स्थिति (The position of planets in the Prashna kundali)


del.icio.us
Digg
आपके कमेन्ट्स (2 मिले):
from the placement of planet in janm kundli or from moon sign
आपका क्या कहना है?