गोचर में शनि (Transits of Saturn)
जन्म पत्रिका के 12 भावो में आकाशीय ग्रहों को जन्म लग्न के अनुसार स्थान दिया जाता है। व्यक्ति के जन्म के पश्चात ग्रह जिस प्रकार से जन्म पत्रिका के चक्र में घूमते हैं उसे ग्रहो का गोचर कहा जाता है।
सभी ग्रह समय समय पर अपने भाव के अनुसार प्रभाव देते हैं इसमें शनि का गोचर क्या कहता है देखें (Saturn's transit refers to the journey of Saturn through the 12 signs)।
गोचर शनि की विशेषता (Importance of Saturn's Transit)
शनि देव के नाम से बड़े से बड़ा सूरमा भी घबराता है। शनि का गोचर राजा को रंक और शक्तिशाली को शक्तिहीन बना देता है। लेकिन जरूरी नहीं कि गोचर में शनि देव सभी के लिए अशुभ कारक होते हैं। गोचर में शनि के कुछ सामान्य फल होते हैं तो कुछ विशेष प्रभाव भी होता है। साढ़े साती और कण्टक शनि ये दो शनिदेव के विशेष गोचर माने गये हैं। गोचर में साढ़े साती के दौरान शनि देव ढ़ाई ढ़ाई वर्ष के अन्तराल पर राशि परिवर्तन कर व्यक्ति की अलग अलग प्रकार से परीक्षा लेते हैं।
गोचर में शनि की साढ़े साती (Saturn's Sade-sati transit)
जब शनि का गोचर जन्म राशि से 12 वीं राशि में होता है तब साढ़े साती की शुरूआत होती है। ढाई वर्ष बाद जब शनि गोचर में जन्म राशि में पहुंचता है तब सिर पर साढ़ेसाती होती है जो ढ़ाई वर्ष तक रहती है अंतिम ढ़ाई वर्ष में शनि का गोचर जन्मराशि से एक राशि आगे होता है इस समय उतरती साढ़ेसाती होती है। गोचर में यह शनि काफी अनिष्टकारी माना जाता है। चढ़ती साढ़ेसाती के दौरान शनि धन की हानि करते हैं और जीवन को इस प्रकार अस्त व्यस्त कर देते हैं कि चैन से जीना मुश्किल हो जाता है। मानसिक और शारीरिक तौर पर भी व्यक्ति परेशान और पीड़ित होता है। शनि का गोचर आप आनलाइन astrobix.com पर भी देख सकते हैं
जन्मराशि में जब शनि का गोचर होता है उस दौरान शनि का गोचर विशेष पीड़ादायक होता है। इस समय हर तरफ से बाधा और रूकावट आकर आपके कार्य में व्यवधान डालते हैं। मन अशांत और चिन्ताओं से भरा होता है। स्वास्थ्य पर भी यह शनि अपनी कुदृष्टि डालता है जिससे रोग और बीमारियां आकर आपको घेरती हैं और आर्थिक क्षति एवं धन का अपव्यय होता रहता है। साढ़ेसाती जाते-जाते भी अपना तेवर दिखा जाती है। उतरती साढ़ेसाती के दौरान जब शनि जन्म राशि से एक राशि आगे बढ़ता है तब यह पारिवारिक शांति में विघ्न डालता है। इस समय भाई बंधुओं से मतभेद और मनमुटाव होता है। घर के लोग बीमार रहते हैं, इस समय किसी कुटुम्बी के लिए यह विशेष कष्टकारी हो सकता है।
गोचर में कण्टक शनि: (Kantak Shani Transit of Saturn)
गोचरवश शनि देव जब जन्म राशि से चतुर्थ राशि में पहुंचते हैं तो कण्टक शनि कहे जाते हैं। नामानुसार शनि इस समय बाधक और कष्टकारी हो जाते हैं। इस स्थिति में स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस समय व्यक्ति अधिकतर बीमार रहता है। परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि व्यक्ति को अपना घर छोड़कर अन्यत्र रहना होता है। चन्द्र राशि से सप्तम राशि में शनि का गोचर होने पर परदेश में निवास होता है। दशम राशि में शनि जीवन में उथल-पुथल मचा देता है। गोचर में इस भाव में शनि के आने पर रोजी रोजगार, व्यापार एवं कारोबार में परेशानी और असफलताओं का सामना करना होता है।
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